Kader Khan Birthday: अमिताभ के लिए कादर खान ने लिखी थीं 22 फिल्में, कब्रिस्‍तान में चिल्‍लाते देख इस इंसान ने दिया था काम

आज ही के दिन सन 1937 में कादर खान का काबुल में जन्‍म हुआ था। उनके जन्म से पहले उनके तीन भाई चल बसे थे। उनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा था। इसके बाद उनके माता-पिता अफगानिस्तान छोड़कर भारत आ गए थे।

Kader Khan lesser known facts
Kader Khan lesser known facts  
मुख्य बातें
  • बॉलीवुड एक्‍टर कादर खान का आज (22 अक्‍टूबर) जन्‍मदिन है।
  • आज ही के दिन सन 1937 में काबुल में उनका जन्‍म हुआ था।
  • कादर खान ने 31 दिसंबर 2018 को आखिरी सांस ली थी।

Kader Khan Birthday: बॉलीवुड के हरफनमौला और अद्भुत प्रतिभा के धनी एक्‍टर कादर खान का आज (22 अक्‍टूबर) जन्‍मदिन है। आज ही के दिन सन 1937 में काबुल में उनका जन्‍म हुआ था। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और जितेंद्र जैसे बड़े अभिनेताओं को स्थापित करने में कादर खान का अहम योगदान है। कादर खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके जन्म से पहले उनके तीन भाई चल बसे थे। उनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा था। इसके बाद उनके माता-पिता अफगानिस्तान छोड़कर भारत आ गए थे।

कादर खान ने 31 दिसंबर 2018 को आखिरी सांस ली और 01 जनवरी 2019 को उनके निधन की खबर भारत आई। निधन के वक्‍त वह अपने बेटे सरफराज के पास कनाडा में थे। कादर खान का व्‍यक्तित्‍व ऐसा था कि वह जिस फ‍िल्‍म में होते उसमें छा जाते। सेठ से लेकर नौकर तक, गुंडे से लेकर पुलिस वाले तक का रोल उन्‍होंने बखूबी निभाया।

आज उनके जन्‍मदिन पर जानते हैं उनकी कुछ दिलचस्‍प बातें

  1. वो मुंबई में पले बढ़े, यहीं से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की और इसके बाद उन्होंने कॉलेज में पढ़ाया भी। लेकिन उनका एक्टर बनना तय था और उन्हें फिल्मों में एंट्री मिल गई। कादर खान ने साल 1973 में फिल्म दाग से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था, जिसमें राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी जैसे एक्टर्स थे। 
  2. 1970 और 75 के बीच वह स‍िव‍िल इंजीन‍ियर‍िंग के प्रोफेसर थे और इसी के साथ ही नाटकों में भी काम करते थे। इसी दौरान एक्‍टर द‍िलीप कुमार ने उनको नोट‍िस किया और अपनी अगली फ‍िल्‍म के ल‍िए साइन किया। कादर खान ने बॉलीवुड में कदम फ‍िल्‍म दाग से रखा था जिसमें राजेश खन्‍ना लीड रोल में थे। इसमें कादर खान का रोल एक एडवोकेट का था। 
  3. कादर खान की मां उन्हें पढ़ने के लिए मस्जिद भेजा करती थीं लेकिन वह मस्जिद से भागकर कब्रिस्तान चले जाते थे। वहां पर वह घंटों चिल्लाते थे। एक रात कादर खान चिल्‍ला कर रहे थे तभी वहां पर से गुजर रहे किसी ने पूछा कब्रिस्तान में क्या कर रहे हो? कादर बोले- मैं दिन में जो भी अच्छा पढ़ता हूं रात में यहां आकर बोलता हूं। ऐसे मैं रियाज करता हूं। वह शख्स अशरफ खान थे जो फिल्मों में काम करते थे। उन्होंने पूछा नाटक में काम करोगे? उन्होंने कादर खान को रोल दे दिया। एक नाटक में दिलीप कुमार की नजर कादर खान पर पड़ी थी। दिलीप कुमार ने उन्हें अपनी फिल्म सगीना के लिए साइन कर लिया।
  4. राजेश खन्‍ना के कहने पर कादर खान को मनमोहन देसाई ने फ‍िल्‍म रोटी के डायलॉग ल‍िखने का मौका द‍िया था। यही नहीं, इसके ल‍िए उनको उस समय एक लाख बीस हजार की फीस भी दी गई थी। कादर खान अपने समय के ऐसे स्‍क्रीनराइटर थे जिन्‍होंने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के राइवल कैंप्‍स में काम किया था। उनके अलावा ये रिकॉर्ड स‍िर्फ अमिताभ बच्‍चन के नाम है।
  5. कादर खान की जोड़ी को गोव‍िंदा के साथ खासा पसंद किया गया। दोनों की खास फ‍िल्‍मों में दरिया दिल, राजा बाबू, कुली नंबर 1, छोटे सरकार, आंखें, तेरी पायल मेरे गीत, आंटी नंबर 1, हीरो नंबर 1, राजाजी, नसीब, दीवाना मैं दीवाना, दूल्हे राजा, अखियों से गोली मारे आद‍ि शामिल हैं। 
  6. कादर खान ने अपने डायलॉग से ही उन्‍होंने अमिताभ को एंग्रीमैन बनाया। अमिताभ बच्चन और जितेंद्र जैसे बड़े अभिनेताओं को स्थापित करने में कादर खान का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया और लगभग 200 फिल्मों के लिए स्क्रीन प्ले लिखा। 1970 से उन्होंने बॉलीवुड के हर बड़े कलाकार के साथ काम किया। कादर खान ने ही शहंशाह जैसी फ‍िल्‍म के डायलॉग लिखे। 
  7. बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के लिए जंजीर और शोले जैसी फिल्में लिखने वाले जावेद- सलीम के अलावा कादर खान ने भी उनके लिए बेहतरीन फिल्में लिखीं। कादर ने अमिताभ के लिए करीब 22 फिल्में लिखीं जिनमें अमर अकबर एंथनी, लावारिस, सत्ते पे सत्ता, शराबी और अग्निपथ जैसी फिल्में शामिल हैं। 
  8. कादर खान ने राजेश खन्ना की महाचोर, छैला बाबू, धरम कांटा, फिफ्टी फिफ्टी, नया कदम, मास्टरजी और नसीहत जैसी फिल्मों के डायलॉग लिखे। उन्‍हें मेरी आवाज सुनो फिल्म के लिए 1982 में सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का पुरस्कार मिला और 1993 में अंगार फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। निधन के बाद उनके नाम के लिए पद्मश्री पुरस्‍कार की घोषणा हुई।
  9. कादर खान का अंतिम समय मुश्किलों भरा रहा। साल 2015 में उनके घुटनों का ऑपरेशन हुआ जिसके बाद उन्हें चलने फिरने में परेशानी होने लगी और वो केवल व्हील चेयर पर ही रहते थे। बताया जाता है कि उन्हें मेमोरी लॉस की परेशानी हो गई थी जिसके चलते उन्हें कुछ याद नहीं रहता था। 31 दिसंबर 2018 को कनाडा में कादर खान ने अंतिम सांस ली। वहीं उनका अंतिम संस्कार भी किया गया।

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