दिलीप कुमार के पाकिस्तान स्थित घर की तस्वीरें आईं सामने, एक्टर ने सुनाए बचपन के किस्से

बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार के पाकिस्तान स्थित पुश्तैनी घर को वहां की सरकार खरीदकर उसका संरक्षण करना चाहती है। इस बीच एक्टर के पाक स्थित घर की तस्वीरें सामने आईं।

Dilip Kumar Ancestral Home
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मुख्य बातें

  • पाकिस्तान स्थित दिलीप कुमार के घर का संरक्षण करेगी प्रांतीय सरकार
  • एक्टर के पुश्तैनी घर की तस्वीरें आई सामने
  • दिलीप कुमार ने शेयर किए बचपन के किस्से।

97 साल के बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार दिलीप कुमार का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वहीं उनका बचपन बीता। हाल ही में खबर आई कि पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर को खरीदकर उसका संरक्षण करना चाहती है। इसके बाद दिलीप कुमार ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के लोगों से यह अपील की कि वो उनके पुश्तैनी घर की तस्वीरें खींचकर उन्हें टैग करें, ताकि वो अपना घर देख सकें। मालूम हो कि दिलीप कुमार का पुश्तैनी घर पाकिस्तान के पेशावर प्रांत के खैबर-पख्तूनख्वा इलाके में है।

इसके बाद पाकिस्तान के एक रिपोर्टर ने दिलीप कुमार के घर की तस्वीरों को पोस्ट कर उन्हें टैग किया। इन तस्वीरों को दिलीप कुमार ने शेयर किया और उन्हें धन्यवाद कहा। इसके बाद दिलीप कुमार ने अपने पुश्तैनी घर के कई किस्से शेयर किए जो 19 दिसंबर, 2011 को उनके लिखे गए ब्लॉग से लिए गए। 

मां को ऐसे बयां किया 

मैं अपने माता-पिता, दादा-दादी, चाचाओं, चाचियों और चचेरे भाइयों की यादों से भरा हुआ हूं, जिन्होंने घर को अपनी बातों और हंसी की आवाज से भर दिया था। मेरी मां, जो बहुत नाजुक थी, हमेशा घर की बड़ी रसोई में रहती थी और एक बच्चे के तौर पर मैं उनके काम को पूरा करने के लिए उसका इंतजार करता था। ताकि मैं उसके पास बैठकर उसके खूबसूरत चेहरे को देख सकूं।

दादी की कहानियां

मेरे पास शाम की वो यादें हैं जब हमारा परिवार शाम की चाय के लिए इकट्ठा होता था। एक बड़ा कमरा जहां महिलाएं प्रार्थना करती थी, छत, बेडरूम, सब कुछ। मैं अपने दादा की पीठ की सवारी को याद कर सकता हूं और मेरी दादी की वो डरावनी कहानियां जो वो मुझे घर से बाहर अकेले भटकने से रोकने के लिए सुनाती थीं।

पिता- चाचा संग सुनते थे कहानियां

दिलीप कुमार ने आगे पाकिस्तान के मशहूर किस्सा ख्वानी बाजार से जुड़ी अपनी बचपन की यादों को बयां किया। उन्होंने लिखा कि हर रोज जब किस्सा ख्वानी बाजार का व्यापार बंद हो जाता था तो एक कहानीकार लोगों के बीच बैठकर वीरता और जीत, छल और प्रतिशोध की कहानियां सुनाता था। जिन्हें मैं अपने पिता और चाचाओं के साथ बैठकर सुनता था।

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