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Akhilesh Yadav Net Worth: यूपी के पूर्व CM अखिलेश यादव के पास 25 लाख कैश, 74 लाख का कर्जा...नहीं है अपनी कोई गाड़ी

Akhilesh Yadav Net Worth: अखिलेश यादव ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके पास खुद की कोई कार भी नहीं है, इसके अलावा किसी तरह का लाइसेंसी हथियार भी नहीं है। अखिलेश यादव की सालाना कमाई 84.51 लाख रुपये हैं, जबकि पत्नी डिंपल यादव की कमाई 67.50 लाख रुपये हैं।

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अखिलेश यादव

Photo : Twitter

Akhilesh Yadav Net Worth: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कन्नौज लोकसभा सीट से पर्चा भर दिया है। अखिलेश यादव का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी व मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक से होगा। नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में अखिलेश यादव ने संपत्ति का भी खुलासा किया है। अखिलेश यादव की सालाना कमाई 84.51 लाख रुपये हैं, जबकि पत्नी डिंपल यादव की कमाई 67.50 लाख रुपये हैं। हलफमाने में उन्होंने अपना मुख्य व्यवसाय कृषि को ही बताया है, वहीं सांसद व विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन से भी उनकी आय होती है।

चुनावी हलफनामे में अखिलेश यादव ने बताया कि उनके ऊपर 74 लाख रुपये का बैंक कर्ज है तो वहीं पत्नी डिंपल पर भी 25 लाख रुपये का कर्जा है। इसके अलावा अखिलेश यादव के पास 25.61 लाख रुपये कैश, डिंपल यादव के पास 5.72 लाख रुपये की नकदी है।

अखिलेश के पास खुद की कार भी नहीं

अखिलेश यादव ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके पास खुद की कोई कार भी नहीं है, इसके अलावा किसी तरह का लाइसेंसी हथियार भी नहीं है। अखिलेश के ऊपर तीन राजनीतिक मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें एक पर हाईकोर्ट का स्टे लगा हुआ है। इसके अलावा अखिलेश यादव के पास किसी तरह की ज्वेलरी भी नहीं है। यूपी के पूर्व सीएम के पास उनके पैतृक गांव सैफइ के अलावा लखनऊ में करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति भी है।

कैसा है कन्नौज सीट का इतिहास

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने जब 2000 में कन्नौज को अलविदा बोला, तब बेटे अखिलेश यादव को गद्दी सौंपी। 2012 में जब अखिलेश प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पत्नी डिंपल यादव को उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित कराया। इसके बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पत्नी डिंपल यादव सांसद बनीं। हालांकि 2019 में भाजपा के सुब्रत पाठक ने डिंपल यादव को हराकर यह सीट उनसे छीन ली।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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