इलेक्शन

गिरिराज सिंह के लिए इस बार कैसी है बेगूसराय की लड़ाई? समझें समीकरण, जानें इस सीट का इतिहास

Election News: बिहार की बेगूसराय सीट से गिरिराज सिंह ने पहली बार चुनाव लड़ा था, 2014 में वो नवादा सीट से चुनकर दिल्ली पहुंचे थे। 2019 की लड़ाई में उनका मुकाबला कन्हैया कुमार से हुआ था, लेकिन इस बार का समीकरण बदल चुका है। गिरिराज के लिए ये चुनाव आसान नहीं होगा।

Image

बेगूसराय में गिरिराज सिंह vs अवधेश कुमार राय का मुकाबला।

Photo : Times Now Digital

History of Begusarai Seat: गिरिराज सिंह ने भले ही पिछले लोकसभा चुनाव में आसानी से जीत हासिल कर ली थी, लेकिन इस बार बिहार की बेगूसराय सीट का समीकरण बदल चुका है। राजद और सीपीआई एकसाथ चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे में काफी हद तक मुकाबले की तस्वीर बदली-बदली नजर आने वाली है। हालांकि पिछले चुनाव 2019 के आंकड़ों का जिक्र करें तो गिरिराज के लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है, लेकिन बीते कुछ दिनों में जिस तरह सड़कों पर उनका विरोध देखा गया उससे उनकी चिंता में इजााफा होना लाजमी है।

क्या कहता है बेगूसराय सीट का समीकरण?

भाजपा ने बेगूसराय सीट से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को एक बार फिर मैदान में उतारा है। INDI गठबंधन के तहत बिहार की ये सीट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के खाते में गई है। लालू की पार्टी राजद, कांग्रेस और सीपीआई यहां एकसाथ चुनाव लड़ रही हैं। वहीं राजद ने अपने कोटे की तीन सीटें मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को दे दी है। बेगूसराय सीट पर सीपीआई ने अवधेश कुमार राय (यादव) को मैदान में उतारा है। ऐसे में यहां इस बार गिरिराज सिंह बनाम अवधेश कुमार राय का सीधा मुकाबला होना है।

बीजेपी के लिए चिंता है बेगूसराय का इतिहास

बेगूसराय लोकसभा सीट के इतिहास का जिक्र किया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है। अब तक इस सीट पर 17 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें सिर्फ दो बार भाजपा के सांसद चुनकर संसद पहुंचे। कांग्रेस ने इस सीट पर कुल 9 बार जीत हासिल की है। जबकि सीपीआई और जनता दल को एक-एक बार जीत नसीब हुई। जदयू को इस सीट पर दो बार जीत मिली, तो वहीं आरजेडी का अब तक इस सीट पर खाता भी नहीं खुल सका है।

बेगूसराय लोकसभा सीट से कब कौन बना सांसद?

वर्षनामपार्टी
1952मथुरा प्रसाद मिश्राकांग्रेस
1957मथुरा प्रसाद मिश्राकांग्रेस
1962मथुरा प्रसाद मिश्राकांग्रेस
1967योगेंद्र शर्मासीपीआई
1971श्याम नंदन मिश्राकांग्रेस
1977श्याम नंदन मिश्राजनता पार्टी
1980कृष्णा साहीकांग्रेस
1984कृष्णा साहीकांग्रेस
1989ललित विजय सिंहजनता दल
1991कृष्णा साहीकांग्रेस
1996रामेंद्र कुमारनिर्दलीय
1998राजो सिंहकांग्रेस
1999राजो सिंहकांग्रेस
2004राजीव रंजन सिंहजदयू
2009मोनाज़िर हसनजदयू
2014भोला सिंहभाजपा
2019गिरिराज सिंहभाजपा

2014 के चुनाव में नवादा से जीते थे गिरिराज

लोकसभा चुनाव 2014 में गिरिराज सिंह ने बिहार के नवादा सीट से जीत हासिल की थी और पहली बार सांसद चुने गए थे। इसके बाद उन्हें साल 2017 में मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के पहली बार मंत्री पद मिला था। उन्हें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेवारी मिली थी। इसके बाद 2019 के चुनाव में उन्हें बेगूसराय से मैदान में उतारा गया और उन्होंने कन्हैया कुमार को हराया था।

गिरिराज सिंह ने बेगूसराय से दाखिल किया नामांकन

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को बेगूसराय से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। गिरिराज सिंह के बेगूसराय से नामांकन दाखिल करने के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी सहित एनडीए के कई नेता उपस्थित रहे। नामांकन पत्र भरने के बाद गिरिराज सिंह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का नारा है विकास, विकास और विकास, विरासत के साथ। उन्होंने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि नरेंद्र मोदी जाति की राजनीति नहीं करते हैं। टुकड़े-टुकड़े गैंग वाले लोग ही राष्ट्रवाद के खिलाफ बात करते हैं। वे कहते हैं कि हम परमाणु शस्त्र नहीं रखेंगे। कई ऐसी चीज है, जो टुकड़े-टुकड़े गैंग वाले लोग करते हैं।

13 मई को चुनाव बेगूसराय सीट पर होना है चुनाव

उन्होंने कहा कि मैंने नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। बेगूसराय में भी 10 सालों में सबका साथ, सबका विकास हुआ है। लेकिन, राष्ट्रवाद का जो विरोध करेगा, वैसे विरोधियों का मत मुझे नहीं चाहिए। बेगूसराय में चौथे चरण के तहत 13 मई को चुनाव होना है। यहां मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है। महागठबंधन ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अवधेश कुमार राय को उम्मीदवार बनाया है। पिछले चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने भाकपा के प्रत्याशी कन्हैया कुमार को पराजित किया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article