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अभेद ही रहेगा कांग्रेस का किला! रायबरेली में आज तय होगी उम्मीदवारी, इस चेहरे पर खेला जाएगा दांव

Raebareli Lok Sabha Election: सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी का रायबरेली से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है और वह सोमवार को रायबरेली आ सकती हैं, नामांकन दाखिल करने से पहले प्रियंका गांधी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर रणनीति तैयार करेंगी। बता दें, कांग्रेस पार्टी अब तक देशभर में 317 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।

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राहुल गांधी-प्रियंका गांधी

Photo : Twitter

Raebareli Lok Sabha Election: उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट कांग्रेस का अभेद किला रहा है। कैसी भी सियासी आंधी हो, लेकिन यह गढ़ हमेशा गांधी परिवार के लिए सुरक्षित रहता आया है। हालांकि, इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं और सोनिया गांधी के लोकसभा चुनाव न लड़ने से इस सुरक्षित सीट पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। बीजेपी किसी भी तरह इस मौके को हाथ से गंवाना नहीं देना चाहती है, ऐसे में वह हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है।

उधर, दक्षिण का सियासी समर निपटाने के बाद कांग्रेस का पूरा का पूरा थिंक टैंग अमेठी और रायबरेली सीट बचाने में जुट गया है। इसको लेकर शनिवार को कांग्रेस CEC की बैठक भी हुई, लेकिन दोनों सीटों पर उम्मीदवारी तय नहीं हो पाई। अब फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को करना है।

आज उठ जाएगा पर्दा?

रायबरेली सीट से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का नाम सबसे आगे चल रहा है। अटकले हैं कि अपनी मां सोनिया गांधी के इस अभेद गढ़ को बचाने के लिए प्रियंका गांधी को उतारा जा सकता है और यहीं से उनका सियासी डेब्यू भी होगा। हालांकि, प्रियंका गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी या नहीं? इस पर आज फैसला हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी का रायबरेली से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है और वह सोमवार को रायबरेली आ सकती हैं, नामांकन दाखिल करने से पहले प्रियंका गांधी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर रणनीति तैयार करेंगी।

स्थानीय कार्यकर्ता कर रहे प्रियंका-राहुल के नाम की मांग

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस CEC बैठक में अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवारी को लेकर चर्चा की गई और इसके बाद फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया गया। माना जा रहा है कि आज या कल में आलाकमान अपना फैसला सुना सकता है। उधर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी व अमेठी एवं रायबरेली के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने पिछले दिनों नेतृत्व से आग्रह किया था कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को इन सीट से चुनाव लड़ना चाहिए।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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