Bihar Election 2025: बिहार में एक मशहूर कहावत है, "ऊपर से फिट-फाट, नीचे से मोकामा घाट”, मतलब साफ है कि जो दुरुस्त दिख रहा है, उसकी असलियत कुछ और है। पटना से करीब 94 किलोमीटर दूर, एक विधानसभा क्षेत्र है, नाम है मोकामा। यूं तो बिहार में 'डबल इंजन की सरकार' है, लेकिन इस क्षेत्र में डंका सिर्फ 'छोटा सरकार' का बजता है।
आंखों पर काला चश्मा, बड़ी मूंछें और जुबान पर मगही भाषा। यही पहचान है बिहार के 'रॉबिनहुड' कहे जाने वाले अनंत सिंह (Anant Singh) की। यूं तो अनंत सिंह महज एक पूर्व विधायक हैं, लेकिन भौकाल ऐसा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ललन सिंह, अशोक चौधरी जैसे नेताओं के साथ उठना-बैठना है।
anant singh news 1
अनंत सिंह की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू के दिग्गज नेता ललन सिंह की मदद के लिए अनंत सिंह को जेल से पैरोल पर बाहर निकालना पड़ा।
लोगों को पसंद है अनंत सिंह का अनोखा अंदाज
सोशल मीडिया पर अनंत सिंह एक वायरल कंटेंट हैं, जिन्हें हर उम्र के लोग मजे लेकर सुनते हैं। उनका हाजिर जवाबी और दो-टूक जवाब देने का अंदाज लोगों को खूब रास आता है। जेन-जी की भाषा में कहें तो वो एक 'अनफिल्टर' नेता हैं, जो दिल में वही, जुबान पर। अनंत सिंह उन नेताओं में हैं, जो जनता से मिलने-जुलने में विश्वास रखते हैं। उनका घर किसी जनता दरबार से कम नहीं है...
anant singh 1
हालांकि, अनंत सिंह पर अपराध के कई दाग भी हैं। 2020 के चुनावी हलफनामे में अनंत सिंह ने बताया था कि उनके खिलाफ कुल 7 मर्डर, 11 मर्डर की कोशिश के अलावा अपहरण के 4 मुकदमों समेत 38 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि वह इन सभी मुकदमों बरी हो चुके हैं।
जब भाई की हत्या का बदला लेने के लिए तैरकर पार की नदी
एक जुलाई 1961 को जन्मे अनंत सिंह को अपने भाईयों से काफी प्रेम है। अनंत सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। कहा जाता है कि एक समय ऐसा था कि उन्होंने दुनियादारी त्याग कर वैराग्य चुन लिया था।
साधु बनने के लिए अयोध्या और हरिद्वार में घूम रहे थे, लेकिन साधुओं के जिस दल में थे, वहां झगड़ा हो गया। मन वैराग्य के संसार से उचटने ही लगा था कि सबसे बड़े भाई बिरंची सिंह की हत्या हो गई।
anant singh 2
भाई की हत्या की खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। अनंत सिंह ने ठान लिया कि चाहे जो कुछ हो जाए वो अपने भाई की हत्या का बदला लेकर रहेंगे। एक दिन पता चला कि भाई का हत्यारा किसी नदी के पास बैठा है तो उसे मारने के लिए तैरकर नदी पार की और ईंट-पत्थरों से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।
नीतीश कुमार की मदद और खुल गया विधानसभा का दरवाजा
धीरे-धीरे अनंत सिंह का मोकामा में वर्चस्व बढ़ने लगा था। वो क्षेत्र में भूमिहार समुदाय के रक्षक के रूप में उभरने लगे थे। महापर्व छठ पर धोती बांटना, रोजगार के लिए गरीबों को तांगे देकर मदद करना और रमजान के दिनों में इफ्तार करना। इन्हीं कामों की वजह से मोकामा की जनता के दिल में अनंत सिंह घर कर चुके थे। उनके बढ़ते स्टारडम को नीतीश कुमार (Nitish Kumar) भली भांति समझ चुके थे।
anant singh
यह बात साल 1994 की है। तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव (Lalu Yadav) ने नीतीश कुमार और उनके समर्थकों को एक तरह से साइडलाइन कर दिया था। साल 1996 के लोकसभा में नीतीश कुमार को इस बात की चिंता था कि बाढ़ का जातिगत समीकरण उनके खेल बिगाड़ सकती है। ऐसे में उन्होंने अनंत सिंह से मदद की गुहार लगाई। 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने नीतीश कुमार की मदद की।
नीतीश कुमार ने भी अनंत सिंह को विधानसभा भेजने की ठान ली। साल 2005 विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर उन्हें मोकामा विधानसभा से उतारा। इस क्षेत्र से चुनाव जीतना अनंत सिंह को लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। चुनाव परिणाम आने के बाद अनंत सिंह विधायक बन चुके थे।
anant singh 4
पशुओं से है खूब लगाव
अनंत सिंह का पशुओं से बेहद लगाव है। खासकर घोड़ा, हाथी और गायों से। घोड़े को लेकर अनंत सिंह कि दीवानगी इसी बात से समझा जा सकता है कि एक बार अनंत सिंह बग्गी पर सवार होकर विधानसभा पहुंच गए थे। अनंत सिंह के खास घोड़े का नाम 'लाडला' है ।
समर्थक बताते हैं कि लाडला घोड़े को सुबह-शाम देसी गाय का दूध पिलाया जाता है। एक किस्सा बड़ा मशहूर है कि 2007 में अनंत सिंह जानवरों के मेले में लालू का घोड़ा खरीदने पहुंचे थे। अनंत सिंह जानते थे कि लालू उन्हें अपना घोड़ा नहीं बेचेंगे, इसलिए उन्होंने किसी और के जरिए घोड़ा खरीदा था।
anant singh horse
साल 2015: अनंत सिंह की बढ़ने लगी मुश्किलें
साल 2010 विधानसभा चुनाव में उनका जलवा कायम रहा। हालांकि, साल 2015 में जेडीयू- आरजेडी गठबंधन की वजह से उनका टिकट कट गया, लेकिन अनंत सिंह कहां हार मानने वाले थे। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर ली। भले ही अनंत सिंह ने साल 2015 विधानसभा चुनाव में बाजी मार ली लेकिन उनकी मुश्कलें अब बढ़ने लगी थी।
मामला यह है कि बाढ़ बाजार क्षेत्र में चार युवकों ने एक महिला से छेड़छाड़ की थी। इसको लेकर काफी हंगामा मचा था। आरोप है कि अनंत सिंह ने महिला को न्याय दिलाने के लिए चारों लड़कों को अगवा कर लिया, जिनमें से एक युवक की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसका शव जंगल में पड़ा मिला था। जब किसी तरह पुलिस ने तीन युवकों को रिहा किया।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि विधायक ने चारों युवकों को सबक सिखाने का आदेश दिया था। युवकों की शिकायत पर अनंत सिंह को 24 जून 2015 को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके चार साल बाद यानी 2019 में अनंत सिंह के पैतृक घर पर छापा पड़ा। उनके घर से 1 एके 47 राइफल, दो हैंड ग्रेनेड साथ ही मैगजीन बरामद हुए। इस केस में अनंत सिंह को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई। वहीं, उनकी विधायकी भी चली गई। हालांकि, साल 2022 में हुए उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
anant singh ak 47
पांचवीं बार विधायक बनने की तैयारी
राजद नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) लगातार ये आरोप लगाते हैं कि अनंत सिंह को नीतीश कुमार एक सियासी मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अनंत सिंह फिलहाल एनडीए के लिए प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं।
anant singh nitish kumar
अनंत सिंह की सबसे बड़ी ताकत वो जनता है, जिसकी वजह से वो पांचवीं बार विधायक बनने की कोशिश में जुटे हैं।
