World Wildlife Day 2023: भोजन से लेकर ईंधन, दवाओं, घर और कपड़ों तक सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर जगह लोग वन्यजीव और जैव विविधता आधारित संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर वन्य जीव लुप्त होंगे तो आने वाले समय में इंसानों पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। इसी के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से सबसे पहले विश्व वन्यजातीव दिवस 3 मार्च 2014 को मनाया गया और इसे आज तक मनाया जा रहा है। आइए इस खास अवसर पर विश्व वन्यजातीव दिवस के महत्व व इतिहास के बारे में जानते हैं।
3 मार्च को ही क्यों मनाते हैं?
जब हम विश्व वन्यजातीव दिवस की बात करते हैं तो सबसे पहले दिमाग में आता है कि इसे 3 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है। दरअसल, दुनिया भर से विलुप्त हो रहे फल-फूलों और जीव-जंतुओं के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड को प्रतिबंधित करने के लिए 3 मार्च 1973 को ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी खास दिन की याद में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 63वें सत्र में तय हुआ कि हर साल 3 मार्च को विश्व वन्यजातीव दिवस के रूप में मनाया जाएगा। बता दें कि साल 2014 में पहली बार इस दिन को मनाया गया था।
इस साल का थीम
विश्व वन्यजातीव दिवस के लिए हर साल एक नया थीम चुना जाता है। इस साल का थीम "वन्यजीव संरक्षण के लिए साझेदारी" (Partnerships for Wildlife Conservation) रखा गया है। थीम देने की शुरूआत साल 2015 में की गई थी। बता दें कि उस साल का थीम "वन्यजीव अपराध के बारे में गंभीर होने का समय है" चुना गया था। जबकि, बीते साल विश्व वन्य जीव दिवस का थीम "पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए प्रमुख प्रजातियों को फिर से लागू करना" था।
विश्व वन्यजातीव दिवस का उद्देश्य
विश्व वन्यजातीव दिवस का उद्देश्य दुनिया भर के लोगों में वन्यजीवों की सुरक्षा और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रति जागरूक करना है। यह समझना होगा कि पृथ्वी के पर्यावरण से तालमेल बनाए रखने के लिए धरती पर जैव विविधता बनाए रखने जरूरी है। इसलिए वन्य जीवों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 3 मार्च को वन्यजीव दिवस मनाया जाता है।
