Heatwave और भीषण गर्मी में क्यों पिघलने लगती हैं सड़के, तापमान या कुछ और है वजह

भीषण गर्मी और Heatwave का कहर बरस रहा है। कई स्थानों से सड़कें पिघलने की खबर सामने आती है, तो कभी आपने सोचा की गर्मी का मौसम आते ही क्यों सड़कें पिघलने लगती है। आइए जानते हैं इसकी असली वजह

उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव (Heatwave) का कहर देखने को मिल रहा है। मई और जून के महीनों में सूरज की तपिश अपने चरम पर होती है। जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है, तब इंसान तो इंसान, बल्कि बेजान चीजें भी जवाब दे देती है। भीषण गर्मी के इन दिनों में कई स्थानों से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जहां डामर, जिसे कोलतार भी कहा जाता है, से बनी पक्की सड़कें तक पिघलने (Road Melting) लगती हैं। सड़कों का इस तरह पिघलना न सिर्फ यातायात को प्रभावित करता है, बल्कि हादसों का कारण बन जाता है। लेकिन कभी आपने सोचा की क्यों गर्मी के मौसम में सड़के इस प्रकार पिघलने लगती है। इसका क्या कारण हो सकता है, आइए जानते हैं-

Heatwave

Heatwave और भीषण गर्मी में क्यों पिघलने लगती हैं सड़के (Photo - AI)

कोलतार की रासायनिक संरचना

हमारे देश में ज्यादातर सड़कें गिट्टी और 'बिटुमेन' (Bitumen) के मिश्रण से बनाई जाती हैं, जिसे आम भाषा में डामर, कोलतार या कई स्थानों पर तारकोल कहा जाता है। बिटुमेन कच्चे तेल का एक बाई-प्रोडक्ट है। इसकी खासियत यह है कि यह अत्यधिक संवेदनशील होता है। जिस पर तापमान का असर देखने को मिलता है। जी हां, सामान्य तापमान पर यह ठोस और मजबूत रहता है, लेकिन जैसे ही तापमान में वृद्धि होती है यह नरम पड़ने लगता है। और अगर तापमान 45 के पार होने लगता है तो कई स्थानों पर यह पिघलने लगता है, क्योंकि वहां सूरज की सीधी धूप पड़ती है।

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