CMA - कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट कोर्स कॉमर्स और फाइनेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और सफल करियर बनाने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए बेहद की लोकप्रिय प्रोफेशनल कोर्स है। आपको बता दें कि इस कोर्स का संचालन 'द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (ICMAI) द्वारा किया जाता है। यदि आप भी बैंकिंग, कॉर्पोरेट या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक बेहतरीन पद और आकर्षक सैलरी पाना चाहते हैं, तो आपके लिए जानना जरूरी है कि यह सीएमए है क्या? क्यों युवाओं में इस कोर्स की लोकप्रियता बढ़ रही है? इसे पूरा करने के बाद कितनी सैलरी मिलती है? और यह सीए और सीएस कोर्स से कैसे अलग है?
CMA कोर्स क्या है?
जिसे लोकप्रिय कोर्स को हम शॉर्ट-फॉर्म में CMA कहते हैं उसका पूरा नाम 'कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट' (Cost and Management Accountant) है। यह कोर्स किसी भी कंपनी या बिजनेस के आंतरिक वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है। एक सीएमए प्रोफेशनल का मुख्य काम कंपनी के उत्पादन या सेवा की लागत (Costing) को नियंत्रित करना, बजट तैयार करना और मैनेजमेंट को ऐसे वित्तीय सुझाव देना होता है जिससे कंपनी का मुनाफा बढ़ाया जा सके। इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कॉर्पोरेट फाइनेंस, लागत नियंत्रण (Cost Control), टैक्स प्लानिंग और रणनीतिक वित्तीय प्रबंधन में निपुण बनाना है।
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CA और CS से कैसे अलग है सीएमए?
सीएमए कोर्स के बारे में जानने के बाद अब सवाल यह उठता है कि ICMAI द्वारा संचालित यह कोर्स सीए (Chartered Accountant) और सीएस (Company Secretary) से कैसे लग है। आसान भाषा में समझे तो सीएमए मुख्य रूप से लागत नियंत्रण यानी कॉस्ट कंट्रोल, बजट प्लानिंग और बिजनेस स्ट्रेटजी पर फोकस करता है। वहीं सीए का फोकस ऑडिट और टैक्स पर होता है और सीएस का फोकस कॉर्पोरेट कानून व अनुपालन पर होता है। यह तीनों एक दूसरे से पूरी तरह से अलग हैं। हालांकि अधिकांश रूप से नाम सीए और सीएस का सुनने को मिलता है। इसके अलावा बता दें कि सीएमए कोर्स का संचालन ICMAI द्वारा, सीए कोर्स का संचालन ICAI द्वारा और सीएस कोर्स का संचालन ICSI द्वारा किया जाता है।
CMA का क्या काम होता है?
एक सीएमए के तौर पर व्यक्ति का मुख्य कार्य बजट प्लानिंग, कॉस्ट कंट्रोलिंग, कॉस्ट ऑडिट, स्ट्रैटेजिक डिसीजन लेना होता है। CMA बने उम्मीदवारों का मुख्य काम किसी कंपनी या बिजनेस के खर्चों को नियंत्रित करना, बजट बनाना, कॉस्ट को कम करना और वित्तीय फैसले लेने में कंपनी की मदद करना है। इन पदों पर काम करने वाले उम्मीदवारों को मोटी सैलरी मिलती है। छात्रों को विभिन्न कोर्स की विस्तृत जानकारी देने वाले यूट्यूबर सुदर्शन प्रकाश बताते हैं कि सीएमए के काम यह देखना होता है कि कंपनी का पैसा कहां बर्बाद हो रहा है और बिजनेस को लॉग टर्म लेवल पर कैसे ग्रो किया जाता है। वह बताते हैं कि यह मैनेजमेंट लेवल का कोर्स है। सुदर्शन बताते हैं कि सीएमए केवल अकाउंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कास्टिंग, फाइनेंस, टैक्सेशन, स्ट्रेटजी और कॉर्पोरेट लॉ की वास्ट नॉलेज प्रदान करता है।
क्या है सीएमए कोर्स के फेज
सीएमए बनने के लिए अभ्यर्थियों को तीन चरणों से गुजरना पड़ता है, जिसमें सीएमए फाउंडेशन, सीएमए इंटरमीडिएट और सीएमए फाइन होता है।
CMA कोर्स के फेज
इसके अलावा, अभ्यर्थियों को 15 महीने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को अनिवार्य रूप से पूरा करना होता है, जिससे उन्हें कॉर्पोरेट जगत का प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलता है।
CMA करने के बाद जॉब रोल्स
| कॉस्ट अकाउंटेंट (Cost Accountant) |
| फाइनेंशियल एनालिस्ट (Financial Analyst) |
| बजट कंट्रोलर (Budget Controller) |
| इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) |
| चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) |
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सीएमए के बाद कितनी मिलती है सैलरी?
सीएमए कोर्स को सफलतापूर्वक पास करने के बाद शुरुआती स्तर पर ही उम्मीदवारों को अच्छा-खासा सैलरी पैकेज मिलता है। ऐसे में अगर आपके पास अनुभव है और बड़ी कंपनी में काम करने का अवसर भी तो आपका सैलरी पैकेज और भी आकर्षक हो सकता है। सुदर्शन प्रकान से सीएमए के सैलरी स्ट्रक्चर को एक्सपीरियंस लेवल पर ब्रेकआउट करके बताया है। उनके अनुसार, फ्रेशर से सीनियर लेवल पर सैलरी पैकेज इस प्रकार हो सकता है -
फ्रेशर लेवल: एक फ्रेशर के रूप में शुरुआत करने वाले सीएमए प्रोफेशनल को 4 लाख रुपये से 8 लाख रुपये प्रति वर्ष का पैकेज मिलता है। जबकि MNCs और बिग-4 फर्मों में यह पैकेज 6 से 10 लाख या उससे भी अधिक हो सकता है।
3 से 5 साल के अनुभव के साथ: कुछ वर्षों के अनुभव के बाद सैलरी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में आपको 10 लाख रुपये से 18 लाख रुपये प्रति वर्ष तक का सैलरी पैकेज आसानी से मिल सकता है।
5 से 7 साल के अनुभव के साथ: इतने सालों के अनुभव के साथ सैलरी बढ़कर 20 से 30 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है।
सीनियर एवं लीडरशिप रोल: जब कोई प्रोफेशनल फाइनेंस मैनेजर, कंट्रोलर या CFO जैसे उच्च पदों पर पहुंचता है, तो उसकी सैलरी 25 लाख रुपये से 50 लाख रुपये प्रति वर्ष या इससे भी अधिक हो सकती है। सैलरी स्ट्रक्चर में वृद्धि आपके अनुभव, स्किल्स, कंपनी और इंडस्ट्री पर निर्भर करती है।
