नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत देश के 59 शिक्षा बोर्डों में एकरूपता लाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़े बदलावों पर काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश में 59 स्कूल बोर्ड संचालित हैं, जिनमें CBSE, CISCE और विभिन्न राज्य बोर्ड शामिल हैं। इन सभी बोर्डों के परीक्षा आयोजित करने के तरीके, मार्किंग सिस्टम और रिजल्ट पैटर्न अलग-अलग हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE, NEET और CUET में छात्रों को समान अवसर देने में चुनौती सामने आती है। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग बोर्डों के परीक्षा पैटर्न, मूल्यांकन प्रणाली और पाठ्यक्रम में भारी अंतर होने से छात्रों के बीच असमानता पैदा होती है। इसी वजह से अब बोर्ड परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक समान और पारदर्शी बनाने की तैयारी की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो NEP 2020 के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं को भी आसान और अधिक छात्र-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है। छात्रों को साल में दो बार परीक्षा देने का मौका मिल सकता है, ताकि वे अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें। इसके साथ ही प्रश्न पत्रों में कॉन्सेप्ट आधारित और एप्लिकेशन आधारित सवालों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
परख से होगा मूल्यांकन
नई शिक्षा नीति के तहत “PARAKH” नामक एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र की भी परिकल्पना की गई है। यह संस्था देशभर के बोर्डों के लिए समान मूल्यांकन मानक तैयार करने का काम करेगी। इसका उद्देश्य छात्रों की रटने की क्षमता के बजाय उनकी समझ, विश्लेषण और कौशल का आकलन करना होगा।
बोर्डों के बीच समानता की बात
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी बोर्डों के बीच समानता स्थापित होती है तो छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में बराबरी का अवसर मिलेगा। हालांकि राज्यों के अपने शिक्षा अधिकार और अलग-अलग शैक्षणिक ढांचे होने के कारण इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। इसके बावजूद केंद्र सरकार इसे शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
