भारत में बीते कुछ सालों से धीरे-धीरे सभी एंट्रेंस एग्जाम के तौर-तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहा है। सबसे बड़ा बदलाव है पेन-पेपर मोड का हटना और परीक्षाओं का सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में शिफ्ट होना। पहले जहां छात्र परीक्षा केंद्रों पर हाथ में पेन लेकर बैठते थे, अब वह कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर परीक्षा दे रहे हैं। चाहे JEE हो या NEET, CUET और बैंकिंग परीक्षाएं—ज्यादातर बड़े एंट्रेंस एग्जाम अब पूरी तरह ऑनलाइन यानी CBT मोड में शिफ्ट हो चुके हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों किया गया? क्यों सभी एंट्रेंस एग्जाम पेन-पेपर मोड से हटकर सीबीटी मोड में शिफ्ट हो रहे हैं। इसके बारे में न केवल छात्रों को बल्कि अभिभावकों और टीचरों को जानने की भी जरूरत है, ताकि बच्चों को पहले से इस तरह की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सकें।
क्या है CBT मोड
सीबीटी क्या है?
भारत में वर्तमान समय में होने वाली कई बड़ी परीक्षाएं सीबीटी मोड में आयोजित की जा रही है। सीबीटी की फुल फॉर्म कंप्यूटर बेस्ट टेस्ट (Computer Based Test) है। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें ओएमआर शीट (OMR Sheet) तरह भरना नहीं पड़ता, बस एक क्लिक में ऑप्शन का चुनाव करना होता है और नेक्स कर अगले प्रश्न पर जाना होता है।
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क्यों पेन-पेपर मोड से CBT पर शिफ्ट हुए एंट्रेंस एग्जाम
पेन और पेपर मोड एंट्रेंस टेस्ट का एक पारंपरिक तरीका रहा है, लेकिन बदलते दौर में कई कारणों को चलते इसे सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में शिफ्ट किया गया है। आइए आपको उन वजहों के बारे में विस्तार से बताएं -
परीक्षा का सुरक्षा
पेन-पेपर मोड में सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा की सुरक्षा होती थी। पेपर लीक होने, प्रश्नपत्रों के चोरी या परीक्षा केंद्रों पर नकल (बूथ कैप्चरिंग) की घटनाएं अक्सर सुनने को मिला करती थी। लेकिन एंट्रेंस एग्जाम से CBT मोड में शिफ्ट होने से इस पर काफी हद तक लगाम लग पाई है। इसमें प्रश्न पत्र डिजिटल रूप से लॉक होते हैं और परीक्षा शुरू होने के ठीक कुछ मिनट पहले ही स्क्रीन पर आते हैं। इससे पेपर लीक होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
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तेज और सटीक रिजल्ट
पारंपरिक परीक्षा प्रणाली यानी पेन-पेपर मोड में लाखों छात्रों की OMR शीट को इकट्ठा करना, उन्हें स्कैन करना और फिर रिजल्ट तैयार करने में महीनों का समय लग जाता था। इससे अलग CBT मोड में डेटा सीधे सर्वर पर सेव होता है और कंप्यूटर द्वारा ही कॉपियों की जांच तेजी से हो पाती है। इसमें इंसानी गलती की संभावना कम हो जाती है और रिजल्ट भी तेजी से जारी कर दिए जाते हैं।
समय का बचाव और सहुलियत
पेन-पेपर मोड में छात्र अपने उत्तर ओएमआर शीट के Bubbles को पेन से भर कर देते थे। इसमें काफी समय बर्बाद होता है, जिसमें आते हुए भी कई छात्रों का पेपर छूट जाता था। लेकिन सीबीटी मोड में छात्रों को बस एक सही ऑप्शन पर क्लिक करना है और अपना आंसर दर्ज करना है।
गलती को सुधारने का मौका
ओएमआर शीट में अगर सवाल के नंबर में कंफ्यूजन होने पर छात्र कई बार गलत प्रश्न के गोले को भर देते थे, जिसे एक बार भरने के बाद सही नहीं किया जा सकता है। लेकिन सीबीटी मोड में उन्हें गलती सुधारने का मौका मिलता है। गलत विकल्प पर क्लिक करने के बाद भी वह पीछे जाकर एडिट (Edit) के बटन पर क्लिक करके विकल्प बदल सकते हैं।
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लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण के अनुकूल
लाखों उम्मीदवारों के लिए पेपर और पेन मोड में परीक्षा आयोजित कराना एक बहुत बड़ा प्रशासनिक काम था। इसमें ढेरों टनों कागज की छपाई, उन्हें देश भर के सेंटर तक सुरक्षित पहुंचाना और फिर परीक्षा के बाद कॉपियों को वापस लाना शामिल था। CBT मोड ने इस भारी-भरकम लॉजिस्टिक्स के खर्च को कम कर दिया है। इसके अलावा, कागज का इस्तेमाल न होने से पर्यावरण का बचाव भी हो रहा है। इसलिए इस मोड को पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।
नकल का नो चांस
CBT मोड में रैंडमाइजेशन (Randomization) तकनीक का इस्तेमाल होता है। आसान भाषा में समझाए तो एक ही कमरे में बैठे सभी छात्रों की स्क्रीन पर आने वाले प्रश्नों का क्रम एक कभी नहीं होगा। सभी के प्रश्नों का क्रम अलग-अलग होता है। यानी जरूरी नहीं है कि पहला सवाल आपके और आपके साथ में बैठे दूसरे छात्र का एक ही है। यह अलग-अलग हो सकते हैं। इस स्थिति में आप परीक्षा हॉल में नकल नहीं कर पाएंगे। नकल को रोकने के लिए भी सीबीटी मोड में परीक्षा को शिफ्ट किया गया है।
