What is 888 Rule: कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करना किसी मैराथन दौड़ से कम नहीं है। चाहे UPSC हो, SSC, NEET या फिर JEE, इन परीक्षाओं का सिलेबस इतना बड़ा होता है कि अक्सर छात्र घबरा जाते हैं। इसके लिए पूरी लगन, टाइम मैनेजमेंट और खुद पर आत्मविश्वास होना जरूरी है, क्योंकि कॉम्पिटिटिव एग्जाम बच्चों का खेल नहीं है। ऐसे में हर एस्पिरेंट के मन में एक ही सवाल घूमता है कि आखिर दिन के 24 घंटों में से कितने घंटे पढ़ाई की जाए, ताकि सिलेक्शन हो जाए।
इस संबंध में हर किसी का कहना अलग-अलग है। कुछ लोग 14 से 16 घंटे की पढ़ाई को जरूरी बताते हैं, लेकिन प्रैक्टिकली बात करें तो हर दिन इतने घंटे पढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लगातार बिना ब्रेक के पढ़ने से मेंटल स्ट्रेस और बर्नआउट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कॉम्पिटिटिव एग्जाम की किस तरह से तैयारी करें कि पढ़ाई भी अच्छी हो और बर्नआउट भी न हो और स्लीप साइकिल से भी समझौता न करना पड़े। इसका सॉल्यूशन क्या है? तो इसका जवाब है 888 का नियम। जी हां, यह छात्रों के लिए एक ऐसा लाइफ हैक तो जीवन को बैलेंस रखते हुए आपको टॉपर बना सकता है। तो आइए आज जानते हैं 'क्या है 888 नियम'? और कैसे इसकी मदद से आप परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।
क्या है 888 का नियम?
888 का नियम पूरी तरह से टाइम मैनेजमेंट पर आधारित है। हमारे पूरे दिन में 24 घंटे होते हैं। इसे 3 बराबर हिस्सों में बांटे तो 8+8+8 = 24 घंटे होते हैं।
8 घंटे (नींद) + 8 घंटे (पढ़ाई) + 8 घंटे (अन्य गतिविधियां) = 24 घंटे
दिन के 24 घंटों का यह विभाजन आपके दिमाग को बिना थकाए हाइली एफिशिएंट (Highly efficient) बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। जब आप अपने दिन को इस तरह मैनेज करते हैं, तो आपकी एफिशिएंसी कई गुना बढ़ जाती है। बता दें कि यह लाइफस्टाइल बैलेंस करने का एक बेहतरीन तरीका है।
पहले 8 घंटे- 'नो-कॉम्प्रोमाइज गहरी नींद'
अक्सर देखा गया है कि छात्र परीक्षा के दबाव के चलते अपनी नींद से समझौता करने लगते हैं। वह देर रात तक जागते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं, जिससे उन्हें मुश्किल से 4-5 घंटे की नींद मिल पाती है। साइंटिफिकली बात करें तो यह आदत तैयारी को मजबूत बनाने की बजाए कमजोर करती है। इस नियम का पहला 8 कहता है कि रोजाना कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी जरूरी है। जब हम सोते हैं, तो हमारा दिमाग दिनभर पढ़ी गई जानकारियों को व्यवस्थित करता है और उन्हें शॉर्ट-टर्म मेमोरी से लॉन्ग-टर्म मेमोरी में भेजता है। पूरी नींद लेने से सुबह उठने पर दिमाग बिल्कुल फ्रेश रहता है और कठिन से कठिन टॉपिक भी आसानी से समझ में आ जाते हैं।
कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी के लिए वरदान है 888 का नियम
दूसरे 8 घंटे: पूरी फोकस के साथ 'डीप स्टडी'
इस नियम का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है— पढ़ाई के 8 घंटे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन 8 घंटों का मतलब सिर्फ किताब खोलकर बैठना नहीं है। यह समय छात्रों के लिए 'क्वालिटी स्टडी' का होना चाहिए, जिसमें आपका ध्यान पूरी तरह केंद्रित हो।
डिजिटल डिटॉक्स: जब आप इन 8 घंटों में पढ़ाई कर रहे हों, तो आपका स्मार्टफोन पूरी तरह साइलेंट या दूसरे कमरे में होना चाहिए। सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन आपका ध्यान भटका सकते हैं। इसलिए अपने फोन को बाय-बाय कहें और पढ़ाई पर फोकस करें।
पोमोडोरो तकनीक अपनाएं: लगातार 8 घंटे बैठना किसी के लिए भी मुश्किल होता है। इसलिए हर 50 मिनट की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का एक छोटा ब्रेक लें। इससे दिमाग की थकान मिटती है।
दिखावे की पढ़ाई से बचें: बिना मन के 14 घंटे टेबल पर बैठने का कोई फायदा नहीं है। इससे कई गुना बेहतर है कि आप पूरे होश और लगन के साथ केवल 8 घंटे पढ़ाई को दें।
तीसरे 8 घंटे: रूटीन कार्य, सेहत और मनोरंजन
अब 888 के नियम का तीसरा और आखिरी 8 इस नियम को हर किसी के लिए बेस्ट बनाता है, क्योंकि यह लाइफ को एक बैलेंस देता है। अक्सर देखा गया है कि परीक्षा की तैयारी के बीच छात्र अपने व्यक्तिगत लाइफ और हेल्थ को नजरअंदाज कर देते हैं और खुद को एक कमरे में बंद कर लेते हैं, जिससे डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं। यह नियम आपको बाकी बचे 8 घंटों को पूरी तरह से खुद को रिचार्ज करने के लिए देता है। इस 8 घंटे में आप अपने काम कर सकते हैं और खुद को फ्रेश रखने के लिए यह कार्य कर सकते हैं।
डेली रूटीन का काम: नहाना, खाना और अन्य जरूरी काम।
हेल्थ और फिटनेस: कम से कम 30 से 45 मिनट व्यायाम, योग या टहलने के लिए निकालें। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग निवास करता है।
मेंटल रिफ्रेशमेंट: थोड़ा समय म्यूजिक सुनने, पेंटिंग करें या परिवार और दोस्तों से बात करने में बिताएं। इससे आपको मानसिक तनाव पूरी तरह गायब हो जाएगा।
जब हमे पता है कि हमारे पास अपने अन्य कामों को करने के लिए 8 घंटे का भरपूर समय है तो ऐसे में 8 घंटे की पढ़ाई के दौरान डिस्ट्रैक्शन कम हो जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए क्यों वरदान है यह नियम?
लाइफस्टाइल बैलेंस करने वाला 888 का नियम प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके निम्नलिखित कारण है -
- कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी एक-दो दिन की नहीं बल्कि महीनों और सालों की प्रक्रिया है। यह नियम आपको एक ऐसा रूटीन देता है जिसे आप बिना बर्नआउट यानी थके लंबे समय तक फॉलो कर सकते हैं।
- जब आपकी नींद पूरी होगी और आप अपनी पसंद का काम भी कर पाएंगे, तो परीक्षा का डर या तनाव आप पर हावी नहीं हो सकेगा और एग्जाम की अच्छी तैयार कर पाएंगे, जो आपके प्रदर्शन और स्वभाव में भी नजर आएगा।
- यह नियम 'वर्क-लाइफ बैलेंस' के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि रिफ्रेश माइंड के साथ जब आप पढ़ने बैठते हैं, तो आपकी याद रखने की क्षमता मजबूत होती है।
जैन-जी छात्रों के लिए प्रो-टिप
जैन-जी जनरेशन के छात्र अक्सर अपनी पसंद के अनुसार काम करना चाहते हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि आप घड़ी देखकर सब कुछ करें। आप अपनी सुविधा के अनुसार इस नियम में थोड़ा बदलाव भी कर सकते हैं। मान लो किसी दिन आपका पढ़ाई का बहुत मन है, तो आप इसे 9 + 7 + 8 (9 घंटे पढ़ाई, 7 घंटे नींद, 8 घंटे अन्य काम) भी कर सकते हैं।
इस नियम से मिलेगी सफलता
कॉम्पिटेटिव एग्जाम में सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि आप कितने घंटे जाग रहे हैं और कितने घंटे पढ़ रहे हैं। अंधाधुंध पढ़ाई करने के बजाय योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें। आज ही से अपनी दिनचर्या में इस 888 के नियम को लागू करें, खुद को थोड़ा स्पेस दें, अनुशासित रहें और फिर देखिए कि कैसे आपकी तैयारी को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलती है।
