एजुकेशन

क्या है जेएनयू और तुगलकी फरमान का कनेक्शन, छात्र क्यों हो रहे नाराज

  • Edited by: नीलाक्ष सिंह
  • Updated Mar 2, 2023, 10:05 PM IST

जेएनयू एक बार फिर चर्चा में है, इस बार कॉलेज के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नाराजगी जाहिर की है, उनका मानना है कि वहां लागू हुए नए नियमों के चलते उनसे मौलिक अधिकार छीने जा रहे हैं।

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जेएनयू और तुगलकी फरमान

Photo : IANS

जेएनयू में पढ़ने वाले छात्र इन दिनों विश्वविद्यालय प्रशासन से नाराज हैं। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने एक बार फिर से जेएनयू के छात्रों के विरुद्ध तुगलकी फरमान जारी किया है। छात्रों के मुताबिक प्रशासन ने 'जेएनयू के छात्रों के अनुशासन और उचित आचरण के नियम' नाम कि एक नियम प्रणाली बनाई है, जिसमें उन्होंने ये बताया कि अब जेएनयू में छात्र कैसे रहेंगे। इस नए नियम में छात्रों के मौलिक अधिकार भी छीन लिए गए हैं।

धरना प्रदर्शन पर लगेगा 20000 का जुर्माना

नए नियमों के अंतर्गत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में धरना-प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर 20 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन, धरना प्रदर्शन करने वाले छात्रों का एडमिशन भी रद्द कर सकता है। इसके अलावा यदि कोई छात्र हिंसा से का दोषी पाया जाता है तो उस पर 30 हजार रुपए तक का जुमार्ना लगाया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसको लेकर बकायदा आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। यह दिशानिर्देश 'अनुशासन और आचरण के नियम' शीर्षक से जारी किए गए हैं।

छात्र संगठन एबीवीपी का कहना है कि वर्तमान प्रशासन के कार्यकाल में जेएनयू के हॉस्टल्स की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। छात्रों के सर पर होस्टल के छत का हिस्सा गिर जाता है। विज्ञान की पढ़ाई वाले स्कूल को पूरी तरीके से नजरंदाज किया जा रहा है। लैब्स की हालत चिंतनीय है। यही कारण है कि अपनी नाकामी को छुपाने के लिए जेएनयू प्रशासन हर महीने कुछ न कुछ ऐसा कदम उठा लेती हैं कि यहां के छात्रों और बाहर बैठे लोगों का ध्यान इन बातों पर केंद्रित न हों और वे उन्हीं चीजों में उलझे रहे।

तानाशाह द्वारा जारी किया फरमान

मामले की गंभीरता को समझते हुए एबीवीपी जेएनयू के अध्यक्ष उमेश चंद्र अजमीरा ने कहा कि पहली नजर में ही इस नए नियम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है की ये एक तानाशाह द्वारा जारी किया गया फरमान हो। छोटे-मोटे अपराधों के लिए भारी दंड, सजा और जुर्माना लगाया गया है। प्रदर्शन करने, किताब की फोटोकॉपी करने, सही मुद्दों को उठाने जैसी लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए भी जुर्माना और दंड लगाया गया है।

एबीवीपी जेएनयू के विकास पटेल ने कहा कि इस नई तुगलकी फरमान की कोई आवश्यकता नहीं है, इसके लिए पुराने नियम पर्याप्त रूप से प्रभावी है।

नीलाक्ष सिंह
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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