भारत में MBBS की पढ़ाई करना कई छात्रों का सपना होता है, लेकिन सीमित सीटें, ऊंची कट-ऑफ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण बहुत से छात्र अपने देश में इस सपने को पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसे छात्र उन देशों का रुख करते हैं, जहां एडमिशन का अवसर ज्यादा हो, फीस बजट में हो और करियर के दरवाजे भी तुरंत खुल जाएं। यही कारण है कि ज्यादातर छात्र रूस से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने की सोचते हैं। रूस में अपेक्षाकृत आसान प्रवेश प्रक्रिया देखने को मिलती है, दूसरा कम खर्च और तीसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव भी मिलता है, यही नहीं रूस में आधुनिक सुविधाएं और ग्लोबल एक्सपोजर भी मिलता है। लेकिन विदेश से MBBS करने से पहले पात्रता, मान्यता (NMC/WHO), फीस, भाषा, वीजा प्रक्रिया और वापस भारत में प्रैक्टिस करने की शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि एक भारतीय छात्र रूप से MBBS कैसे कर सकता है-पात्रता से लेकर आवेदन प्रक्रिया, खर्च, चुनौतियां और सावधानियां तक।
अगर छात्र आगे चलकर भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करना चाहता है, तो उसे शुरुआत से ही National Medical Commission (NMC) के नियमों को ध्यान में रखना होगा। NMC नियम के अनुसार, विदेश से एमबीबीएस करने के लिए भी NEET परीक्षा पास करना जरूरी है। जॉर्जिया, कजाकिस्तान जैसे देशों की कुछ विदेशी यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए NEET की जरूरत नहीं होती है और वे सिर्फ 12वीं कक्षा के मार्क्स (फिफिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी) के आधार पर एडमिशन देती हैं। ध्यान रखिए रूस की जिस यूनिवर्सिटी से MBBS करना चाहते हैं, वो NMC से मान्यताप्राप्त होनी चाहिए।
रूस से MBBS कैसे करें (Image - ChatGPT)
रूस से MBBS करने के लिए NEET देना जरूरी है?
भारत हो या रूस! अगर आप MBBS कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं तो आपको भारत में आयोजित होने वाली नीट यूजी परीक्षा को पास करना होगा। NTA के अनुसार NEET-UG भारत में undergraduate medical education के लिए common entrance examination है, और रूस के आधिकारिक Study in Russia पोर्टल पर भी भारतीय नागरिकों के मेडिकल प्रोग्राम के आवेदन में NEET Certificate को आवश्यक दस्तावेजों में शामिल किया गया है। इसलिए 12वीं के बाद रूस में मेडिकल पढ़ने की योजना बना रहे भारतीय छात्र को पहले NEET परीक्षा पास करने पर फोकस करना चाहिए।
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12वीं में किन विषयों की जरूरत होती है?
मेडिकल की पढ़ाई के लिए सामान्य तौर पर 12वीं स्तर पर भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान/जैव प्रौद्योगिकी और इंग्लिश जैसे विषय का अध्ययन जरूरी है। इसलिए केवल 12वीं पास होना पर्याप्त नहीं है। छात्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके विषय और शैक्षणिक योग्यता उस वर्ष विदेश में मेडिकल शिक्षा लेने के लिए लागू भारतीय नियमों के अनुरूप हों।
MBBS in Russia (Image - ChatgPT)
रूस में मेडिकल कोर्स कितने साल का होता है?
रूस में अलग-अलग विश्वविद्यालयों में मेडिकल प्रोग्राम का नाम और उसमें लगने वाला समय अलग अलग हो सकता है। भारतीय छात्र को केवल "MBBS" नाम देखकर विश्वविद्यालय नहीं चुनना चाहिए। कोर्स की अवधि और उसमें कवर होने वाले सब्जेक्ट्स को भी ध्यान रखना होगा। NMC के Foreign Medical Graduate Licentiate Regulations के अनुसार भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए विदेशी मेडिकल डिग्री वाले छात्र के कोर्स की अवधि कम से कम 54 महीने होनी चाहिए और इसके बाद उसी विदेशी मेडिकल संस्थान में कम से कम 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। डिग्री का माध्यम English होना भी आवश्यक शर्तों में शामिल है। इसलिए रूस में एडमिशन लेने से पहले यह जांचना जरूरी है कि संबंधित प्रोग्राम इन शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
रूस में मेडिकल यूनिवर्सिटी चुनते समय सबसे ज्यादा सावधानी क्यों जरूरी है?
NMC ने विदेशी मेडिकल संस्थानों को लेकर छात्रों को विशेष रूप से चेताया है कि ऐसे संस्थानों से बचें जिनका पाठ्यक्रम, क्लिनिकल ट्रेनिंग, कोर्स की अवधि या इंटर्नशिप भारतीय नियमों के अनुरूप नहीं है। NMC के हालिया advisory में स्पष्ट किया गया है कि इन आवश्यकताओं से विचलन होने पर भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए किसी एजेंट की बात पर भरोसा करके केवल कम फीस या आसान एडमिशन के आधार पर कॉलेज चुनना सही तरीका नहीं है।
रूस में एडमिशन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
रूस के आधिकारिक Study in Russia पोर्टल पर विदेशी छात्रों के लिए मेडिकल प्रोग्राम की आवेदन प्रक्रिया में पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज, शिक्षा प्रमाणपत्र और उनके रूसी भाषा में प्रमाणित अनुवाद जैसे दस्तावेज बताए गए हैं। भारतीय छात्रों के मेडिकल आवेदन में NEET Certificate भी मांगा जाता है। कुछ मामलों में मेडिकल, HIV/AIDS और वैक्सीनेशन से जुड़े दस्तावेज भी जरूरी हो सकते हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है। इसलिए जिस विश्वविद्यालय में आवेदन करना है, उसकी आधिकारिक Admission Requirements को अंतिम मानना चाहिए।
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रूस में एडमिशन कैसे लिया जा सकता है?
पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में कुछ चरणों में समझा जा सकता है।
- पहला चरण: NEET की पात्रता पूरी करें
- दूसरा चरण: विश्वविद्यालय की पूरी जांच करें जैसे: अवधि, भाषा, पाठ्यक्रम, क्लिनिकल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप, फीस और डिग्री की मान्यता
- तीसरा चरण: आवेदन करें
- चौथा चरण: दस्तावेज और फीस की प्रक्रिया पूरी करें
आवेदन स्वीकार होने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से admission/offer से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद फीस, यात्रा, वीजा और रूस पहुंचने से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
रूस से MBBS (Image - ChatGPt)
क्या रूस में पढ़ाई English में होती है?
भारतीय छात्रों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण सवाल है। NMC के FMGL Regulations के अनुसार भारत में स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए विदेशी मेडिकल डिग्री का medium of instruction English होना चाहिए। इसलिए अगर कोई विश्वविद्यालय English-medium medical program का दावा करता है, तो छात्र को admission से पहले यह जानकारी विश्वविद्यालय के आधिकारिक दस्तावेजों से जांच लेनी चाहिए।
रूस से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद भारत में क्या करना होगा?
विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने के बाद भारत में सीधे डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस शुरू नहीं की जा सकती। Foreign Medical Graduate को भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए NMC के लागू नियमों को पूरा करना होता है।
वर्तमान व्यवस्था में FMGE Screening Examination पास करना होगा। इसके अलावा NMC के FMGL FAQ के अनुसार विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को विदेश में कम से कम 12 महीने की internship उसी foreign medical institution में करनी होती है और भारत में भी निर्धारित Supervised Internship पूरी करनी होगी।
रूस से MBBS करना में कितना खर्च आएगा?
इसका कोई फिक्स आंकड़ा नहीं है, आप किस विश्वविद्यालय में एडमिशन लेंगे, किस शहर में रुकेंगे, किस कोर्स में नामांकित होंगे इत्यादि चीजों पर खर्च तय होता है। इसके अलावा ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस, खानपान, इंश्योरेंस, आने-जाने में लगने वाला खर्च, और visa जैसे खर्च भी फिक्स नहीं रहते हैं।
MBBS कोर्स पूरा करने के बाद क्या होता है?
MBBS की डिग्री पूरी करने के बाद, आमतौर पर एक जरूरी इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। इसके बाद वे कई विकल्पों में से एक चुन सकते हैं: जैसे जनरल फिजिशियन के तौर पर क्लिनिकल प्रैक्टिस शुरू करना, अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर के तौर पर काम करना, पोस्टग्रेजुएट स्पेशलाइजेशन (MD/MS) करना, या हेल्थकेयर मैनेजमेंट और पब्लिक हेल्थ जैसे नॉन-क्लिनिकल क्षेत्रों में करियर बनाना।
