एक समय था जब देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में सिविल इंजीनियरिंग को कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे ब्रांच की तुलना में कम पसंद किया जाने लगा था। लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। देशभर में सड़क, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और औद्योगिक गलियारों जैसी विशाल परियोजनाओं पर हो रहे रिकॉर्ड निवेश ने सिविल इंजीनियरिंग की डिमांड तेजी से बढ़ा दी है। इसका असर अब सीधे आईआईटी की प्रवेश रैंकिंग में भी नजर आने लगा है, जहां इस ब्रांच के लिए छात्रों का कंपटीशन पहले के मुकाबले अधिक बढ़ गई है।
बीते वर्ष आईआईटी बॉम्बे में सिविल इंजीनियरिंग की ओपनिंग रैंक 2666 थी, जो इस बार 385 पर आ गई है, वहीं आईआईटी दिल्ली में यह 3030 से घटकर 179 पर आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि देश में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होना। जबकि आईआईटी रुड़की में भी इस ब्रांच की रैंक 2,454 पायदान ऊपर चढ़ आ गई है। यह केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि छात्रों की बदलती सोच और देश में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के बढ़ते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास
बता दें देश में इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन माना जा रहा है। केंद्र सरकार देश में जहां 111 लाख करोड़ नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही है। वहीं इस सेक्टर को चमकाने के लिए अदाणी ग्रुप अगले पांच साल में करीब 100 बिलियन के बड़े पूंजी निवेश का ऐलान किया है। ऐसे में देशभर में एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड रेल, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नई मेट्रो परियोजनाएं, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और शहरी विकास कार्यक्रमों ने सिविल इंजीनियरों की डिमांड को काफी तेजी से बढ़ा दी है। यही कारण है कि इस ब्रांच की तरफ एक बार फिर छात्र तेजी से भाग रहे हैं।ऐसे में यहां आप जान सकते हैं कि सिविल इंजीनियरिंग की डिमांड अचानक क्यों बढ़ रही है? आईआईटी में सिविल इंजीनियरिंग की बेहतर होती रैंक क्या संकेत देती है? आने वाले 10 वर्षों में सिविल इंजीनियरों के लिए रोजगार और करियर के कौन-कौन से नए अवसर उभर सकते हैं? यहां आप जान सकते हैं।
Civil Engineering
सिविल इंजीनियरिंग की डिमांड अचानक क्यों बढ़ रही है?
हाल ही में 10 वर्षों से JEE Mains, Advanced की तैयारी व कक्षा 11वीं, 12वीं को ट्यूशन दे रहे विनय कुमार यादव (Btech In Electrical Engineering)ने बताया कि करीब एक दशक के बाद सिविल इंजीनियरिंग की डिमांड में वृद्धि देखने को मिली है। कंप्यूटर साइंस और आईटी के समय-समय पर सिविल इंजीनियरिंग क्षेत्र की चमक फीकी पड़ी थी। अचानक हुई इस वृद्धि के कई प्रमुख कारण हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि भारत में विशाल अवसंरचना परियोजनाएं यानी सरकार द्वारा चलाई जा रही कई बड़ी परियोजनाएं जैसे स्मार्ट सिटी, सागरमाला, नई रेल लाइनें, रेलवे का आधुनिकीकरण इसका प्रमुख कारण है। साथ ही पिछले दशक में आईटी और कंप्यूटर की लोकप्रियता बढ़ी, जिसके कारण सिविल इंजीनियर्स की संख्या में गिरावट आई। जिनसे कुशल सिविल इंजीनियर्स की मांग को बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग पारंपरिक तरीकों से निकल चुकी है। इसमें Building Information Modelling (BIM) और GIS, और AI जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं। यही कारण है कि छात्र लगातार इसकी तरफ तेजी से भाग रहे हैं।
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अगले 10 वर्षों में सिविल इंजीनिय के लिए कौन से नए करियर अवसर
अगले 10 वर्षों में सिविल इंजीनियरों के लिए कौन से नए करियर अवसर उभरेंगे?
इस सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में यह क्षेत्र पारंपरिक निर्माण से हटकर उन्नत तकनीक और सतत विकास की ओर अग्रसर होगा। तीव्र शहरीकरण और सरकारी पहल उद्योगों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिलेगी। इस क्षेत्र में प्रवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए आधुनिक software (AutoCAD, Revit, STAAD, P3D) और सतत विकास पद्धतियों में कौशल विकास अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य आवश्यकता है।
साथ ही उन्होंने कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा और इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि सिविल इंजीनियरिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।
