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वंदे मातरम के रचयिता, डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत, जानें कौन थे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

बंकिमचंद्र न केवल एक उपन्यासकार थे बल्कि वह एक महान कवि, गद्यकार और पत्रकार भी थे, जिन्होंने अपने शब्दों से देशभक्ति की लौ जलाई और लोगों के दिलों में आजादी का सपना भर दिया।

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Bankim Chandra Chatterjee Biography: वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की कहानी
Authored by: Aditya Singh
Updated Apr 10, 2026, 16:34 IST
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पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को मुख्य मुद्दा बनाया है, जिसमें वंदे मातरम के रचयिता के योगदान को रेखांकित किया जा रहा है। भारत को आजादी दिलाने के लिए एक ओर जहां भारत माता के वीर सपूत अपने पराक्रम से अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा रहे थे और देशभक्ति की भावना में हंसते हंसते अपने प्राणों की आहुति दे रहे थे तो वहीं, दूसरी ओर भारत माता का एक वीर सपूत अपनी कलम की ताकत से पूरे मुल्क को एक कर रहा था, जिनका नाम है बंकिम चंद्र चटर्जी। वे न केवल एक उपन्यासकार थे बल्कि वह एक महान कवि, गद्यकार और पत्रकार भी थे, जिन्होंने अपने शब्दों से देशभक्ति की लौ जलाई और लोगों के दिलों में आजादी का सपना (Bankim Chandra Chatterjee Biography) भर दिया। उनका लिखा गीत वंदे मातरम आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों की खिलाफत करने का प्रतीक बन गया था।

उन्होंने अपने लेखन से बांग्ला समाज के साथ ही पूरे देश के प्रभावित किया। आपको शायद ही पता होगा कि बंकिम बाबू कलकत्ता विश्वविद्यालय से पहले ग्रेजुएट में से एक थे और डिप्टी कलेक्टर के पद पर भी कार्यरत थे। हमारे इस लेख में आप बंकिम चंद्र चट्टोपाध्यान के बारे में विस्तार से जान सकते हैं।

Bankim Chandra Chatterjee Biography In Hindi: डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर रह चुके हैं

बांग्ला भाषा के शीर्ष साहित्यकारों में गिने जाने वाले बंकिम बाबू का जन्म 26 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के नैहाटी में हुआ। उनके पिता सरकारी नौकरी में थे, जो बाद में मेदनिपुर में उप कलेक्टर के पद पर भी कार्यरत रहे। बंकिमचंद्र स्कूल के दिनों से ही पढ़ने में बहुत तेज थे। कहा जाता है कि महज 14 वर्ष की आयु में पहली बार उन्होंने संवाद प्रभाकर नाम की एक बंगाली पत्रिका में लिखना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने 1857 में बीए पास किया था।

इस दौरान प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए की डिग्री लेने वाले वह पहले भारतीय थे। इसके बाद 1869 में उन्होंने कानून की डिग्री भी हासिल की। लॉ की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उनकी नियुक्ति डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर हो गई थी। उन्होंने तत्कालीन बंग्ला सरकार में सचिव के पद पर भी कार्य किया। 1891 में वह सरकारी सेवा से रिटायर्ड हुए।

Bankim Chandra Chatterjee Biography

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साहित्य के क्षेत्र में कई बड़े कार्तिमान

बंकिम बाबू ने अपने युवावस्था से ही नौकरी के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्तिमान बनाए। बंगाल के शीर्ष साहित्यकार होने के बावजूद बहुत कम लोगों को पता होगा कि उनकी पहली प्रकाशित कृति अंग्रेजी में थी, जिसका नाम Rajmohans Wife था। इसके बाद उन्होंने करीब 15 किताबें लिखी। वहीं आनंदमठ से पहले बंकिम बाबू की पहली बांग्ला कृति दुर्गेशनंदनी थी। इसका प्रकाशन 1865 में हुआ था।

इस उपन्यास ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ा दिया था। इसके बाद 1866 में उन्होंने अपने अगले उपन्यास कपाल कुण्डला की रचना की, जो काफी मशहूर हुई। अप्रैल 1872 में उन्होंने बंगदर्शन नाम की पत्रिका निकालनी शुरू की थी। इसमें उन्होंने गंभीर सामाजिक, सांस्कृतिक मुद्दे उठाए थे। रामकृष्ण परमहंस के करीबी रहे बंकिमचंद्र ने 1882 में आनंदमठ की रचना की। यह उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास था, जिससे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् गीत लिया गया है।

Bankim Chandra Chatterjee Biography

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वंदे मातरम पहली बार कब और कहां गाया गया था

बता दें वंदे मातरम गीत पहली बार 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। यहां वह गीत किसी और ने नहीं बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। इसके बाद तो यह गीत आजादी की लड़ाई का नारा बन गया। साल 1905 में बंगाल विभाजन आंदोलन के समय यह गीत पूरे भारत में गूंजने लगा। वहीं आजादी के बाद इस 24 जनवरी 1950 को इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।

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