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इंजीनियरिंग छात्रों के लिए बड़ी खबर: AICTE ने देश भर के 58 कॉलेज और 950 कोर्सेज किए बंद, जानें क्या होगा असर

हाल ही में AICTE ने देश के विभिन्न राज्यों में 58 कॉलेज र 950 से अधिक कोर्सेज को बंद करने का फैसला लिया है। इसके पीछे कई मुख्य वजह रही हैं। लेकिन सवाल उन छात्रों का है, जो पहले से यहां पढ़ रहे हैं। उन पर संस्थान बंद करने का क्या असर होगा।

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AICTE ने देश भर के 58 कॉलेज और 950 कोर्सेज किए बंद (Photo - AI)

अगर आप इस साल इंजीनियरिंग या किसी तकनीकी कोर्स में एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने देश भर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके साथ ही अलग-अलग संस्थानों में चल रहे 950 से ज्यादा टेक्निकल कोर्सेज पर भी ताला लगा दिया गया है। लेकिन इसकी वजह क्या है आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

आखिर क्यों बंद करने पड़े इतने सारे कॉलेज और कोर्सेज?

AICTE के अनुसार, इन संस्थानों को बंद करने के पीछे कई मुख्य वजहें रही हैं। सबसे बड़ा कारण यह था कि कई कॉलेजों में काफी समय से छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही थी, जिससे सीटें खाली रह रही थी। इसके अलावा, कई संस्थानों में नियमों के मुताबिक योग्य टीचर नहीं थे और वे जरूरी बुनियादी सुविधाएं व तय मानकों को पूरा करने में असमर्थ साबित हो रहे थे। परिषद द्वारा कई बार इन संस्थानों को चेतावनी और सुधार का मौका दिया गया। लेकिन बावजूद इसके जब हालातों मे कोई बदलाव नहीं देखा गया तो इन्हें बंद करने का कड़ा कदम उठाया गया।

किस राज्य में बंद हुए सबसे अधिक इंजीनियरिंग संस्थान

यदि राज्यों के आंकड़ों को देखें, तो सबसे ज्यादा गाज उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर गिरी, जहां सबसे ज्यादा 12-12 कॉलेज बंद किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 8, तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में 3-3 कॉलेज बंद हुए हैं. वहीं गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 2-2, जबकि हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में 1-1 कॉलेज को बंद करने का फैसला लिया गया।

पहले से पढ़ रहे छात्रों पर क्या होगा असर

इस खबर के सामने आने के बाद उन छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता नजर आ रही है, जो इस संस्थान में पहले से पढ़ रहे थे। अब उनका क्या होगा। बता दें कि उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। AICTE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में पढ़ाई कर रहे छात्रों को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी पढ़ाई पहले की तरह ही सुचारू रूप से जारी रहेगी और समय पर उन्हें उनकी डिग्री भी दी जाएगी।

प्रोग्रेसिव क्लोजर के तहत लिया गया कॉलेज बंद करने का फैसला

बता दें कि यह पूरा फैसला 'प्रोग्रेसिव क्लोजर' (Progressive Closure) नीति के तहत लिया गया है.। इस प्रक्रिया में कॉलेज को अचानक बंद नहीं किया जाता, बल्कि वहां केवल नए छात्रों के दाखिले पर तुरंत रोक लगा दी जाती है। जो छात्र वहां पहले से पढ़ रहे हैं, उन्हें संस्थान में अपनी पूरी पढ़ाई मुकम्मल करने का पूरा अवसर मिलता है। उसके बाद संस्थान पर ताला लगाया जाता है।

नए सत्र में एडमिशन से पहले बरतें ये सावधानियां

अगर आप इस शैक्षणिक सत्र में किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं, तो काउंसलिंग या एप्लीकेशन फॉर्म भरने से पहले थोड़ी सावधानी जरूरी है। छात्रों के लिए सबसे पहले यह जांच लेना जरूरी है कि जिस कॉलेज या यूनिवर्सिटी में वह एडमिशन के लिए आवेदन कर रहे हैं वह AICTE से मान्यता प्राप्त है या नहीं। इसके साथ ही संबंधित कॉलेज की वेबसाइट या AICTE के पोर्टल पर जाकर यह भी देख लें कि वह संस्थान ब्लैकलिस्टेड या क्लोजर की सूची में तो शामिल नहीं है। एडमिशन से पहले की गई यह छोटी सी जांच आपको भविष्य के लिए लाभकारी होगी, क्योंकि इससे आप एक बड़ी परेशानी और करियर के नुकसान से बच पाएंगे।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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