Delhi: कोरोना से उबरे मरीजों में जानलेवा बीमारी मिकोरमिकोसिस का खतरा, सर गंगाराम अस्पताल में मिले कई मरीज 

गंगाराम अस्पताल के ईएंडटी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर मनीष मुंजाल का कहना है कि यह बीमारी काफी जानलेवा है। यह नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करती है। इसके वायरस कोशिकाओं पर तेजी से हमला बोलते हैं।

Fatal desease Mucormycosis reaches National Capital Delhi
कोरोना से उबरे मरीजों में जानलेवा बीमारी मिकोरमिकोसिस का खतरा। 

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के संकट से जूझ रही दिल्ली के ऊपर एक और जानलेवा बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, कोरोना महामारी से उबर चुके ज्यादातर मरीज घातक फंगल बीमारी मिकोरमिकोसिस की चपेट में आए हैं। राजधानी के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले दिनों इस बीमारी से ग्रसित 10 मरीज मिले हैं जिनमें से पांच मरीजों की जान चली गई। यह बीमारी काफी घातक है, कई मरीजों को अपनी आंख की रोशनी से हाथ धोना पड़ा है जबकि कुछ में नाक एवं जबड़े की हड्डी को निकालना पड़ा। 

नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है संक्रमण
गंगाराम अस्पताल के ईएंडटी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर मनीष मुंजाल का कहना है कि यह बीमारी काफी जानलेवा है। इसका संक्रमण नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और इसके वायरस कोशिकाओं पर तेजी से हमला बोलते हैं। संक्रमण दिमाग में पहुंच जाने के बाद इसका इलाज कर पाना बेहद मुश्किल हो जाता है और मरीज को जान से हाथ धोना पड़ता है। डॉ. मुंजाल का कहना है कि दरअसल, कोरोना के इलाज के दौरान मरीज को एस्टरायड दिया गया होता है और जब वह ठीक होकर घर आता है तो उसे अपने शरीर को पहले की तरह मजबूत करना होता है। इस दौरान लापरवाही की वजह से वह मिकोरमिकोसिस जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ जाता है। 

कोरोना से ठीक हो चुके मरीज आ रहे इसकी चपेट में
डॉक्टर का कहना है कि मिकोरमिकोसिस बीमारी आम तौर पर उन लोगों में पाई जाती है जो आईसीयू या गंभीर बीमारियों का लंबे समय तक इलाज कराते हैं लेकिन अब कोरोना से ठीक हो चुके लोग इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं जो कि चिंता का एक बड़ा कारण है। डॉ. मुंजाल का कहना है कि कोरोना का इलाज करने वाले डॉक्टर मरीज को दिए जाने वाले एस्टरायड को लेकर अगर सावाधानी बरतें तो इस बीमारी के इंफेक्शन पर रोक लगाई जा सकती है। 

हेल्दी लाइफस्टाइल है बचाव
इस बीमारी से ग्रसित होने पर व्यक्ति के नाक में इंफेक्शन होता है। नाक में सूखापन और आंखों में लालीपन आ जाती है। जबड़े कमजोर पड़ने से दांत टूटने लगते हैं। इसके बाद मरीजो को तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है। बुजुर्ग, डायबिटीज के मरीज और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इस फंगल इंफेक्शन के शिकार ज्यादा बन सकते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है। डॉक्टर का कहना है कि एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर, हाथ धोकर और आस-पास की जगहों को सैनिटाइज कर इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है।

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