Delhi Crime: रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर पांच करोड़ की ठगी, रेल मंत्रालय के अंदर सौंपा नियुक्ति पत्र

Delhi Crime: रेलवे में अच्‍छे पदों पर नौकरी दिलवाने के नाम पर पांच करोड़ रुपये ठगी का मामला सामने आया है। दिल्‍ली के रहने वाले दो आरोपियों ने तमिलनाडु के रहने वाले एक कारोबारी के साथ यह ठगी की। आरोपियों ने इसके बदले में पीड़ित को रेल मंत्रायल के अंदर बुलाकर नियुक्ति पत्र भी सौंपे थे, जो बाद में फर्जी निकले।

Fraud in Railway Jobs
रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर पांच करोड़ की ठगी
  • रेलवे में जान पहचान का हवाला देकर कारोबारी से हुई ठगी
  • आरोपियों ने रेल मंत्रालय के अंदर सौंपे नियुक्ति पत्र, निकले फर्जी

Delhi Crime: रेलवे में नौकरी दिलावने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगी का मामला सामने आया है। तमिलनाडु के रहने वाले एक कारोबारी ने दिल्‍ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि, दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने रेलवे में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उससे पांच करोड़ रुपये की ठगी की है। पीड़ित कारोबारी ने बताया कि, उसने यह पैसे अपने उन जानकारों से लिए थे, जो नौकरी करना चाहते थे। उनसे यह रकम एकत्रित कर आरोपित महिला को दी थी। बदले में आरोपित महिला और उसके एक अन्य साथी ने कारोबारी को रेल भवन बुलाकर सभी के लिए नियुक्ति पत्र भी सौंपा था, लेकिन बाद में वे फर्जी निकले।

ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित कारोबारी ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शिकायत के आधार पर विकासपुरी निवासी आरोपित एस उमा और पश्चिमी दिल्ली निवासी भास्कर पोनल्ला के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

रेल मंत्रालय बुलाकर सौंपे थे नियुक्ति पत्र

पुलिस में दी शिकायत में चेन्नई निवासी कारोबारी एस रविचंद्रन ने बताया कि, आरोपी महिला एस उमा से उसकी पुरानी जान पहचान है। आरोपित ने वर्ष 2018 में फोन पर बातचीत के दौरान उससे कहा कि रेलवे में उच्‍च पदों पर बैठे उसके कई ऐसे जानकार हैं जो आसानी से नौकरी लगवा देंगे। ऐसे में पीड़ित कारोबारी ने नौकरी लगवाने के लिए अपने चार जानकारों से बात की। नौकरी लगवाने की यह पूरी डील पांच करोड़ की डील तय हुई। इस पैसे के बदले इन लोगों को रेलवे के अंदर अच्‍छे पदों पर नौकरी मिलती। कारोबारी ने अपनी शिकायत में बताया कि, डील फाइनल होने के बाद उसने एक करोड़ 69 लाख रुपये भास्कर और 98 लाख रुपये उमा के बैंक खाते में जमा कराए। बाकी की रकम उसने इन आरोपियों को नकद में दी। जिसके बाद इन आरोपितों ने उसे रेल मंत्रालय बुलाकर वहां पर रेलवे की मुहर लगे नियुक्ति पत्र भी सौंपे। बाद में रेल मंत्रालय से पता चला कि उक्त नियुक्ति पत्र फर्जी है, जिसके बाद से आरोपित भी अपने फोन बंद कर फरार हो गए।

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