76 लापता बच्चों का लगाया पता, महिला कांस्टेबल को मिला आउट ऑफ टर्न प्रमोशन

2 महीने में 76 लापता बच्चों का पता लगाने वाली दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल सीमा ढाका को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (OTP) मिला है। ये पाने वाली वो दिल्ली की पहली पुलिस अधिकारी बन गई हैं।

Seema Dhaka
सीमा ढाका 

नई दिल्ली: 76 लापता बच्चों को ट्रेस करने और 60 दिनों में उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए हेड कांस्टेबल सीमा ढाका आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (OTP) पाने वाली दिल्ली की पहली पुलिस अधिकारी बन गई हैं। इनमें से 56 बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की एक किसान की बेटी ढाका ने कहा कि वह हमेशा पुलिस फोर्स में शामिल होने की आकांक्षा रखती थी और 2006 में दिल्ली पुलिस में शामिल होने पर उसने अपना सपना पूरा किया।

'न्यूज 18' की खबर के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मैं अपने काम के लिए मिले इनाम और मान्यता से खुश और संतुष्ट हूं। ऐसे ओटीपी हमें और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।' ढाका ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने करियर में इतनी जल्दी असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर बन जाएंगी।

ढाका ने बाहरी जिले और रोहिणी सहित राष्ट्रीय राजधानी में कई जिलों में सेवा की है। जब 2014 में उन्हें हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नत किया गया था, तब वह दक्षिण पूर्वी दिल्ली में तैनात थीं। 2017 में उन्हें बाहरी उत्तरी दिल्ली जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। 

पुलिस कमिश्नर ने की थी घोषणा

पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने लापता बच्चों को तलाशने के काम में तेजी लाने के लिए पुलिसवालों को प्रोत्साहित करने के मकसद से इसी साल अगस्त में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन स्कीम का ऐलान किया था। इसी के बाद प्रेरित होकर ढाका ने अधिक केस लिए। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने सीनियर्स से अनुरोध किया कि वे मुझे गुमशुदा बच्चों का पता लगाने की अनुमति दें। मैंने उन्हें यह आश्वासन भी दिया कि जिन मामलों पर मैं पहले से काम कर रही हूं, वे प्रभावित नहीं होंगे या उनकी जांच में देरी नहीं होगी। उनके वरिष्ठों ने उन पर भरोसा किया।'

सालों से लापता थे बच्चे

ढाका ने तब लापता बच्चों का पता लगाने के लिए दो महीने का लक्ष्य रखा। उनके अधिकांश मामलों में ऐसे बच्चे शामिल थे जो अपने परिवारों से अलग हो गए थे और कुछ साल पहले गायब हो गए थे। उन्होंने इनपुट इकट्ठा करना शुरू किया और इन मामलों को हल कर दिया। ढाका ने कहा कि पुलिस के अलावा स्थानीय लोगों ने भी बच्चों का पता लगाने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने में मदद की। जब लोगों को पता चला कि मैं क्या करने की कोशिश कर रही हूं, तो उन्होंने अधिक इनपुट देना शुरू कर दिया।

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