उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे (Former IPS Rajesh Pandey) ने Times Now नवभारत के विशेष पॉडकास्ट Power Corridor में प्रदेश के क्राइम इतिहास, अपने सेवाकाल के चुनौतीपूर्ण अनुभवों और पुलिसिंग की आधुनिक बारीकियों पर खुलकर बात की है। उनके द्वारा साझा किए गए संस्मरण न केवल 90 के दशक के दुर्दांत अपराध दौर की परतें खोलते हैं, बल्कि पुलिस महकमे के मानवीय पहलू और वर्तमान दौर की चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित करते हैं।
कुख्यात डॉन श्री प्रकाश शुक्ला और 'तकनीकी जुगाड़'
टाइम्स नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमा सोलंकी से बात करते हुए पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में खौफ का दूसरा पर्याय बन चुके गैंगेस्टर श्री प्रकाश शुक्ला पर कई खुलासे किए। राजेश पांडे ने बताया कि श्री प्रकाश शुक्ला ने महज 5 साल के अपने आपराधिक करियर में पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था की नींद उड़ा दी थी। उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी तक ले ली थी, जो उस समय के प्रशासन और पुलिस के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी। उन्होंने कहा, " उसने दुस्साहसिक काम करने शुरू किए। एक से एक दुस्साहसिक घटनाएं की। उसमें कोई कमी नहीं। उसकी कुल क्राइम की उम्र ही 5 साल रही। लेकिन इतने छोटे से स्पैन में उसने हिला के रख दिया। मतलब किसी की हिम्मत कैसे पड़ सकती है कि कोई मुख्यमंत्री को मारने के लिए सार्वजनिक रूप से कह दे।"
तस्वीर का रहस्य और 'सुनील शेट्टी' जुगाड़
उस दौर में पुलिस के पास श्री प्रकाश शुक्ला की कोई भी हालिया तस्वीर उपलब्ध नहीं थी। उसे पहचानने के लिए राजेश पांडे और उनकी टीम ने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने शुक्ला के एक रिश्तेदार से मिली धुंधली फोटो और अभिनेता सुनील शेट्टी की तस्वीर का मिलान करते हुए एक स्केच और पहचान तंत्र विकसित किया, जिससे उसकी पहचान संभव हो सकी। एक सूचना आई कि भाई उसका एक बहनोई है वो उसके यहां आता है। वैसे ही किसी ने बता दी कि परसों आया था उसके यहां, तो हम लोगों ने कहा चलो पता तो लगे उसकी शक्ल सूरत है क्या, किसी से बनवाया जाए। कैसा दिखता है। उसके यहां पहुंच गए और उससे पूछा कि भाई परसों आया तो उसने कहा नहीं आए थे। मैं भी था उस पूछताछ में, सब लोग थे तो, उसके बाद उसके यहां दो बच्चियां थी छोटी-छोटी। उससे जब पूछा श्री प्रकाश शुक्ला कि आया था क्या? तो उसने कहा अंकल आए थे, मामा हैं हमारे लेकिन अभी नहीं आए थे। फला तारीख को मेरा बर्थडे था, उसमें आए थे। तो बोले अच्छा तो बताओ बेटा उनकी फोटो है। बोले हां अंकल फोटो भी है। अपनी बुक में से वह चार फोटो निकाल के ले आई। तो बस खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हम लोग वो लेके वहां से भागे। इतने में बच्चियों के मां-बाप आ गए, वो रोने लगे कि उसको पता चल जाएगा कि हमारे यहां की फोटो है तो श्री प्रकाश शुक्ल मार देगा। तो अरुण कुमार साहब ने कहा कि राजेश कुछ ऐसा करो ना कि ये फोटो से वो आइडेंटिफाई ना कर पाए। क्योंकि कल को अगर यह मारे जाएंगे तो फिर यह हल्ला भी होगा और लोग कहेंगे भी कि इतनी इनसेंसिटिव है पुलिस। इसके बाद मैं एक दुकान पर गया वहां से मिलान करके सुनील शेट्टी की फोटो ली, वहां से बंटी भाई की दुकान पर गए, इससे पहले थाने जाकर श्री प्रकाश शुक्ला का सिर फोटो में से काटकर, सुनील शेट्टी की जगह लगा दिया। बंटी भाई को दिया और कहा कि इसे मैच करके फोटो निकाल दो। यही फोटो प्रेस में बांटी गई और मरते दम तक श्री प्रकाश शुक्ला ये पता नहीं लगा पाया कि ये फोटो आई कहां से।
पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का पूरा पॉडकास्ट यहां देखिए
वर्दी के पीछे की मानवीय संवेदनाएं
अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले अधिकारियों के जीवन में कई ऐसे मामले भी आते हैं, जो उनके दिल पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। इस बातचीत के दौरान राजेश पांडे ने एक अत्यंत संवेदनशील केस का जिक्र किया, जिसमें दो मूक-बधिर बहनों की हत्या कर दी गई थी। राजेश पांडे ने स्वीकार किया कि इस केस को न सुलझा पाना आज भी उनके मन में एक टीस की तरह बना हुआ है। हजरतगंज थाने के पास रहने वाली बेसहारा लड़की 'राजकुमारी' का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह पुलिसकर्मियों का सामान संभालकर रखती थी। बेहद गरीबी और बेसहारा होने के बावजूद उसने जिस गरिमा के साथ जीवन जिया, वह पुलिस के प्रति उसके विश्वास और मानवीय संबंधों की एक अनोखी मिसाल है।
आधुनिक दौर की पुलिसिंग और Gen Z से संवाद
उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तरीके और चुनौतियां दोनों बदल चुके हैं। जंतर-मंतर जैसी जगहों पर होने वाले उग्र प्रदर्शनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी खुद घायल होने के बावजूद असाधारण धैर्य और संयम का परिचय देते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) के संवाद करने के तरीके, सोशल मीडिया के प्रभाव और उनकी सोच को समझना पुरानी पीढ़ी के अधिकारियों के लिए एक नई और महत्वपूर्ण चुनौती है।