राजस्थान (Rajasthan) का कुख्यात डकैत जगन गुर्जर (Dacoit Jagan Gurjar) की जेल में हत्या कर दी गई है। कभी चंबल से अपना राज चलाने वाला डकैत जगन गुर्जर को उसके साथी कैदी ने ही तौलिये से गला घोंट कर मार दिया है। जगर गुर्जर की मौत के बाद से उसके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं, अस्पताल को घेर कर धरने पड़ बैठ गए हैं। आइए जानते हैं कौन था डकैत जगन गुर्जर, जिसपर कभी लाखों का पुलिस ने इनाम रखा था?
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कौन था डकैत जगन गुर्जर?
चंबल के बीहड़ों में करीब ढाई से तीन दशकों तक आतंक का पर्याय रहे डकैत जगन गुर्जर की कहानी केवल अपराध की नहीं, बल्कि चंबल के डांग क्षेत्र की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों और पुलिस के साथ लुका-छिपी के लंबे दौर की दास्तान है। जगन गुर्जर मूल रूप से राजस्थान के धौलपुर जिले के बाड़ी विधानसभा क्षेत्र के भेंशइया गांव का रहने वाला था। गुर्जर बाहुल्य इस इलाके में 1990 के दशक में जमीनी विवादों और स्थानीय रंजिशों के चलते उसने बंदूक उठाई थी। 1994-95 तक उसने अपने भाइयों (खासकर लाल सिंह गुर्जर) और कुछ वफादार साथियों के साथ मिलकर चंबल के बीहड़ों (डांग क्षेत्र) में अपनी खुद की गैंग खड़ी कर ली। चंबल के बीहड़ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं को जोड़ते हैं। जगन इसका पूरा फायदा उठाता था; राजस्थान में अपराध कर वह एमपी या यूपी के जंगलों में छिप जाता था।
100 से ज्यादा केस
चंबल के पुराने डकैतों की तरह जगन गुर्जर का मुख्य पेशा अपारण और रंगदारी था। वह धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर (राजस्थान) और मुरैना, भिंड (मध्य प्रदेश) के अमीर व्यापारियों, ठेकेदारों और रसूखदार लोगों का अपहरण कर बीहड़ ले जाता था और लाखों की फिरौती वसूलता था। इसके अलावा, चंबल इलाके में चलने वाली सरकारी परियोजनाओं, चंबल बजरी खनन और सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों से वह 'डांग टैक्स' (गुंडा टैक्स) वसूलता था। टैक्स न देने पर वह सीधे हत्या कर देता था। उसके खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मर्डर, डकैती, लूटपाट, जबरन वसूली, अपहरण और आर्म्स एक्ट के तहत 100 से भी ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
वसुंधरा के पैलेस को उड़ाने की धमकी
साल 2008 में जगन गुर्जर का नाम राजस्थान से निकलकर देश के राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आया। उस समय राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन चरम पर था। जगन गुर्जर ने आंदोलन के समर्थन में आते हुए राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सीधे चुनौती दे दी। उसने धमकी दी कि वह सीएम वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित पैतृक महल ('राज निवास पैलेस') को बम से उड़ा देगा। इस एक धमकी ने राजस्थान पुलिस और सरकार को हिलाकर रख दिया, जिसके बाद उसके खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ।
सचिन पायलट के सामने सरेंडर
जगन गुर्जर पुलिस से बचने के लिए 'सरेंडर' को एक रणनीति की तरह इस्तेमाल करता था। जब भी पुलिस का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता, वह बड़े नेताओं के सामने सरेंडर कर देता ताकि पुलिस उसका एनकाउंटर न कर सके। सुंधरा राजे को धमकी देने के बाद जब पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरा, तो उसने जनवरी 2009 में तत्कालीन सांसद और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने भारी जनसमूह के बीच अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। जेल से छूटने के बाद उसने फिर गैंग बनाई। साल 2018 में उसने भरतपुर रेंज की तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने सरेंडर किया। साल 2022 में उसने बाड़ी के तत्कालीन विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने उसे गुजरात से गिरफ्तार किया था।
धरने पर बैठे जगन गुर्जर के समर्थक (फोटो- @Gopal_Bassi)
कैसे मरा डकैत जगन गुर्जर?
राजस्थान के अजमेर में उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की एक अन्य कैदी ने सोमवार को मामूली विवाद में गला घोंट कर हत्या कर दी। अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल ने ’पीटीआई’ को बताया कि जांच में सामने आया कि जेल के अंदर मामूली बात को लेकर हुए झगड़ा में विष्णु नाम के कैदी ने जगन की हत्या कर दी। आरोपी विष्णु और जगन के साथ उसी बैरक में रह रहा था। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान विष्णु ने स्वीकार किया कि उसने तौलिये से गला घोंटकर जगन की हत्या की। अधिकारी ने बताया कि विष्णु पिछले तीन साल से इस जेल में बंद है जबकि जगन को इसी वर्ष मार्च में ही इस जेल में स्थानांतरित किया गया था।
विपक्ष ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या को लेकर विपक्षी नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए इस घटना के लिए राज्य सरकार और जेल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अजमेर जेल के भीतर हुई यह हत्या अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है और इससे जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उच्च सुरक्षा वाली जेल भी बंदियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, तो सुरक्षा व्यवस्था कहां है? राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि इस घटना ने जेल प्रशासन और राज्य की कानून-व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
