भारतीय टीम में ज्यादा मौके नहीं मिलने से खफा थे चंद्रकांत पंडित, लेकिन कोचिंग ने बदल दी जिंदगी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 27, 2022, 11:19 AM IST

भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना हर क्रिकेटर का सपना होता है। मध्य प्रदेश को अपनी कोचिंग में पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब दिलाने वाले पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज चंद्रकांत पंडित ने 1986 में अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। लेकिन उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा और वह भारत के लिए सिर्फ पांच टेस्ट मैच ही खेल सके। उन्हें हमेशा इस बात का अफसोस रहा कि टेस्ट क्रिकेट में उनहें ज्यादा मौके नहीं मिले।

भारतीय टीम में ज्यादा मौके नहीं मिलने से खफा थे चंद्रकांत पंडित, लेकिन कोचिंग ने बदल दी जिंदगी
Photo Credit: Twitter

भारत के घरेलू क्रिकेट में यदि सबसे सफल कोचों की बात की जाए तो पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज चंद्रकांत पंडित का नाम सबसे ऊपर आएगा। उनकी कोचिंग में मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम ने रविवार को इतिहास रचा और पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीता। लेकिन चंद्रकांत पंडित के लिए पहला प्यार कोचिंग नहीं था बल्कि देश के लिए लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट खेलना था। 

1986 में पहली बार मिला था मौका

महाराष्ट्र के रहने वाले चंद्रकांत पंडित का जन्म 30 सितंबर 1961 में हुआ था। वह अपने समय के सबसे बेहतरीन युवा विकेटकीपर बल्लेबाज माने जाते थे। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें 1986 में इंग्लैंड जाने वाली भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया। चंद्रकांत पंडित के लिए यह दिन सबसे यादगार था। उन्होंने पहली पारी में 23 और दूसरी पारी में 17 रन बनाए। कपिल देव की कप्तानी वाली इस भारतीय टीम ने इंग्लैंड को शिकस्त दी और इस तरह से चंद्रकांत पंडित का आगाज बेहद ही शानदार हुआ। लेकिन दुर्भाग्य से सिर्फ चंद्रकांत पंडित पांच टेस्ट मैच ही खेल सके और उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिल सके। इससे चंद्रकांत पंडित निराश तो हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 

और 23 साल पहले मिली दर्द देने वाली हार

चंद्रकांत पंडित ने मध्य प्रदेश के लिए भी काफी समय तक घरेलू क्रिकेट खेला और वह कप्तान भी रहे। 23 साल पहले उनकी कप्तानी में मध्य प्रदेश की टीम रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची थी। लेकिन खिताबी मुकाबले में मध्य प्रदेश की टीम को कर्नाटक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह हार चंद्रकांत पंडित के लिए बेहद दर्द देने वाली साबित हुई थी क्योंकि वह इतिहास रचने से चूक गए थे। 

कोचिंग ने दिलाई बड़ी पहचान

बतौर खिलाड़ी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद चंद्रकांत पंडित ने कोचिंग में हाथ आजमाया। वह अपनी कोचिंग में अभी तक कुल 6 रणजी खिताब जीत चुके हैं। उनकी कोचिंग में मुंबई की टीम ने लगातार दो बार 2002-03 और 2003-04 में खिताब जीता। इसके बाद वह फिर मुंबई के कोच बने और 2015-16 में टीम को फिर चैंपियन बनाया। मुंबई के बाद चंद्रकांत पंडित ने विदर्भ की कोचिंग संभाली और इस टीम को भी लगातार दो बार 2017-18 तथा 2018-19 में रणजी ट्रॉफी का खिताब दिलाया। दो साल पहले उन्होंने मध्य प्रदेश की कोचिंग संभाली और उसे भी चैंपियन बना दिया। 

End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!