210 टन वजन...33 फीट ऊंचाई; बिहार में विराजे महादेव; स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Jan 17, 2026, 05:41 PM IST
बिहार के पूर्वी चंपारण में स्थापित किया गया विशाल शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 टन वजन का है, जिसे पहले तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया और कई राज्य होकर बिहार लाया गया।
पूर्वी चंपारण में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग
पूर्वी चंपारण : विराट रामायण मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक धार्मिक पर्व का आयोजन हुआ, जिसमें दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना (प्राण प्रतिष्ठा) बड़े विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुई। भारी भरकम शिवलिंग को उठाने के लिए दो बड़े-बड़े क्रेन मंगवाए गए थे। जिनकी मदद से शिवलिंग को स्थापित कर दिया गया। यहां पूजा-पाठ का कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए। उनके साथ ही उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी पहुंचे। शिवलिंग की स्थापना के लिए 700 टन और 500 टन क्षमता वाली दो बड़ी क्रेन पहुंची थीं। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति और तीर्थयात्रियों के उमड़ते जनसैलाब के बीच शिवलिंग की स्थापना की गई।
यह विशाल शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 टन वजन का है, जिसे पहले तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया और कई राज्य होकर बिहार लाया गया। इसके ट्रांसपोर्ट के लिए विशेष 96-पहियों वाले वाहन का उपयोग किया गया था ताकि भारी वजन सुरक्षित रूप से स्थल तक पहुंच सके।
मंदिर में विशाल शिवलिंग की स्थापना के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रार्थना करने के लिए पहुंचे थे। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित इस 33 फीट ऊंचे शिवलिंग का वजन 210 मीट्रिक टन है। इसे विशेष रूप से तैयार किए गए 96 पहियों वाले ‘ट्रेलर’ पर कल्याणपुर लाया गया। इसे मोतिहारी पहुंचने में 45 दिन लगे। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद (बीएसआरटीसी) के सदस्य सायन कुणाल और उनकी पत्नी एवं समस्तीपुर की सांसद संभवी चौधरी ने शिवलिंग की स्थापना के दौरान एक यज्ञ में हिस्सा लिया।
कुणाल ने बताया, "यह शिवलिंग एक ही चट्टान से बना है, इसीलिए इसे विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। उन्होंने कहा, "इस शिवलिंग में 1008 छोटे शिवलिंग समाहित हैं। इसकी पूजा करने से भक्तों को 1008 शिवलिंगों की पूजा करने के बराबर आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। कुणाल ने यह भी बताया कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण 2030 तक पूरा हो जाएगा।
पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट की टीम पूरी परियोजना की निगरानी कर रही है। मंदिर की आधारशिला 20 जून, 2023 को बीएसआरटीसी के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय आचार्य किशोर कुणाल ने रखी थी।
किशोर कुणाल के पुत्र सायन कुणाल ने बताया कि मुख्य मंदिर की ऊंचाई 270 फीट होगी जबकि मंदिर परिसर में 18 मीनारें और विभिन्न देवी-देवताओं के लिए 22 मंदिर होंगे। इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री ने पश्चिम चंपारण जिले में कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और समृद्धि यात्रा के दौरान महिला आईटीआई और उत्कृष्टता केंद्र का निरीक्षण किया।
स्थापना के कार्यक्रम में विभिन्न विद्वानों, पुजारियों और स्थानीय प्रशासन के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में मौजूद थे और शिवभक्तों ने मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन के साथ इस ऐतिहासिक पल को देखा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने विश्वास, संस्कृति तथा धार्मिक समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे तथा कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए पुलिस एवं स्वयंसेवक तैनात रहे। स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पानी, चिकित्सा सहायता तथा दिशा-निर्देश भी जारी किए।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जताया हर्ष
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक वीडियो संदेश जारी कर बिहार के चंपारण के केसरिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर तक विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग के पहुंचने पर हर्ष और गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने इसे न केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, बल्कि भारत की आध्यात्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक संकल्प की शक्ति का अद्भुत प्रतीक भी करार दिया। पूर्व राष्ट्रपति ने बिहार की जनता को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य की आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ करेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने 'धन्यवाद' और 'जय हिंद' कहा।
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