Mirzapur News: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सड़क धंसने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गुणवत्ता पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मीरजापुर-वाराणसी राजमार्ग (NH-7) स्थित खजुरी नदी आमघाट रेलवे क्रासिंग पर 64 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना ओवरब्रिज पहली मानसूनी बारिश भी नहीं झेल पाया। निर्माण के महज 4 महीने के भीतर ही इस रेलवे ओवरब्रिज का एप्रोच मार्ग मिट्टी भसकने से धंस गया, जिससे किनारे की रक्षा दीवार हवा में लटक गई है। आनन-फानन में ओवरब्रिज पर आवाजाही रोक दी गई है।
पहली बारिश नहीं झेल पाया ब्रिज
4 महीने पहले ही हुआ था उद्घाटन
मीरजापुर-वाराणसी राजमार्ग पर इस ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 2024 में शुरू हुआ था। राज्य सेतु निगम और रेलवे की कार्यदायी संस्था के टेंडर पर ठेकेदार द्वारा तैयार किया गया यह 900 मीटर लंबा ओवरब्रिज जनवरी 2026 में बनकर पूरा हुआ था। फरवरी 2026 में इसका उद्घाटन किया गया था। पुल के दोनों ओर 150-150 मीटर के एप्रोच मार्ग के निर्माण पर करीब 80 लाख रुपये खर्च किए गए थे। सड़क धंसने और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सेतु निगम के अधिकारियों ने आनन-फानन में मौके पर पहुंचकर कटे हुए हिस्से पर बालू की बोरियां रखवाकर किनारे को सुरक्षित कराया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने अपनाया कड़ा रुख
पड़री थाना क्षेत्र के आमघाट में हुए इस हादसे के बाद मीरजापुर की सांसद एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। केंद्रीय मंत्री के सहायक निजी सचिव अवध नरेश सिंह ने 6 अगस्त 2026 को मीरजापुर के जिलाधिकारी (DM) को एक आधिकारिक पत्र भेजकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। पत्र में लिखा गया है कि ओवरब्रिज निर्माण कार्य की गुणवत्ता की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, धांधली या घटिया सामग्री के प्रयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। केंद्रीय मंत्री ने जिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण में की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है।
