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UP Assembly Election 2027: कांग्रेस की हसरत 150 सीटों की! पिछला प्रदर्शन गठबंधन में धकेल रहा पीछे

UP Assembly Election 2027: विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस 140-150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। जबकि समाजवादी पार्टी की तरफ से कांग्रेस को कम सीटें दिए जाने के संकेत हैं। जानिए समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन, सीट बंटवारे और कांग्रेस के पिछले चुनावी प्रदर्शन का पूरा गणित।

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ऐसे में सपा से कैसे अपने लिए ज्यादा सीटें मांगे कांग्रेस?
Authored by: दिगपाल सिंह
Updated Oct 21, 2026, 16:07 IST
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Election 2027) का बिगुल भले ही अभी नहीं बजा है, लेकिन सभी दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों में गठबंधन को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं है। हालांकि, यह तो माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों के बीच चुनाव साथ लड़ने को लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति है। निचले स्तर पर बयानबाजी भी जारी रहती है। इस बीच माना जा रहा है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 में से 140-150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। जबकि समाजवादी पार्टी स्वयं लगभग साढ़े तीन सौ सीटों पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 53-55 सीटें देने की तैयारी में है।

चुनावी प्रदर्शन के आधार पर सीट बंटवारे का फॉर्मूला

Congress SP Alliance के लिए सीट बंटवारे का फैसला पूर्व के चुनावी प्रदर्शन को बनाया जा सकता है। बता दें कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की कुल 80 में से 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस दौरान कांग्रेस के प्रदर्शन का असर कुल 30 विधानसभा क्षेत्रों पर रहा। कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में जहां से चुनाव लड़ा था, वहां विधानसभा वार उसके प्रदर्शन के आधार पर सपा उसे 53-55 सीटें देने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

गठबंधन पर सपा-कांग्रेस में चर्चा हुई?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अराधना मिश्रा मोना का कहना है कि गठबंधन को लेकर अभी सीटों के आंकड़ों पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उनका कहना है कि कांग्रेस संगठन और नेतृत्व ने तैयारियों की समीक्षा की है। नेतृत्व ने सभी को अपने-अपने स्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन पर बातचीत अभी शुरुआती दौर में ही है। आगे स्थिति और स्पष्ट होगी। इसके साथ ही अराधना ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी की बड़ी भूमिका को लेकर भी बात कही। उन्होंने कहा, 'यूपी से जुड़े किसी भी फैसले में प्रियंका गांधी से सलाह ली जाती है। प्रियंका गांधी को संगठन में यूपी की जिम्मेदारी संभालने का लंबा अनुभव है।'

उधर सपा सांसद राजीव कुमार राय का कहना है कि मांगने को जितना चाहे मांग लें, उनको मांगने पर कौन रोक सकता है? दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता बैठेंगे, सवाल सीट का नहीं, सवाल जीत का है। कुल मिलाकर विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस पूरी तरह से समाजवादी पार्टी पर निर्भर नजर आ रही है। हालांकि, कांग्रेस दबाव बनाकर अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करना चाह रही है, लेकिन सपा की तरफ से पिछले रिकॉर्ड पर तवज्जो दिया जा रहा है। ऐसी बात है तो कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड हम भी जान लेते हैं।

कांग्रेस का UP में पिछले चार लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन

कांग्रेस का UP में पिछले चार लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन

1989 से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता गया

नीचे दिए गए आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे कि आखिरी बार साल 1985 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। आज का उत्तराखंड भी तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और राज्य में कुल 425 विधानसभा सीटें थीं, जिनमें से कांग्रेस की झोली में 269 सीटें आई थीं। इसके अगले ही विधानसभा चुनाव यानी साल 1989 में कांग्रेस ने 410 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और सिर्फ 94 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद कांग्रेस का ग्राफ उत्तर प्रदेश में लगातार गिरता चला गया। 1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 413 सीटों पर चुनाव लड़ा और कुल 46 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद साल 1993 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने इस बार 421 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जिनमें से सिर्फ 28 प्रत्याशी ही जीत दर्ज कर पाए। साल 1996 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 126 प्रत्याशियों को टिकट दिया, लेकिन 33 उम्मीदवार ही जीत का स्वाद चख पाए।

विधानसभा चुनावचुनाव लड़ासीटें जीतीं
20223992
20171147
201235528
200739322
200240225
199612633
199342128
199141346
198941094
1985425269

2 सीटों में सिमट गई कांग्रेस

साल 2000 में उत्तर प्रदेश का बंटवारा हुआ और उत्तराखंड अलग राज्य बन गया। इस बंटवारे के बाद यूपी में विधानसभा की 403 सीटें रह गईं। साल 2002 में विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस ने इस बार 402 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन सिर्फ 25 ही जीत दर्ज कर पाए। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 393 उम्मीदवारों को टिकट दिया और 22 प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल रहे। फिर 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 355 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे और 28 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे। फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 114 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई, लेकिन सिर्फ 7 ही जीत दर्ज कर पाए। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 399 प्रत्याशी खड़े किए, जिनमें से सिर्फ 2 ही जीत हासिल कर पाए।

समाजवादी पार्टी का ग्राफ लगातार चढ़ता गया

जबकि इसी दौरान 1993 के विधानसभा चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी ने कदम रखा और 256 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर 109 सीटें हासिल कीं। 1996 के चुनाव में सपा को 110 सीटों पर जीत मिली। 2002 में 143 और 2007 में सपा को 97 सीटें मिलीं। 2012 के चुनाव में सपा 224 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी और अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि 2017 में भाजपा ने 312 और 2022 में 255 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की। पिछले दो चुनावों के प्रदर्शन को नजरअंदाज किया जाए तो जिन वर्षों में कांग्रेस का ग्राफ लगातार नीचे की ओर गया है, उसी दौरान समाजवादी पार्टी ने अपना वर्चस्व बढ़ाया है।

कुल मिलाकर पिछले लगभग चार दशकों में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता चला गया है। जबकि इसी दौरान समाजवादी पार्टी का ग्राफ चढ़ा है और वह कई बार सत्ता सुख भोग चुकी है। पिछले प्रदर्शन को देखते हुए कांग्रेस अगर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहती है तो स्पष्ट है कि वह सीटों को लेकर मोल-भाव की स्थिति में नहीं है।

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