छुक-छुक के दौर से धड़धड़ तक, ये है भारत की सबसे बूढ़ी ट्रेन; 160 साल से दे रही सेवा

भारतीय ट्रेनों में सफर करना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव होता है। अंग्रेजों में जमाने में चली भाप वाली ट्रेनें आज के आधुनिक दौर में वंदे भारत और बुलेट ट्रेन तक पहुंच गई हैं। आज भी देश में एक ऐसी ट्रेन चलती है, जिसे अंग्रेजों ने चलाया था। यह ट्रेन 160 साल बाद भी अपनी सेवाएं दे रही है।

छुक-छुक से लेकर ट्रैक पर तेजी से धड़धड़ाती ट्रेन तक भारतीय रेलवे ने एक लंबा सफर तय किया है। भारतीय रेलवे इतने बड़े देश को एक सूत्र में पिरोती है। इतने बड़े देश में कहीं भी जाने के लिए ट्रेन सबसे सस्ता, तेज और आरामदायक माध्यम है। वैसे भारत में ट्रेन का सफर सिर्फ साधारण सफर मात्र नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक एक्सपीरियंस होता है। यह समय, संस्कृति और यहां की विविध ज्योग्राफी की यात्रा है। आज देश में वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें चल रही हैं और बुलेट ट्रेन का काम भी तेजी से चल रहा है। क्या आप जानते हैं देश की सबसे बूढ़ी ट्रेन कौन सी है, जो 160 साल से बिना थके यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रही है। चलिए जानते हैं -

netaji Express

160 साल से चल रही है ये सबसे बूढ़ी ट्रेन

ये बात तो आपको पता ही होगी कि भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे लंबे रेलवे सिस्टमों में से एक है। भारतीय ट्रेनें पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक अलग-अलग जलवायु वाले क्षेत्रों को आपस में जोड़ती हैं। भारतीय रेलवे ने 100 साल से ज्यादा समय में देश के ट्रैवेल मैप को बदलकर रख दिया है। यह दूरियों को घटाकर लोगों को पास लाती है। भारतीय रेलवे सिस्टम में आज भी कई ऐसी ट्रेनें हैं, जो आपको इतिहास में ले जाती हैं। इतिहास का हिस्सा रही ये ट्रेनें अपने सफर में आपको अपने ऐतिहासिक सफर की याद दिलाते हुए आपको निरुत्तर कर देती हैं। ऐसी ही एक ट्रेन है हावड़ा-कालका मेल।

End of Feed