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SOMALI JET क्या है और यह भारत में मानसूनी वर्षा को कैसे प्रभावित कर रहा है?

Somali Jet क्या है? यह भारत में मानसूनी बारिश पर कैसे असर डालता है? अगर आप भी इसी प्रश्न का जवाब ढूंढ़ रहे हैं तो आप सही जगह आए हैं। यहां जानिए इसकी ताकत और दिशा भारतीय मानसून की बारिश को कैसे प्रभावित करती है।

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सोमाली जेट क्या है?
Authored by: Digpal Singh
Updated Jul 31, 2026, 18:06 IST
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भारत में बारिश और मानसून एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पूरे सालभर में होने वाली बारिश का लगभग 75 फीसद बारिश मानसून के चार महीनों में ही होती है। लेकिन मानसून की बारिश सिर्फ बादलों, कम दबाव के क्षेत्रों और समुद्र की गर्मी पर निर्भर नहीं करती। इसके पीछे वायुमंडल में चलने वाली कई शक्तिशाली हवाओं की भी बड़ी भूमिका होती है। उन्हीं शक्तिशाली व महत्वपूर्ण हवाओं में से एक सोमाली जेट (Somali Jet) भी हैं। यह अरब सागर के ऊपर सतह के काफी करीब बहने वाली तेज हवाओं की एक पट्टी है, जो हिंद महासागर से नमी लेकर भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचाती हैं। मौसम विज्ञानी इन हवाओं को Low-Level Jet (LLJ) या Findlater Jet भी कहते हैं।

यह तो आप जानते ही हैं कि भारत में मानसून दो शाखाओं के रूप में आता है। इसकी एक शाखा बंगाल की खाड़ी होते हुए देश में आती है, जबकि दूसरी शाखा अरब सागर से सीधे देश के पश्चिमी हिस्से में बारिश करती है। भारत में मानसून के दौरान सोमाली जेट की ताकत और दिशा का असर खासतौर पर अरब सागर की मानसूनी शाखा, पश्चिमी तट और प्रायद्वीपीय भारत में होने वाली बारिश पर पड़ता है। मौसम विश्लेषणों में भी सोमाली जेट को अरब सागर से नमी खींचकर मानसून को सक्रिय रखने वाले प्रमुख सिस्टमों में शामिल किया गया है।

क्या है Somali Jet?

सोमाली जेट नाम सुनने पर भले ही किसी विमान जैसा लगता हो, लेकिन यह विमान या बादलों का सिस्टम नहीं, बल्कि तेज गति से बहने वाली वायुमंडलीय हवा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक सोमाली जेट सिर्फ 1 से 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहने वाला लो-लेवल क्रॉस-इक्वेटोरियल एयरफ्लो (निचले स्तर पर भूमध्य रेखा को पार करके बहने वाली हवा) है। इसकी शुरुआत दक्षिणी गोलार्ध में मॉरीशस और उत्तरी मेडागास्कर के आसपास होता है। यह पूर्वी अफ्रीका और सोमालिया के तट से गुजरते हुए अरब सागर में प्रवेश करता है और जून में भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचता है। जुलाई में इसकी ताकत आम तौर पर सबसे ज्यादा होती है।

वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके मुख्य प्रवाह का केंद्र भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर करीब 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर पाया गया है। गर्मियों में इसकी मौसमी औसत अधिकतम रफ्तार लगभग 18 मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकती है।

भारत में बारिश कैसे बढ़ाता है Somali Jet?

अगर इसे आसान भाषा में समझें तो सोमाली जेट हिंद महासागर और अरब सागर से नमी लेकर भारत की मुख्य भूमि तक पहुंचाने वाली तेज हवाओं की एक ‘नदी’ जैसी है। दक्षिणी हिंद महासागर में उच्च दबाव और एशियाई भूभाग के गर्म होने से पैदा होने वाले दबाव का अंतर भूमध्यरेखा के पार हवाओं के प्रवाह को और मजबूत कर देता है। यह हवा सोमालिया के पास से गुजरते हुए अरब सागर के ऊपर आती है और वहां से भारी मात्रा में नमी लेकर भारत की मुख्य भूमि की ओर बढ़ती है।

भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने के बाद यह नम हवा पश्चिमी घाट से टकराती है, ऊपर उठती है और संघनन (Condensation) के कारण भारी बारिश होती है। इसी सोमाली जेट के चलते, मुंबई, कोकण आदि पश्चिमी तटीय महाराष्ट्र और गोवा में भारी बारिश देखने को मिलती है। IMD के अनुसार अरब सागर के ऊपर मानसूनी प्रवाह और पश्चिमी घाट मिलकर पश्चिमी तट तथा प्रायद्वीपीय भारत में भारी बारिश का कारण बनते हैं।

Somali Jet के कमजोर होने से क्या होता है?

सोमाली जेट के कमजोर होने का सीधा असर तो यही होता है कि इसका असर भारत में बारिश की तीव्रता पर पड़ता है। सोमाली जेट मानसून का एक बहुत ही अहम अंग है, लेकिन यह भी सच है कि पूरे भारत की बारिश किसी एक सिस्टम से तय नहीं होती। अध्ययनों में पाया गया है कि ज्यादा बारिश वाले वर्षों में सोमाली जेट अरब सागर के ऊपर ज्यादा मजबूत और मानसून के आगे के हिस्से में अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है। इससे भारत की ओर नमी और ज्यादा बढ़ती है। जबकि कमजोर मानसून वाले वर्षों में इसका पैटर्न उलट सकता है।

भारत में मौसम संबंधी ताजा सैटेलाइट तस्वीर (फोटो - imd)

भारत में मौसम संबंधी ताजा सैटेलाइट तस्वीर (फोटो - imd)

अगर आपको लग रहा है कि Somali Jet के मजबूत होने का मतलब हमेशा पूरे भारत में ज्यादा बारिश होना होता है। और Somali Jet के कमजोर होने से पूरे देश में सूखे की स्थिति पैदा होती है, तो आप गलत हैं। ये निष्कर्ष निकालना सही नहीं है, क्योंकि मानसून पर अलनीनो, Indian Ocean Dipole (पूर्वी और पश्चिमी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर के तापमान में अंतर), MJO (पूर्व की ओर बढ़ते बादलों का विक्षोभ), मानसून ट्रफ, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव क्षेत्र जैसे कई कारकों का मिलाजुला प्रभाव पड़ता है।

खेती और आम लोगों के लिए क्यों अहम है?

भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है। ऐसे में अरब सागर से नमी का प्रवाह कमजोर या मजबूत होने पर पश्चिमी तट, मध्य भारत और दूसरे क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता और वितरण प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि मौसम वैज्ञानिक Somali Jet की रफ्तार, स्थिति और नमी ढोने की क्षमता पर लगातार नजर रखते हैं। साल 2026 के मानसून में भी इसके मजबूत होने को पश्चिमी तट पर मानसून की सक्रियता से जोड़ा गया है।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि Somali Jet भारतीय मानसून का एक अदृश्य किंतु बहुत ही महत्वपूर्ण इंजन है। सोमाली जेट खुद बारिश तो नहीं कराता, लेकिन समुद्र से नमी को भारत तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका अदा करता है।

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