Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में संजौली मस्जिद को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से कानूनी और सामाजिक तनाव का कारण बनी इस मस्जिद के अवैध हिस्सों को तोड़ने की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मस्जिद की ऊपरी मंजिलों को गिराया जा रहा है। सरकारी बजट मिलने के बाद शिमला नगर निगम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। पहले चरण में दो मंजिलें हटाई जा चुकी थीं और अब तीसरी मंजिल को तोड़ा जा रहा है। यह मस्जिद कुल पांच मंजिल की संरचना थी, जिस पर अवैध निर्माण को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
हाईकोर्ट का साफ निर्देश
इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तीन दिसंबर को अहम आदेश पारित किया था। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा था कि मस्जिद की निचली दो मंजिलों को फिलहाल यथावत रखा जाए, जबकि ऊपर की तीन मंजिलों को अवैध मानते हुए हटाया जाए। अदालत ने शिमला नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया था कि ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया कानून के तहत पूरी की जाए।
समिति की मांग और प्रशासन पर दबाव
हाईकोर्ट के आदेश के बाद देव भूमि संघर्ष समिति ने नगर निगम पर कार्रवाई तेज करने का दबाव बनाया। समिति के सदस्यों ने निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए अवैध मंजिलों को जल्द गिराने की मांग की थी। समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अदालत के फैसले का पालन सुनिश्चित कराना है।
अबतक मामले में क्या-क्या हुआ
संजौली मस्जिद विवाद की जटिलता इसकी लंबी न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होती है। पिछले दस वर्षों में यह मामला नगर निगम कोर्ट, सत्र न्यायालय और अब हाईकोर्ट तक कई चरणों में पहुंच चुका है। अगस्त 2024 में स्थानीय दुकानदार पर हुए हमले के बाद इसका विवाद फिर भड़का और हिंदू संगठनों ने मस्जिद को अवैध बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। अक्टूबर 2024 में नगर निगम आयुक्त की अदालत ने मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलों को अवैध घोषित कर दो महीने में गिराने का आदेश दे दिया दिया। इसके बाद मई 2025 में पूरी इमारत को अवैध करार देते हुए ध्वस्तीकरण का निर्देश दिया गया, जिसे वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत और फिर हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस दौरान कई बार प्रदर्शन, नमाज के समय हंगामा और शांति-भंग की आशंकाएं भी सामने आईं।
30 दिसंबर तक का अल्टीमेटम
इससे पहले हिमाचल प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड और मस्जिद समिति ने निगम अदालत के आदेशों को जिला अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। जिला अदालत ने निगम के फैसले को सही ठहराते हुए 30 दिसंबर तक अवैध ढांचे को हटाने की समय-सीमा तय कर दी थी। इसके बाद वक्फ बोर्ड ने मामला हाईकोर्ट में पहुंचाया, जहां अगली सुनवाई नौ मार्च को तय है। फिलहाल संजौली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न खड़ी हो। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेशों के अनुरूप की जा रही है।
