Bihar News: बिहार में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर शहरी विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। बीते दिनों नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि राज्य में 11 नई सैटेलाइट सिटी विकसित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य प्रमुख शहरी केंद्रों पर बढ़ते बोझ को कम करना है। इन नई सिटी में हरित पार्क, मनोरंजन जोन और बेहतर सुरक्षा जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
बड़े शहरों का बोझ कम करने के लिए विकसित किए जाएंगे 11 सैटेलाइट शहर (फाइल फोटो | Nitin Nabin Facebook)
सोनपुर में बनेगा ‘ग्रेटर पटना’
नौ संभागीय मुख्यालयों में सैटेलाइट सिटी विकसित करने के साथ-साथ दो अतिरिक्त शहरों, सोनपुर और सीतामढ़ी में भी विकास योजनाएं शुरू की जा रही हैं। मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि सोनपुर को ग्रेटर पटना की तर्ज पर एक आधुनिक ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि राजधानी पटना का विस्तार सुव्यवस्थित तरीके से किया जा सके। दूसरी ओर, सीतामढ़ी के पास बस रहे ‘सीतापुरम’ को पौराणिक शहर पुनौराधाम और वहां निर्माणाधीन भव्य मंदिर को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के साथ विकसित किया जा रहा है।
तेजी से बढ़ती आबादी के बीच ग्रीनफील्ड शहरों की जरूरत
विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बिहार की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए आधुनिक और सुव्यवस्थित टाउनशिप की आवश्यकता बढ़ गई है। नई बनने वाली सैटेलाइट और ग्रीनफील्ड सिटी में चौड़ी सड़कें, पार्क, खेल मैदान, कम्युनिटी सेंटर, औद्योगिक निवेश की संभावनाएं और आधुनिक आवासीय सुविधाएं मौजूद होंगी। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार 11 बड़े शहरों में नई टाउनशिप के साथ-साथ 43 शहरों के मास्टर प्लान पर भी तेजी से काम कर रही है।
बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2025 को मंजूरी
शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने ‘बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2025’ को मंजूरी दे दी है। इसे बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम 2012 की धारा 81 और 83 के तहत लागू किया गया है। इस नियमावली के जरिए नए ग्रीनफील्ड और सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने में सुविधा होगी और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास हो सकेगा।
कैसे विकसित होगी नई टाउनशिप?
स्कीम के तहत भूमि मालिक अपनी जमीन का योगदान देंगे। इसमें भूमि का पुनर्गठन किया जाएगा, यानी कुछ हिस्से को सड़क, पार्क, सार्वजनिक उपयोगिताओं और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए आरक्षित किया जाएगा। इसके बदले जमीन के मालिकों को उसी क्षेत्र में विकसित प्लॉट वापस दिए जाएंगे, जिनमें सड़क, पानी और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। पूरी वित्तीय जिम्मेदारी ‘Eligible Developer’ की होगी। इससे सरकार को भूमि अधिग्रहण पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।
नियमावली के फायदे
- नई नियमावली से अविकसित क्षेत्रों में भी योजनाबद्ध और आधुनिक शहर बसाए जा सकेंगे। भूमि मालिकों को उनके प्लॉट का बेहतर उपयोग मिल सकेगा और FAR बढ़ने से आवास और व्यवसायिक निर्माण की क्षमता भी बढ़ेगी।
- इसके साथ ही स्वच्छ, ग्रीन और सस्टेनेबल वातावरण सुनिश्चित होगा। पारदर्शी भूमि पुनर्वितरण प्रक्रिया के कारण किसी भी व्यक्ति के भूमि-विहीन होने की आशंका नहीं रहेगी।
- नई टाउनशिप बनने से मौजूदा शहरों पर दबाव कम होगा, ट्रैफिक की समस्या घटेगी और औद्योगिक निवेश के नए अवसर खुलेंगे। इससे आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
