'पंचायत का परपंच' : गांवों की तस्वीर बदलने वाली और सबसे छोटी सरकार बनाने का सबसे बड़ा 'ग्राम पंचायत चुनाव 2026' (UP Panchayat Chunav 2026) का मंच सजाने की कवायतें शुरू हो चुकी हैं। गांव-चौपालों से लेकर लखनऊ में बैठी बड़ी वाली सरकार तक चर्चाओं का दौर तेज है। पंचायत चुनाव यानी प्रधानी के चुनाव की आहट से पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा है। संभावित दावेदार अपने समीकरण से लेकर विकास के तमाम दावे और हर मुद्दे को कैसे भुनाया जाए? इसके लिए रणनीति पुख्ता कर रहे हैं। चूंकि गांव के इस छोटे चुनाव की बड़ी जंग में हर वोट बेहद अहम है, एक-एक वोटर्स महज संख्या नहीं, बल्कि साख को बचाने की संजीवनी है!
इधर, तमाम वादाखिलाफी का दंश झेल चुके मतदाता मूलभूत सुविधाओं खड़ंजा, नाली, पानी, साफ-सफाई और विकास को लेकर नया खाका खींच रहे हैं। वो भी अपने नए प्रतिनिधि की तलाश में हैं, जो सिर्फ वादे नहीं, बल्कि जमीन पर विकास की बुनियाद को पक्की करे। क्योंकि हर चुनाव में गांव वालों ने बदलाव का बड़ा सपना देखा, लेकिन पांच साल बाद तस्वीर वही पुरानी नजर आई...अब चौपालों पर सिर्फ चुनावी चर्चा नहीं, बल्कि उस भरोसे की बात दोहराई जा रही, जो हर बार वोट डालने के बाद टूट जाता है।
वर्तमान की स्थिति यह है कि जहां कभी चौपालों पर खेती-बाड़ी किसानी की बातें हो रहीं थी, अब अपना प्रधान चुनने की रणनीति पर चर्चा है। गांव की गलियों में छोटका-बढ़का नेताओं की आवाजाही बढ़ गई है और हर चेहरे पर चुनावी गणित स्पष्ट नजर आ रही है। तो आइये जानते हैं अभी नई सरकार के चुनने में और कितना इंतजार करना पड़ सकता है।
दरअसल, 26 मई से पंचायतों और प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन चुनाव की तारीखों और प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने प्रधान और अन्य सदस्यों को बतौर प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। कार्यकाल बढ़ने से प्रधानों ने राहत की सांस ली है। इससे पहले कई प्रधान अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में लंबित परियोजनाओं का भुगतान कराने में जुटे हुए हैं, ताकि अगले चुनाव में पैसे से वोट की खरीद परोख्त में वित्तीय बाधाएं न आएं....
यूपी पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट कब आएगी?
यूपी में प्रधानी चुनाव से पूर्व राज्य निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची (Voter List) 10 जून तक प्रकाशित कर सकती है।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी
इधर, पंचायत चुनावों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी मिल गई है। पंचायती राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। मसौदे के अनुसार आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का ज्ञान रखते हों।
अब बात आगे बढ़ी है तो OBC आयोग के गठन के साथ ही आरक्षण की प्रक्रिय शुरू हो सकेगी। नया समर्पित आयोग प्रदेश में पिछड़ों का रैपिड सर्वे करेगा और इस सर्वे के जरिए वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के आधार पर सीटों का आरक्षण लागू होगा फिर कहीं जाकर पंचायत चुनाव होंगे। हालांकि, ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव तय समय पर अप्रैल-मई में संपन्न हो चाने चाहिए थे, लेकिन पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया इस पर बाधा बनी हुई थी।
पंचायत चुनाव में देरी हो सकती है और सरकार कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त कर रही है। प्रदेश के पंचायत राज विभाग और जिला प्रशासन स्तर पर शिकायतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई जिलों में सीडीओ, डीपीआरओ और ब्लॉक अधिकारियों के पास रोजाना पंचायतों से जुड़े विवाद पहुंच रहे हैं। अधिकारी फिलहाल शिकायतों की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं, लेकिन चुनाव कार्यक्रम को लेकर शासन की ओर से अंतिम दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
ओबीसी आयोग में कौन से सदस्य होंगे
प्रस्ताव में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन पांच सदस्यों में से एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जाएगा। इस आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर नियुक्ति से छह माह तक होगा।
प्रस्ताव के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में सरकार ने उप्र राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में आरक्षण प्रदान करने के आशय से राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिया है।
आयोग को अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को निकायवार आनुपातिक आरक्षण दिये जाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों (पंचायत) के पदों पर आरक्षण निर्धारण की कार्यवाही की जानी है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य सरकार एक आदेश द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों एवं पदों को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करेगी। पिछडे वर्गों के लिए आरक्षण त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की कुल संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा एवं यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध न हों तो नियत रीति से सर्वेक्षण करके उनकी जनसंख्या निर्धारित की जा सकती है।
पंचायत सीटों पर आरक्षण कब होगा?
आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत सीटों पर आरक्षण निर्धारित किया जाएगा और उसके बाद ही चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी में पंचायत चुनाव अब अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव के बाद हो सकेंगे।
यूपी में कितनी ग्राम पंचायतें
यूपी में करीब 57691 ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, 826 ब्लॉक के प्रमुख, 3200 जिला पंचायत सदस्य और 75 जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने हैं। अभी ग्राम पंचायत प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई-2026 तक है। इसके अलावा ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल जुलाई-2026 के पहले सप्ताह में खत्म होगा।
कब-कब हुए पंचायत चुनाव
- 1995
- 2000
- 2005
- 2010
- 2015
- 2021
पिछले पंचायत चुनाव अप्रैल-2021 में हुए थे, जिसके चलते माना जा रहा था कि इस साल अप्रैल में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया के लिए समर्पित आयोग न होने से पेंच फंस हुआ था। मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार को ओबीसी आयोग बनाने के दिशा-निर्देश दिए थे। इसी मद्देनजर सरकार ने ओबीसी आयोग गठन का फैसला लिया है, जिसके चलते ही पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा खत्म हो गई है।