नोएडा के इन सेक्टर से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
हालांकि, एनएचएआई के सर्वे के बाद यह तय हो पाएगा कि इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कौन संस्था करेगी। एनएचएआई के साफ मना करने से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि किसी बड़ी रोड निर्माण कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र के कई इलाकों को लाभ मिलेगा। खासकर, दिल्ली, हरियाणा और यूपी के शहरों के लोगों को यातायात में सहूलियत होगी। यह नया एक्सप्रेसवे नोएडा सेक्टर 128, 135, 150, 151, 168 के साथ ही ग्रेटर नोएडा के कुछ क्षेत्रों के वाहन चालकों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
इतने रुपये होंगे खर्च
इधर, पुश्ता सड़क के 11 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण पहले से ही किया जा चुका है। साल 2014 में बने इस एक्सप्रेसवे को ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया था। अब इस नए एक्सप्रेसवे के निर्माण में करीब 2 से ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इसमें जो भी अंत तक लागत तय होगी, उसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी।
इन शहरों को होगा सीधा फायदा
एक अनुमान के मुताबिक, नोएडा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों का बड़ा बोझ है। इससे रोजना करीब 10 लाख के आसपास वाहन गुजरते हैं। कई बार ज्यादा वाहनों की वजह से जाम की स्थिति पैदा होती है। लिहाजा, यह नया समानांतर एक्सप्रेसवे बनाकर यात्रा को सुगम और समय रहित बनाया जाएगा। फिलहाल, इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम चल रहा है। इसके बनने से हरियाणा के फरीदाबाद, बल्लभगढ़, दिल्ली के बदरपुर, नेहरू प्लेस और नोएडा का ज्यादा ट्रैफिक इन नए एक्सप्रेसवे से गुजरेगा, जिससे नोएडा एक्सप्रेसवे से वाहनों का भार कम होगा। इसके अलावा इस नए एक्सप्रेसवे को दिल्ली के कालिंदी कुंज (Kalindi Kunj) के पास मुंबई-वड़ोदरा एक्सप्रेसवे (Mumbai-Vadodara Expressway) से भी जोड़ने का प्लान है।
नोएडा एयरपोर्ट से जुड़ने का बेस्ट विकल्प
नोएडा एयरपोर्ट से सीधे लिंक के लिए ये एक्सप्रेसवे बढ़िया विकल्प रहेगा। इतना ही नहीं नोएडा प्राधिकरण इसके अलावा दो और नए विकल्प पर फिजिबिलिटी तैयार कर रहा है। एनबीटी की खबर के मुताबिक, पहला 19 किमी लंबा पुश्ता रोड (Pushta Road) को ठीक कराया जाए। इसके लिए सिंचाई विभाग से संपर्क किया गया है। वहीं, दूसरा एक्सप्रेसवे के ऊपर एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाए। लेकिन, इस नए एक्सप्रेसवे के समानांतर नोएडा हवाई अड्डे को लिंक करने के लिए कौन सही विकल्प रहेगा ये एनएचएआई के सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
