जयपुर

शीतलाष्टमी 2023: राजस्थान के इस जिले में है देवी शीतला का सदियों पुराना चमत्कारी मंदिर, 800 साल से नहीं भरा यहां का घड़ा, जानिए क्यों

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 14, 2023, 07:27 PM IST

Sheetlashtami 2023: पाली जनपद में है माता शीतला का चमत्कारी मंदिर। कहते हैं यहां मौजूद घड़ा पिछले आठ सौ सालों से नहीं भर पाया। साल में दो बार श्रद्धालु इसमें पानी भरते हैं। इसके बाद भी ये खाली रहता है। बीकानेर शहर में स्थित शीतला गेट क्षेत्र में स्थित माता शीतला मंदिर में शीतलाष्टमी पर मां की सवारी यानी के गधे के पूजन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

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राजस्थान के पाली जिले में मंदिर में स्थापित मां शीतला की प्रतीमा (फाइल फोटो)

KEY HIGHLIGHTS
  • मंदिर में रखा घड़ा पिछले 800 सालों से नहीं भर पाया है
  • साल में दो बार श्रद्धालु इसमें भरते हैं पानी
  • बीकानेर में शीतलाष्टमी पर है गर्दभ पूजन परंपरा


Sheetlashtami 2023: राजस्थान के पाली जिले में माता शीतला का अत्यंत प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर है। कहते हैं कि, यहां एक घड़ा है जो पिछले 800 सालों से अभी तक नहीं भरा गया है। यह घड़ा मंदिर में एक पत्थर से ढका हुआ है।

चैत्र महीने की शीतलाष्टमी और ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा के दिन साल में दो बार घड़े के ढक्कन को हटाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु इसमें पानी डालते हैं। लोगों का कहना है कि, इस चमत्कारी घड़े में अब तक लाखों लीटर पानी भरा जा चुका है, मगर ये घड़ा भरता ही नहीं है। इस मंदिर को लेकर कई दंत कथाएं प्रचलित हैं। तो चलिए आपको बताते हैं इस चमत्कारी मंदिर का इतिहास।

इसलिए 800 सालों से भर रहे घड़ा

इलाके में प्रचलित दंत कथाओं के मुताबिक लोगों कहते हैं कि, 800 साल पहले बाबरा नामक एक राक्षस से लोग भयभीत थे। बताया जाता है कि, राक्षस लोगों के घरों में विवाह के समय दूल्हे को मार देता था। यही वजह थी कि, क्षेत्र के ब्राह्मणों ने शीतला माता की आराधना की। इसके बाद मां गांव के एक ब्राह्मण के स्वप्न में आई व कहा कि, जब उसकी पुत्री का विवाह होगा तो वे राक्षस का वध कर देंगी। इसके बाद ब्राह्मण की पुत्री के विवाह के समय देवी शीतला कन्या के स्वरूप में प्रकट हुई और अपने घुटनों में दबाकर राक्षस का अंत कर दिया। अपनी मृत्यु से पूर्व राक्षस ने देवी से गुहार लगाई कि, उसे गर्मी में अधिक प्यास लगती है। इसलिए उसे वर्ष में दो बार पानी पिलाया जाए। देवी मां ने उसे ये वचन दे दिया, यही वजह है कि, मंदिर के घड़े को लोग विगत 800 सालों से घड़े को भरकर इस पौराणिक परंपरा को आज भी निभा रहे हैं।

यहां होता है शीतलाष्टमी पर गर्दभ पूजन

राजस्थान के बीकानेर शहर में स्थित शीतला गेट क्षेत्र में स्थित माता शीतला मंदिर में शीतलाष्टमी के मौके पर श्रद्धालु मां को बासी पकवानों का भोग लगाते हैं। इसके बाद यहां पर खास तौर पर मां की सवारी यानी के गधे के पूजन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। गर्दभ पूजन के तहत मां के उपासक गधे को तिलकार्चन कर फूल मालाओं से लाद देते हैं। इसके बाद गधे को बासी पकवानों का खास भोग लगाया जाता है। इसके पीछे की लोग वजह बताते हैं कि, पुरखों की परंपरा को निभाने के साथ ही ये सब आस्था से जुड़ा हुआ है। वहीं मान्यता है कि, गर्दभ पूजन से कई बीमारियां नहीं होती।
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