जयपुर

Electricity: ऑडिट रिपोर्ट में फ्यूल सरचार्ज शून्य; इतने पैसे प्रति यूनिट सस्ती हो सकती है बिजली

राजस्थान में महंगी बिजली खरीद पर नियंत्रण लगाने के बाद, डिस्कॉम्स की वाणिज्यिक शाखा ने पिछली तिमाही के उपभोग के लिए फ्यूल सरचार्ज की वसूली नहीं करने की जानकारी दी है। इस स्थिति में, आरईआरसी के निर्णय के अनुसार, बिलों में बेस फ्यूल सरचार्ज को कम किया जाएगा, जो वर्तमान में 28 पैसे प्रति यूनिट से भी कम होगा।

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बिजली दर वृद्धि (फाइल फोटो)

जयपुर : राजस्थान में में महंगी बिजली खरीद पर नियंत्रण लगाने के बाद, डिस्कॉम्स की कॉमर्शियल विंग ने पिछली तिमाही के उपभोग पर फ्यूल सरचार्ज की वसूली नहीं करने की सूचना दी है। इसके परिणामस्वरूप, आरईआरसी के निर्णय के अनुसार, बिलों में बेस फ्यूल सरचार्ज कम किया जाएगा। वर्तमान बेस ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अप्रूव्ड पावर परचेज कॉस्ट 3.14 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि बिजली खरीद की औसत दर 3.10 रुपये प्रति यूनिट रही। पिछले वित्तीय वर्ष में, फ्यूल सरचार्ज की वसूली 57 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से की जा रही थी, साथ ही 7 पैसे प्रति यूनिट का स्पेशल फ्यूल सरचार्ज भी लगाया जा रहा था।

प्रूव्ड रेट 3.26 रुपये प्रति यूनिट

दैनिक भास्कर के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि पिछली सरकार की तुलना में बिजली खरीद की दरें काफी कम की गई हैं। चोरी और छीजत पर सख्त मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और डिस्कॉम चेयरमैन आरती डोगरा बिजली सप्लाई और खरीद की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा, दूसरे प्रदेशों से पावर बैकिंग को भी नियंत्रित किया गया है। बिजली चोरी और छीजत पर सख्त कार्रवाई के कारण पावर परचेज कॉस्ट में कमी आई है। शॉर्ट टर्म बिजली खरीद की अप्रूव्ड रेट 3.26 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि पिछली तिमाही में केवल 3.25 रुपये प्रति यूनिट की परचेज कॉस्ट आई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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