फरीदाबाद

सफल हो रही पौधारोपण की पहल, अरावली की पहाड़ियों में बढ़ा पेड़ों का रकबा, पिछली बार से 8 फीसदी बढ़ गया जंगल

अरावली की पहाड़ियों का वनक्षेत्र में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसा कई संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे पौधारोपण अभियान की वजह से हुआ है। एक्सपर्ट ऐसा मान रहे हैं कि इससे हवा के प्रदूषण के स्तर में भी कमी दर्ज की जाएगी।

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अरावली वन क्षेत्र में आई 8 फीसदी की बढ़ोतरी (सांकेतिक तस्वीर)

Faridabad Forest: पेड़ कितने जरूरी होते हैं, ये सब जानते हैं। इन्हें बचाने के लिए कितने जतन किए जाते हैं और कितने अभियान भी चलाए जाते हैं। कितने सफल होते हैं, कितनों के नतीजे दिखते हैं, इसपर कुछ खास नहीं कहा जा सकता है। फरीदाबाद में ऐसे ही अभियानों का अच्छा नतीजा दिखा है। यहां अरावली के जंगलों का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी तक बढ़ गया है। इसके बढ़ने का कारण पिछले साल अरावली के जंगलों में पौधारोपण अधिक होना बताया जा रहा है। पिछले साल तक अरावली वन क्षेत्र का दायरा 6948.44 हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 7530.23 हेक्टेयर हो गया। हाल ही में विभाग की यह रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह बात सामने आई है।

सफल हो रहे अभियान

जिला वन विभाग और कई सामाजिक संस्थाओं के साथ व्यक्तिगत प्रयासों से चल रहे पौधारोपण अभियान का प्रभाव अब दिखाई देने लगा है। पिछले साल वन विभाग ने अरावली वन क्षेत्र सहित फरीदाबाद के तमाम हिस्सों में 1,63,517 पौधे लगाए थे। इसके अलावा अरावली वन क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग की ओर से कई सामाजिक संस्थाओं, स्कूली बच्चों, ट्रक ड्राइवरों आदि को सीड्स बॉल भी दी गई थी। जिनसे पेड़ों की संख्या में खासी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इस साल भी लगेंगे पेड़

वन विभाग ने इस साल 1 लाख 4 हजार 50 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सेक्टर 17 बाईपास रोड स्थित हूडा रोज गार्डन और सेक्टर 21 में BSNL की खाली जमीन पर जापानी मियावाकी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके पूरी तरह विकसित हो जाने से हवा के प्रदूषण में कमी आएगी।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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