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दुश्मनी के लिए भी औकात चाहिए, कॉम्पिटिशन सबकी फितरत नहीं : Times Now समिट में विरोधियों पर बोलीं स्मृति ईरानी

Times Now Summit 2026 : टाइम्स नाउ समिट 2026 में स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने कहा कि कुछ लोग उन्हें 'औकात याद दिलाने' की कोशिश करते थे, लेकिन उन्होंने उसी को अपनी ताकत बना लिया। एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि कॉम्पिटिशन सबकी फितरत नहीं होती, दुश्मनी के लिए भी औकात चाहिए!

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टाइम्स नाउ समिट 2026 में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी

Times Now Summit 2026 : टाइम्स नाउ समिट 2026 में स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने अपने राजनीतिक और निजी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें कई बार “लिखकर खत्म” यानी राजनीतिक तौर पर खारिज कर दिया गया, लेकिन हर बार उन्होंने वापसी की। उन्होंने कहा कि असफलता और आलोचना को उन्होंने हमेशा अपने लिए नई शुरुआत का मौका बनाया। समिट में बोलते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोगों को लगातार आलोचनाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई मौकों पर लोगों ने यह मान लिया था कि उनका राजनीतिक करियर खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हर बार पहले से ज्यादा मजबूती के साथ आगे बढ़ीं। एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि कॉम्पिटिशन सबकी फितरत नहीं होती, दुश्मनी के लिए भी औकात चाहिए!

समिट में बोलते हुए उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र किया और कहा कि कई लोगों ने उन्हें बार-बार कमतर आंका। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें “औकात याद दिलाने” की कोशिश करते थे, लेकिन उन्होंने उसी को अपनी ताकत बना लिया। एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि 'कॉम्पिटिशन सबकी फितरत नहीं होती, दुश्मनी के लिए भी औकात चाहिए'!

स्मृति ईरानी ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वह कठिन समय में खुद पर विश्वास बनाए रखे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय जल्दी बदलती है और कई बार बिना पूरी सच्चाई जाने ही निष्कर्ष निकाल लिया जाता है। ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ता ही व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करती है।

अपनी जुझारू भावना के बारे में पूछे जाने पर ईरानी ने कहा कि मैं अक्सर लोग मुझ पर हमला करते हैं और मैं उनसे कहती हूं, 'सुनिश्चित करो कि मेरा वार सही जगह लगे, वरना मैं अगले दिन तक ज़िंदा नहीं रहूंगी।' मैं अजीत डोवाल के एक बहुत ही लोकप्रिय भाषण का हवाला देना चाहूंगी... जब उन्होंने कहा था, 'स्वर्ग पाने के लिए मरना पड़ता है। लेकिन मेरी हकीकत ये है कि मैंने बहुत बार मारा भी है और स्वर्ग भी पाया है।

ईरानी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती। इसके लिए लगातार मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार लोगों को असफलता से डर लगता है, लेकिन असल में वही अनुभव व्यक्ति को मजबूत बनाते हैं।

गौरतलब है कि स्मृति ईरानी भारतीय राजनीति की प्रमुख नेताओं में रही हैं और उन्होंने केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है। वह पहले सूचना एवं प्रसारण, मानव संसाधन विकास, कपड़ा, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। समिट में उनके इस संबोधन को संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास के संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को आलोचनाओं से घबराने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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