Indore News : चोइथराम चैरिटेबल ट्रस्ट ने जीती कानूनी लड़ाई, अरबों की राशि-संपत्ति पर क्या बोला हाईकोर्ट
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Dec 13, 2025, 03:49 PM IST
ट्रस्ट के चेयरमैन सतीश मोतीयानी ने कहा कि यह निर्णय ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उनका कहना है कि अब ट्रस्ट कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपने अधिकार सुरक्षित रखेगा और सुनिश्चित करेगा कि फंड और संपत्ति सही तरीके से ट्रस्ट के काम में आए।
एमपी हाईकोर्ट
इंदौर : अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव के मुताबिक इंदौर का चोइथराम चैरिटेबल ट्रस्ट, जो 1972 से शहर में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल चला रहा है, लंबे समय से अपनी वैधानिक फंडिंग को लेकर संघर्ष कर रहा था। ट्रस्ट के संस्थापक स्व. ठाकुरदास चोइथराम पगारानी ने विदेश में Choithram International Foundation (CIF) की स्थापना की थी, ताकि ट्रस्टों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके। CIF के अरबों रुपये के फंड में ट्रस्ट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा यानी करीब 21,000 करोड़ बताया जाता है। ट्रस्ट का आरोप था कि कुछ लोग—लेखराज पगारानी, किशोर पगारानी, रमेश थानवानी और दयाल दतवानी—जो ट्रस्ट में ट्रस्टी रह चुके हैं, उन्होंने CIF से जुड़ी जानकारी और संपत्तियों को छुपाया और “Choithram” ट्रेडमार्क को विदेशी कंपनियों में दर्ज करा दिया।
एमपी हाईकोर्ट ने खारिज कीं आपत्तियां
इन चारों ने रजिस्ट्रार की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी, यह दावा करते हुए कि विदेशी संपत्ति का मामला रजिस्ट्रार की सीमा से बाहर है। लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर 2025 को सभी आपत्तियां खारिज कर दीं। अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव के मुताबिक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार की कार्रवाई पूरी तरह वैध है, एक कार्यकारी ट्रस्टी द्वारा शिकायत करना कानूनन सही है, आरोप गंभीर हैं और रजिस्ट्रार को अपनी प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि विदेशी संपत्ति का तर्क प्रारंभिक जांच को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव के मुताबिक इस आदेश के बाद अब मामला धारा 26 और 27 के तहत रजिस्ट्रार द्वारा आगे बढ़ेगा और ज़रूरत पड़ने पर जिला न्यायालय में विस्तृत सुनवाई की जा सकती है। ट्रस्ट के चेयरमैन सतीश मोतीयानी ने कहा कि यह निर्णय ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उनका कहना है कि अब ट्रस्ट कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपने अधिकार सुरक्षित रखेगा और सुनिश्चित करेगा कि फंड और संपत्ति सही तरीके से ट्रस्ट के काम में आए।
विशेषज्ञ इसे ट्रस्ट संपत्तियों की पारदर्शिता और संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला मान रहे हैं, जो पूरे देश के चैरिटेबल ट्रस्टों के लिए मिसाल बन सकता है।
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