बिहार में आज का मौसम (28 Mar 2026): बिहार में कुदरत का मिजाज इन दिनों काफी तल्ख नजर आ रहा है। शुक्रवार की शाम से शुरू हुआ आंधी-पानी का सिलसिला देर रात राज्य के बड़े हिस्से में परेशानी और राहत दोनों लेकर आया। पटना सहित सूबे के 34 जिलों में कुदरत ने ऐसा तांडव मचाया कि कहीं पेड़ उखड़ गए तो कहीं बिजली के खंभे जमींदोज हो गए। 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने जहां एक ओर उमस भरी गर्मी से लोगों को निजात दिलाई, वहीं दूसरी ओर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाकर किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पटना का मौसम
राजधानी पटना में दोपहर बाद से ही आसमान में बादलों का जमघट लगने लगा था और शाम होते-होते दिन में ही रात जैसा नजारा दिखने लगा। करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने शहर के कई इलाकों जैसे राजापुर पुल, कंकड़बाग और दानापुर में तबाही मचाई। रामनवमी की तैयारियों के बीच मौर्य लोक के पास बना अस्थायी गेट गिर गया। सड़कों पर गिरे पेड़ों की डालियों के कारण देर रात तक आवागमन बाधित रहा।
बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचों को चोट
तेज आंधी का सबसे बुरा असर शहर की बिजली व्यवस्था पर पड़ा। तेज हवाओं के कारण 33 केवी के आधा दर्जन और 11 केवी के दर्जनों फीडर अचानक ठप हो गए। पेसू (PESU) के अधिकारियों के मुताबिक, फीडरों पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर और पेड़ों की टहनियां गिरने से शॉर्ट सर्किट की समस्याएं आईं। कंकड़बाग, बोरिंग रोड और आयकर गोलंबर जैसे वीआईपी इलाकों में भी घंटों अंधेरा पसरा रहा। हालांकि, विभागीय टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए पेट्रोलिंग शुरू की और धीरे-धीरे वैकल्पिक स्रोतों से बिजली बहाल करने की कोशिशें की गईं।
48 घंटों तक आंधी-बारिश की संभावना
सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर, गया और मोतिहारी जैसे जिलों में भी प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। मुजफ्फरपुर में रात 11 बजे के करीब आए तूफान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। पूसा मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और राजस्थान की ओर से आए पश्चिमी विक्षोभ के मिलन ने बिहार में निम्न दबाव का क्षेत्र बना दिया है। यही कारण है कि आने वाले 48 घंटों तक प्रदेश के उत्तर और दक्षिण, दोनों ही हिस्सों में मध्यम दर्जे की बारिश और ठनका गिरने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
किसानों के लिए चेतावनी
इस बेमौसम बारिश ने आम और लीची के बागानों के साथ-साथ खेतों में खड़ी फसलों को काफी चोट पहुंचाई है। मौसम विभाग ने जमुई, मधेपुरा, सहरसा और पूर्णिया जैसे जिलों में वज्रपात का अलर्ट जारी किया है और किसानों को खेतों में न जाने की सलाह दी है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही तपिश में कमी आई है और अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। फिलहाल मौसम का यह मिजाज अगले तीन दिनों तक बने रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
