भोपाल

'कांग्रेस बचाओ, रायशुमारी चोरी हो गई' राहुल गांधी के फोटो के साथ चौक-चौराहों पर लगे पोस्टर

रीवा में कांग्रेस के भीतर मचे घमासान ने नया मोड़ ले लिया है, जहां शहर में 'रायशुमारी चोरी' को लेकर पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों ने कांग्रेस की गुटबाज़ी और आंतरिक मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि यह भाजपा की साजिश है, जबकि अंदरखाने से गुटबाजी की सुगबुगाहट भी सामने आ रही है।

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rewa congress poster

देशभर में कांग्रेस 'वोट चोरी' के आरोप लगाकर प्रदर्शन कर रही है। इसी बीच रीवा में कांग्रेस कमेटी पर रायशुमारी चोरी हो जाने के आरोप लगाते हुए शहर के चौक चौराहों में पोस्टर लगाए गए है। इन पोस्टर में लिखा है राहुल गांधी जी, रीवा में 'रायशुमारी चोरी हो गई। रीवा कांग्रेस बचाओ।'

कांग्रेस में अंदरूनी कलह किसी से छुपी नहीं है। कांग्रेस के अंदरखाने से खबर है कि कांग्रेस के ही एक गुट ने हाईकमान तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इस तरह के पोस्टर का सहारा लिया है। तो वहीं स्थानीय कांग्रेस का आरोप है कि ये बीजेपी वालों की चाल है। कांग्रेस को बदनाम करने के लिए बीजेपी के लोग ऐसे पोस्टर लगा रहे हैं।

इस पोस्टर का मामला हाल ही में हुई कांग्रेस पार्टी के नवनियुक्त पदाधिकारियों से जुड़ा बताया जा रहा है। दरअसल कांग्रेस पार्टी ने ज़िलाध्यक्षों की लिस्ट जारी करके जब से अपने नए जिला और शहर अध्यक्षों को जिम्मेदारी दी है। तभी से प्रदेश भर में विरोध के स्वर सुनाई दे रहे है। रीवा में भी शहर और ग्रामीण अध्यक्ष को लेकर विरोध की सुगबुगाहट आ रही है। इस पर नए नए बने ज़िलाध्यक्ष अशोक पटेल का कहना है कि राहुल गांधी के मार्गदर्शन में प्रवेक्षकों की टीम जिले में आई थी, उसने अपनी रिपोर्ट दी है, उसके बाद ही पदाधिकारी बनाए गए हैं। ऐसे में गुटबाज़ी की खबरों को हवा देना ठीक नहीं है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक पटेल ने पोस्टर को भाजपा की साजिश करार किया है। शहर अध्यक्ष का कहना है कि पोस्टर भाजपा की चाल है। कांग्रेस पार्टी एकजुट है, उसमें किसी तरह की कोई गुटबाजी और मतभेद भी नहीं है। पोस्टर में किसी कांग्रेसी का नाम दर्ज नहीं है।

हालांकि जैसे ही ये पोस्टर पर लोगों की नजर पड़ी चर्चाओ का बाजार गर्म हो गया। कांग्रेस के जि़लाध्यक्ष कुछ भी कहें लेकिन कांग्रेस के अंदर गुटबाज़ी एक कैंसर की तरह है, ये बात खुद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी मंच से कई बार दोहरा चुके हैं। ऐसे में इस तरह के पोस्टर खबरों का बाज़ार गर्म करते रहेंगे ये संभावनाएं बनी हुई हैं।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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