Chandigarh News: खानी है जेल की रोटी तो आए बुड़ैल जेल, प्रशासन 30 रुपये में खिलायेगा भरपेट जेल का खाना

Chandigarh: चंडीगढ़ बुड़ैल जेल ने एक नई योजना शुरू की है। अब यहां पर लोग 30 रुपये देकर भरपेट जेल की रोटी खा सकते हैं। इस पैसे में बाहरी लोगों को चार रोटी, दाल और सब्‍जी उपलब्‍ध कराई जाएगी। यह योजना उन लोगों के लिए शुरू किया गया है, जिनको ज्‍योतिषी जेल की रोटी खाने की सलाह देते हैं।

jail ki roti
बुड़ैल जेल में अब 30 रुपये में खायें भरपेट खाना   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • जेल में सुबह 11 से 12 बजे तक बाहरी लोगों को मिलेगी जेल की रोटी
  • लोगों को मुलाकात कक्ष में शुल्‍क देने पर उपलब्‍ध कराया जाएगा यह खाना
  • इस तरह की योजना शुरू करने वाला बुड़ैल जेल बना देश का इकलौता जेल

Chandigarh: चंडीगढ़ में 'जेल की रोटी' खाने के लिए अब न तो किसी की सिफारिश लगवाने की जरूरत पड़ेगी और न ही कोई अपराध करने की। जेब में महज 30 रुपये डालिये और पहुंच जाइये बुड़ैल जेल। यहां पर जेल प्रशासन आपको भर पेट भोजन कराएगा। दरअसल, कई बार ज्‍योतिषी लोगों को उनकी कुंडली व हाथ देखकर पुलिस केस या जेल जाने से बचने के लिए जेल की रोटी खाने की सलाह देते हैं। कई बार लोग खुद उत्सुकतावश जेल की रोटी खाना चाहते हैं। ऐसे में अब तक लोगों को जेल की रोटी खाने के लिए सिफारिश लगवानी पड़ती थी या फिर लोगों को किसी मामले में जेल के अंदर जाने पर ही रोटी मिलती थी।

हालांकि अब बुड़ैल जेल में लोगों को यह रोटी आसानी से मिल जाएगी। इस तरह की योजना शुरू करने वाला बुड़ैल जेल देश का पहला जेल भी बन गया है। जेल प्रशासन के अनुसार यहां पर कोई भी बाहरी व्यक्ति सुबह 11 से 12 बजे के बीच आकर जेल की रोटी खा सकता है। अधिकारियों के अनुसार बाहरी लोग बुड़ैल जेल के मुलाकात रूम में जाकर रोटी के ऑर्डर कर सकते हैं। यहीं पर ऑर्डर के साथ ही जेल कर्मचारी के पास 30 रुपये का भुगतान कर रसीद लेनी होगी। जिसके बाद लोगों को चार रोटी, दाल और चावल दिया जाएगा। अगर इस खाने से किसी का पेट नहीं भरता तो वह दोबारा से इतने ही रुपए का भुगतान कर खाने की प्लेट का ऑर्डर दे सकते है।

अभी तक सिफारिश लगाकर मिलती थी 'जेल की रोटी'

जेल अधिकारियों ने बताया किए जेल की रोटी खाने के लिए अभी यहां पर लोगों का तांता लगा रहता था। जेल में बंद कैदियों से मिलने आने वाले लोग जहां जेल के अंदर बनी रोटी की मांग करते थे, वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जो उच्‍च अधिकारियों व नेताओं की सिफारिश लेकर यहां पर जेल की रोटी खाने पहुंचते थे। इसके अलावा यहां ऐसे परिजन भी आते थे जो बताते कि ज्‍योतिष ने उनके बच्‍चों की कुंडली में जेल योग बताया है और वे इसका हवाला देकर रोटी देने का अनुरोध करते थे। इन लोगों की डिमांड पूरी करने में जेल प्रशासन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जिसके बाद शुल्‍क लेकर लोगों को रोटी देने की योजना शुरू की गई है। एक जेल अधिकारी ने बताया कि इस जेल के कैदियों द्वारा दिवाली पर बनाई गई मोमबत्तियों और होली पर बनाई गई गुंजिया व रंगों की भी खूब मांग रहती है।

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