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सस्ता तेल, चाबहार और ₹2.5 लाख करोड़ का बाजार : कैसे अमेरिका-ईरान की 'दोस्ती' से चमकेगी भारत की किस्मत

US-Iran डील होने जा रही है। क्रूड के दाम इस डील का ऐलान कर रहे हैं, जो एक सप्ताह में 10 फीसदी से ज्यादा सस्ता हो चुका है। वहीं, इस दौरान भारतीय रुपये और शेयर बाजार में मजबूती आई है।

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भारत के हित में ईरान और अमेरिका डील
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Jun 12, 2026, 18:09 IST

US-Iran Deal को लेकर यूं तो ट्रंप और ईरान पिछले दो महीने में कई बार कई ऐलान कर चुके हैं। लेकिन, इस बार माना जा रहा है कि दोनों देश गंभीरता के साथ डील की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बहरहाल, यह डील जब होगी, तब होगी फिलहाल क्रूड ऑयल इस डील का एक फ्रंट रनिंग इंडिकेटर बन गया है, जो सीधे तौर पर भारत के फायदे और नुकसान से जुड़ा है। जब डील की संभावनाएं बढ़ती हैं, तो क्रूड के दाम में नरमी देखने को मिलती है। वहीं, जब लगता है कि बातचीत पटरी से उतर रही है, तो क्रूड के दाम बढ़ने लगते हैं।

5 दिन में 10 फीसदी घटे क्रूड के दाम

8 से 12 जून के दौरान पांच दिन के भीतर क्रूड ऑयल के दाम में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। सोमवार 8 जून को जहां Brent Crude Oil Price 97.15 डॉलर प्रति बैरल रही, वहीं शुक्रवार 12 जून को यह 85.97 डॉलर प्रति बैरल तक तक आ गया है। इस तरह पांच दिन में क्रूड के दाम में $11.18 प्रति बैरल यानी 11.51% की कमी आई है।

भारत के लिए बड़ा जोखिम

S&P की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध भारत के लिए बहुत बड़ा जोखिम है। यह भारत की तात्कालिक आर्थिक मुसीबतें ही नहीं बढ़ा रहा है। बल्कि, लॉन्ग टर्म लक्ष्यों को भी चोट पहुंचा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत के लिए 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनना, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना और 2070 नेट जीरो इकोनॉमी बनना असंभव हो जाएगा। ये तीन इस सदी के भारत के तीन सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध भारत को इन लक्ष्यों से दूर धकेल रहा है।

ट्रंप ईरान से क्या चाह रहे?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मोटे तौर पर ईरान से तीन चीजें चाहतें हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सबसे पहली शर्त एनरिच्ड यूरेनियम को सरेंडर करे। इसके साथ ही हमेशा के लिए अपने न्यूक्लियर बम बनाने के सपने को छोड़ दे। इसके साथ ही बिना किसी शर्त के होर्मुज स्ट्रेट को खोले। इसके साथ ही ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपने प्रॉक्सीज, जैसे हिज्बुल्ला और हूतीज को खत्म करे या फिर उन्हें इजरायल पर हमलों से रोके।

ईरान की क्या हैं शर्तें?

ईरान हमेशा के लिए अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकना नहीं चाहता है। इसके अलावा होर्मुज पर टोल वसूली का अधिकार चाहता है। इसके साथ ही अमेरिका की तरफ से जब्त अरबों डॉलर की संपत्तियों को लौटाना भी ईरान की शर्तों में शामिल है। वहीं, सुरक्षा और ट्रेड दो अहम मसले हैं, जहां ईरान अमेरिका से भरोसा चाहता है कि आगे ईरान पर कोई हमला नहीं होगा और ईरान को डॉलर में ट्रेड करने की इजाजत मिलेगी।

अभी क्या है मौजूदा स्थिति?

लेकिन, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते या 'डील' के संकेत मिल रहे हैं। अगर यह डील अंतिम रूप लेती है और ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटते हैं, तो यह पूरे पश्चिम एशिया में भारत के व्यापारिक डायनेमिक्स (Trade Dynamics) को पूरी तरह बदल कर रख देगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस ऐतिहासिक बदलाव से भारत को क्या और कितने बड़े फायदे होने वाले हैं।

पश्चिम एशिया में व्यापारिक संतुलन

अब तक ईरान पर प्रतिबंधों के कारण भारत का पश्चिम एशिया व्यापार असंतुलित था। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से सऊदी अरब, यूएई और इराक पर निर्भर हो गया था। यूएस-ईरान डील होते ही इस क्षेत्र का ट्रेड डायनेमिक्स 'एकतरफा' से 'बहुआयामी' हो जाएगा। भारत को न सिर्फ एक पुराना और भरोसेमंद साझेदार वापस मिलेगा, बल्कि खाड़ी देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारत को बेहतर व्यापारिक शर्तें और मोलतोल (Bargaining Power) करने की ताकत मिलेगी। यह डील भारत को पश्चिम एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद करेगी।

सस्ता क्रूड ऑयल और गैस

प्रतिबंधों से पहले ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता था। प्रतिबंध हटने के बाद भारत के लिए ईरान से तेल का आयात दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। ईरान भौगोलिक रूप से भारत के बेहद करीब है। फारस की खाड़ी से भारत के पश्चिमी तटों (जैसे मुंद्रा या जामनगर) तक तेल लाने में सऊदी अरब या रूस के मुकाबले बेहद कम समय (मात्र 5 से 7 दिन) लगता है, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी घट जाएगा। ईरान हमेशा से भारतीय रिफाइनरियों को भारी डिस्काउंट, मुफ्त शिपिंग इंश्योरेंस और 60 दिनों तक का उदार क्रेडिट पीरियड देने के लिए जाना जाता रहा है। भारत ईरान के विशाल 'फरजाद-बी' (Farzad-B) गैस ब्लॉक में निवेश को पुनर्जीवित कर सकता है, जिससे देश को बेहद सस्ती नेचुरल गैस मिल सकेगी।

US IRAN INDIA

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चाबहार पोर्ट और INSTC: सेंट्रल एशिया का खुला रास्ता

अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार हटने से भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलेगी। भारत द्वारा विकसित किया जा रहा ईरान का चाबहार पोर्ट पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा। इसके जरिए भारत, पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया (Central Asia) और रूस तक अपनी सीधी पहुंच बना सकेगा। इसके अलावा, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के सक्रिय होने से यूरोप और मध्य एशिया के साथ भारत का व्यापारिक समय 40% तक कम हो जाएगा और माल ढुलाई की लागत में 30% की कमी आएगी।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार

प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार सिमटकर महज 1.5 से 2 अरब डॉलर के निचले स्तर पर आ गया था, जो कभी 17 अरब डॉलर के पार हुआ करता था। लेकिन प्रतिबंध हटने और कच्चे तेल की दोबारा खरीद शुरू होने के बाद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अगले 3 से 5 वर्षों में 25 अरब डॉलर से 30 अरब डॉलर (लगभग 2.1 से 2.5 लाख करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की पूरी संभावना है। तेल के आयात के अलावा, भारत की ओर से कृषि उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में होने वाली भारी बढ़ोतरी इस व्यापारिक उछाल को मुख्य रूप से ड्राइव करेगी।

भारतीय निर्यातकों और उद्योगों के लिए नए दरवाजे

ईरान की अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के कारण लंबे समय से कैश और सामान की किल्लत से जूझ रही है। प्रतिबंध हटते ही ईरान को अपने बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर सामान की जरूरत होगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय उद्योगों को मिलेगा। भारत का बासमती चावल, चाय, चीनी और सोया मील (Soya Meal) ईरान में बेहद लोकप्रिय हैं। प्रतिबंध हटने से भारतीय किसानों और एग्रो-एक्सपोर्टर्स की चांदी होगी। ईरान की जेनरिक दवाओं और ऑटो पार्ट्स की जरूरत को भारतीय कंपनियां आसानी से पूरा कर सकती हैं। दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे भारतीय बैंकों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे के झंझटों से मुक्ति मिलेगी।

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