US IRAN Peace Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने गुरुवार को पीस डील पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील का तुरंत सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल के प्राइस पर दिखा है, जो अब करीब उसी स्तर पर आ गया है, जहां युद्ध की शुरुआत में था। क्योंकि, होर्मुज स्ट्रेट से ईरान ने अपना पहरा हटा लिया है। वहीं, अमेरिका ने ईरानी जहाजों की नाकेबंदी खत्म कर दी है।
किस तरह प्रभावित हुआ भारत?
भारत भले ही युद्ध भूमि से हजारों किलोमीटर दूर है। लेकिन, दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। युद्ध का हिस्सा नहीं होने के बाद भी अमेरिका, इजरायल और ईरानी हमलों में कई भारतीयों की जान गई है। इसके अलावा लाखों भारतीयों के रोजगार पर असर पड़ा है। क्योंकि, खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय कामगार हैं। युद्ध की वजह से बहुत से लोगों के रोजगार छिने, काम बंद हुए। इसकी वजह से रेमिटेंस प्रभावित हुआ।
क्रूड ने तोड़ी कमर
केंद्र सरकार के दखल के चलते भले ही भारत में रिटेल स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। लेकिन, जितनी बढ़ोतरी हुई है, उसकी वजह से किचन से कारोबार तक झटका लगा है। भारतीय बास्केट में क्रूड का दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। PPCA के मुताबिक युद्ध से पहले दिसंबर से फरवरी के दौरा Indian Basket Crude Oil Price 62 से 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहा। वहीं, मार्च से जून के दौरान यह औसत 90 से 115 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
- पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने की वजह से क्रूड ऑयल के साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम तो बढ़े ही। इसके अलावा
LPG ,LNG , यूरिया सहित तमाम पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति बाधित हुई। - होर्मुज के बंद होने की वजह से दुनियाभर में खेत-खलिहान से लेकर एविएशन तक हर सेक्टर पर असर पड़ा।
- भारत के मामले में एनर्जी आयात कोढ़ में खाज साबित हुआ। अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर समझौता नहीं होने की वजह से भारत के एक्सपोर्ट को झटका लगा
- वहीं क्रूड और गोल्ड के आयात ने डॉलर की डिमांड बढ़ाई, इससे रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिली और रुपये करीब 97 प्रति डॉलर तक के स्तर पर लुढ़क गया।
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इकोनॉमी को डबल चपेट
S&P की एक रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज का बंद रहना, क्रूड की कीमत बढ़ना ऐसे फैक्टर थे, तो भारत के कई बड़े सपनों के लिए झटका देने वाले रहे हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे महंगे क्रूड ऑयल और डॉलर के मुकाबले सस्ते रुपये ने भारत को 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के सपने से दूर कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक अगर होर्मुज बंदी नहीं होती, तो डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया इतना ज्यादा नहीं टूटता, और इस साल ही 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन चुका होता। रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ी, जिससे इकोनॉमिक ग्रोथ को झटका लगा। इस तरह डॉलर के टर्म में भारतीय इकोनॉमी को डबल झटका लगा। एक तरफ ग्रोथ घटी, दूसरी तरफ रुपये के डी-वैल्यूएशन ने इकोनॉमी के साइज को और छोटा कर दिया।
विकसित भारत के सपने पर हमला
भारत ने 2047 तक विकसित होने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को तेज ग्रोथ करनी होगी। ऊर्जा भारत की विकास यात्रा में सबसे अहम कड़ी है। भारत को विकसित होने के लिए अथाह और किफायती ऊर्जा की जरूरत है। फिलहाल, भारत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मोटे तौर पर आयात पर निर्भर है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल और गैस की कीमतो में इजाफा होता है, भारत इस सपने से दूर खिसकने लगता है। क्योंकि, महंगी ऊर्जा ऐसे रिपल इफेक्ट बनाती है, जिससे भारत के विकास की नाव डगमगाने लगती है।
भारत के लिए क्यों अहम?
होर्मुज में जो कुछ भी हुआ, उसके बाद भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में कई बड़े व्यापक बदलाव किए हैं। ऐसे में यह तो नहीं माना जा सकता है कि किसी एक स्रोत से ऊर्जा सप्लाई बाधित होने से भारत के विकसित बनने और आगे बढ़ने की यात्रा रुक जाएगी। लेकिन, इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि रफ्तार जरूर धीमी पड़ेगी। बहरहाल, यह डील होने से भारत को रुपये, क्रूड, एक्सपोर्ट तीन मोर्चों पर राहत मिल सकती है, जो इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ाने वाले बूस्टर से कम नहीं है।
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