Explainer: सोना-चांदी सातवें आसमान पर, ज्वैलरी स्टॉक्स चाट रहे धूल; एक ही नाव में सवार फिर क्यों रह गए पीछे?
कमोडिटी में मार्केट में Gold-Silver हर रोज रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। इसके अलावा Gold-Silver ETF भी लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन, गोल्ड और सिल्वर की Jewellery Stocks का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कल्याण ज्वैलर्स का शेयर आज इंट्रा डे कारोबार में 16.16% तक गिर गया। इसके अलावा ज्यादातर ज्वैलरी स्टॉक्स में में नरमी बनी हुई है। आखिर इस विरोधाभास की वजह क्या है?
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 21, 2026, 02:08 PM IST
Gold-Silver की रिकॉर्ड रैली के बावजूद Jewellery Stocks कमजोर क्यों हैं, यह निवेशकों के दिमाग में एक अहम सवाल है। Gold-Silver Record High पर हैं। गोल्ड-सिल्वर ETF भी रिकॉर्ड जोन में हैं।आम निवेशक को लगता है कि इसका सीधा फायदा ज्वैलरी कंपनियों को मिलेगा। लेकिन जब शेयर बाजार में देखते हैं, तो तस्वीर उलटी दिखती है। यहां तमाम ज्वैलरी स्टॉक्स धूल चाटते दिख रहे हैं। आखिर क्या वजह है कि बुलियन की कीमतें बढ़ना ज्वैलर्स के लिए “गुड न्यूज” नहीं है।
क्या है हाई प्राइस का साइड इफेक्ट?
सोना महंगा होने पर मांग का पैटर्न बदल जाता है। ग्राहक अक्सर खरीदारी टालते हैं, छोटे टिकट साइज में शिफ्ट होते हैं या पुराने गहने एक्सचेंज कराकर काम चलाते हैं। इससे बिक्री का आंकड़ा वैल्यू के दम पर ठीक दिख सकता है, लेकिन वॉल्यूम ग्रोथ कमजोर पड़ती है। बाजार को डर इसी बात का होता है कि हाई प्राइस के बीच डिमांड टिकेगी या नहीं।
कहां मात खाता है ज्वैलरी बिजनेस?
ज्वैलरी कंपनियों की कमाई सोने की कीमत बढ़ने से नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, डिजाइन, ब्रांड प्रीमियम और ऑपरेशन एफिशिएंसी से बनती है। जब सोने में तेज उछाल आता है, तो इन्वेंट्री री-प्राइसिंग और डिस्काउंटिंग का दबाव बढ़ता है। कई बार कंपनियों को ग्राहक बनाए रखने के लिए ऑफर्स देने पड़ते हैं, जिससे मार्जिन पर चोट लगती है। यही कारण है कि सोना ऊपर जाने के बावजूद ज्वैलरी स्टॉक्स में तेजी जरूरी नहीं बनती।
वर्किंग कैपिटल को झटका?
सोना महंगा होते ही ज्वैलर्स के लिए सबसे बड़ा चैलेंज वर्किंग कैपिटल बन जाता है। क्योंकि इन्वेंट्री रखने के लिए ज्यादा कैश लगाना पड़ता है और ग्राहकों की कमी के चलते इन्वेंट्री निकलती धीमी है। इस तरह फंडिंग कॉस्ट बढ़ जाती है। अगर किसी कंपनी के पास कैशफ्लो उतना मजबूत नहीं हो, तो निवेशक सतर्कता के साथ रिएक्ट करने लगते हैं। निवेशक अब सिर्फ सेल्स नहीं, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि कंपनी की ग्रोथ कैश के साथ आ रही है या कर्ज और इन्वेंट्री के भरोसे।
सोने में पैसा अलग लॉजिक पर चलता है
सोना एक एसेट क्लास है, जिसे निवेशक अनिश्चितता और महंगाई के समय सेफ हेवन मानते हैं। वहीं, ज्वैलरी स्टॉक एक बिजनेस है, जहां स्टोर रेंट, स्टाफ, मार्केटिंग, इन्वेंट्री रिस्क और प्रतिस्पर्धा जैसी कई परतें जुड़ी होती हैं। इसलिए कई बार बुलियन रैली के दौरान पैसा Gold ETF या दूसरे गोल्ड प्रोडक्ट्स में जाता है, लेकिन ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में उसी अनुपात में नहीं आता।
वैल्यूएशन का फर्क
ज्वैलरी सेक्टर में भी बाजार सभी कंपनियों को एक जैसी नजर से नहीं देखता। ब्रांड, स्केल, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ग्रोथ विजिबिलिटी के आधार पर वैल्यूएशन अलग-अलग होता है। कुछ बड़े और मजबूत ब्रांड्स को बाजार प्रीमियम देता है, जबकि बाकी कंपनियों में निवेशक ज्यादा सतर्क रहते हैं। इसलिए एक ही सेक्टर में कुछ शेयर टिके रहते हैं और कुछ दबाव में आ जाते हैं।
ज्वैलरी स्टॉक्स का क्या हाल हुआ?
पिछले एक वर्ष में जहां बुलियन ने रिकॉर्ड रिटर्न दिया है। वहीं, ज्वैलरी स्टॉक्स बुरी तरह पिटते नजर आए हैं। पिछले एक साल में ज्वैलरी सेक्टर के शेयरों में सिर्फ Titan और Thangamayil Jewellery ही हैं, जिन्होंने निवेशकों को मजबूत रिटर्न देकर सेक्टर को सपोर्ट किया है। वहीं, Kalyan Jewellers, PC Jeweller और P N Gadgil Jewellers जैसे काउंटर दबाव में रहे और इनमें निगेटिव रिटर्न दिया है।
| स्टॉक | 1-Year Return (लगभग) | ट्रेंड |
|---|---|---|
| Titan Company | +21% | पॉजिटिव |
| Thangamayil Jewellery | +108% | बहुत मजबूत |
| Kalyan Jewellers | -17% | कमजोर |
| PC Jeweller | -28% | कमजोर |
| P N Gadgil Jewellers | -8% | हल्की कमजोरी |
| Senco Gold | -37% | बेहद कमजोर |
| Vaibhav Global | -27.05% | कमजोर |
| TBZ | -14.25% | कमजोर |
तेजी से हो रही ग्रोथ
भारत में ज्वैलरी मार्केट में ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर तेजी से ग्रोथ कर रहे हैं। HDFC की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 में कुल मार्केट में इनकी हिस्सेदारी महज 2% थी, जो 2024 में बढ़कर 37% हो गई है। इसके अलावा 2029 तक ये प्लेयर 43% से 47% बाजार पर कब्जा जमा लेंगे। इस दौरान इनकी ग्रोथ 16% से 18% CAGR की हो सकती है। इसके अलावा 2029 तक भारत का ज्वैलरी मार्केट करीब 140 अरब डॉलर का होने की संभावना है। इसमें भी ब्रांडेट ज्वैलरी सेग्मेंट 35 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 58 से 60 अरब डॉलर तक का होने की संभावना है।
कहां तक जाएंगे सोने-चांदी के दाम?
लेटेस्ट आउटलुक में ब्रोकरेज और एनालिस्ट्स का रुख गोल्ड और सिल्वर को लेकर अब भी बुलिश दिख रहा है। Mirae Asset Sharekhan के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट प्रवीण सिंह के मुताबिक ग्लोबल अनिश्चितता और सेफ-हेवन डिमांड के चलते सोने में मजबूती बनी रह सकती है। वहीं इंटरनेशनल लेवल पर Goldman Sachs और JP Morgan जैसे बड़े ब्रोकरेज सोने के लिए 2026 के अंत तक करीब $4,900–$5,300 प्रति औंस का टारगेट रेंज देखते हैं, जिसे सेंट्रल बैंक खरीदारी और निवेशकों के फ्लो सपोर्ट कर रहे हैं। वहीं, चांदी को लेकर SAMCO Securities का अनुमान है कि टेक्निकल्स के आधार पर यह शॉर्ट टर्म में ₹3.50 लाख प्रति किलो तक जा सकती है।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।