What should FD investors do after RBI cuts repo rate : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025 में लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती करते हुए इसे 50 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.5% कर दिया है। हालांकि यह होम लोन लेने वालों के लिए राहत की खबर है, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि आने वाले समय में एफडी पर मिलने वाला ब्याज और घट सकता है।
एफडी वालों का क्या होगा?
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 से अब तक एफडी पर ब्याज दरों में 30 से 70 बेसिस पॉइंट तक की कटौती हो चुकी है। इसके अलावा सेविंग अकाउंट्स पर भी ब्याज दरों में गिरावट दर्ज की गई है। कई बैंकों ने सेविंग अकाउंट्स पर न्यूनतम 2.70% ब्याज देना शुरू कर दिया है।
RBI की अगला कदम क्या हो सकता है?
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर महंगाई दर (CPI) 4% के नीचे बनी रहती है और कर्ज की मांग सीमित रहती है, तो RBI अगले वित्त वर्ष यानी FY26 में कुल मिलाकर 100 बेसिस पॉइंट तक और रेपो रेट घटा सकता है। इसका सीधा असर एफडी की ब्याज दरों पर पड़ेगा।
एफडी निवेशकों के लिए रणनीति: क्या करें?
एफडी रेट।
अभी ज्यादा ब्याज दर पर एफडी बुक करें
हालांकि ब्याज दरों में गिरावट जारी है, फिर भी कई बैंक विशेषकर स्मॉल फाइनेंस बैंक — अभी भी 8% या उससे अधिक की दर पर एफडी ऑफर कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे मौजूदा ऊंची ब्याज दरों पर एफडी लॉक कर लें। लेकिन ध्यान रहे कि जोखिम वाले बैंकों में निवेश करने पर आपका पैसा केवल ₹5 लाख तक ही बीमा के दायरे में रहेगा।
मध्यम और लंबी अवधि की एफडी चुनें
अगर आपकी निकट भविष्य में कोई बड़ी वित्तीय जरूरत नहीं है, तो आप 2-5 साल की अवधि के लिए एफडी बुक कर सकते हैं। लंबे समय की एफडी पर ब्याज दरों में बदलाव धीरे-धीरे होता है, इसलिए आपको कुछ समय तक बेहतर ब्याज मिल सकता है।
एफडी लैडरिंग अपनाएं
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी लैडरिंग एक कारगर रणनीति हो सकती है। इसमें निवेश राशि को अलग-अलग अवधियों (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल आदि) में बांटा जाता है। इससे हर साल कोई न कोई एफडी मैच्योर होती है और आप उसे फिर से मौजूदा दर पर निवेश कर सकते हैं। इससे ब्याज दरों में गिरावट का कुल असर कम होता है और तरलता भी बनी रहती है।
कॉर्पोरेट एफडी: उच्च रिटर्न, उच्च जोखिम
यदि आप थोड़े जोखिम लेने के लिए तैयार हैं, तो कॉर्पोरेट एफडी एक विकल्प हो सकता है। ये एफडी बैंक एफडी की तुलना में अधिक ब्याज देती हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। निवेश से पहले रेटिंग, कंपनी की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट रिस्क का मूल्यांकन जरूर करें।
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