Samudra Manthan Mission : अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सबसे गहरा असर भारत के ऑयल और गैस सेक्टर पर पड़ा है। भारत फिलहाल तेजी से बढ़ती इकोनॉमी है, जिसे अथाह और किफायती ऊर्जा की जरूरत है। लेकिन, पश्चिम एशिया युद्ध ने भारत के सामने कई कड़वे सच उजागर किए हैं। किफायती और निर्बाध ऊर्जा भारत के विकास के लिए ऐसी जरूरत है, जिसके साथ किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता है। इसके बिना भारत के विकास की ट्रेन एक झटके में पटरी से उतर सकती है।
यही वजह है कि हालात से सबक लेते हुए भारत ने अपने ही समुद्री आंगन में छिपे अरबों डॉलर के काले सोने की खोज शुरू करने का फैसला किया है। वहीं, अगर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी की मानें, तो भारत को इसमें बड़ी कामयाबी भी मिल गई है। उन्होंने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि भारत की ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन कंपनी IOL ने समुद्र मंथन अभियान के तहत बड़े गैस फील्ड की खोज की है।
पुरी ने अपने पोस्ट में कहा, अंडमान में तीन में से दो एक्सप्लोरेशन कुओं में गैस की खोज भारत के एनर्जी सेक्टर के लिए एक बहुत जरूरी संकेत है। यह महज नैचुरल गैस की खोज नहीं है, बल्कि एनर्जी में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हमारी घरेलू एनर्जी कैपेसिटी जितनी बढ़ेगी, विदेशी इंपोर्ट पर हमारी डिपेंडेंसी उतनी ही कम होगी, एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, और देश की इकोनॉमिक पावर को एक नया बेस मिलेगा।
क्या है 'समुद्र मंथन' मिशन?
'समुद्र मंथन' भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाने वाला अभियान है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Deep Ocean Mission के तौर पर इसकी औपचारिक शुरुआत की है। इस अभियान के तहत भारत तेजी से अपने समुद्री क्षेत्रों में Deep Exploration कर रहा है। इस अभियान का मकसद नए ऑफशोर क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज करना है, ताकि Crude Oil और Gas के आयात पर निर्भरता घटाई जा सके।
कहां मिली बड़ी कामयाबी?
फिलहाल, इस अभियान के तहत अंडमान बेसिन में बड़ी कामयाबी मिली है। अंडमान बेसिन में भारत की ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन कंपनियों को विजयपुरम-2 और फिर श्री विजयपुरम-3 कुएं में गैस मिली है। इससे यह साफ हो गया है कि इस क्षेत्र एक्टिव हाइड्रोकार्बन सिस्टम मौजूद हैं।
क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। अमेरिका और चीन ही भारत से ज्यादा ऊर्जा खपत करते हैं। वहीं, क्रूड के आयात के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर है। यानी भारत की क्रूड और ऑयल की डिमांड ग्लोबल क्रूड और गैस के बाजार को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
- चीन तेजी से रिन्युएबल एनर्जी स्रोंतों की क्षमताएं बढ़ा रहा है, जिसकी वजह से उसकी क्रूड की मांग स्थिर से घटने की तरफ है।
- फिलहाल, बड़े आयातकों में सिर्फ भारत है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
क्यों बढ़ी भारत की उम्मीद?
IOL की तरफ से किए जा रहे शुरुआती खोज और परीक्षणों में यहां लगातार गैस निकल रही है। इससे यह उम्मीद काफी बढ़ गई है कि यहां गैस का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो भारत को गैस के आयात के मामले में बड़ी राहत मिल सकती है।
क्या भारत निर्यातक बन जाएगा?
यह एक बड़ा सवाल है। फिलहाल, जो खोज हुई हैं, उनके हिसाब से तो इसका जवाब 'नहीं' में है। क्योंकि, यहां से जितनी गैस निकलेगी उतनी बहुत आसानी देश में ही खप जाएगी और इसके बाद भी भारत को आयात की जरूरत पड़ेगी। लेकिन, अभी यहां बड़ा इलाका करीब 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर का दायरा है, जहां एक्सप्लोरेशन किया जा सकता है। ऐसे में इस बात की उम्मीद हर खोज के साथ बढ़ जाती है कि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ ही निर्यातक भी बन जाए।
फिर भारत को फायदा क्या मिलेगा?
अगर भारत को एक्सप्लोरेशन में ऑयल और गैस के बड़ी फील्ड मिलते हैं, तो फिलहाल इसका सबसे बड़ा फायदा इंटरनेशनल मार्केट में डिमांड के लॉन्गटर्म आउटलुक को आने वाले बदलाव के तौर पर देखने को मिलेगा, जिसके चलते कुछ हद तक क्रूड और गैस के दाम पर भी नरम हो सकते हें। वहीं, अगर भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में क्रूड और गैस का उत्पादन खुद करने लगता है, तो यह देश की इकोनॉमी के लिए वरदान जैसा होगा। इससे भारत एक एनर्जी डेफिसिट से सरप्लस देश बन जाएगा। इसका नतीजा, देश के विदेशी मुद्रा भंडार से इकोनॉमी के हर क्षेत्र पर देखने को मिलेगा।
स्वदेशी तकनीक के दम पर आगे बढ़ने की योजना
गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज आसान काम नहीं है। दुनिया के चंद देश ही इस तरह की क्षमता और तकनीक रखते हैं। यही वजह है कि दुनिया के तमाम समुद्री देश अपने समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। लेकिन, भारत समुद्र मंथन अभियान के तहत विदेशी कंपनियों के साथ ही अपनी स्वदेशी तकनीक पर भी काम कर रहा है। इसके लिए भारत ने 'मत्स्य 6000' जैसी अत्याधुनिक सबमरीन तैयार की हैं, जो समुद्र के भीतर 6 किलोमीटर तक की गहराई में जाकर वैज्ञानिक अध्ययन और संसाधनों की खोज कर पाएगी।
Samudra Manthan Infograph
तेल ही नहीं, समुद्र में छिपे हैं भविष्य के खनिज भी
समुद्र मंथन से जुड़ी कई शुरुआती रिपोर्ट बताती है कि भारत के समुद्री आंगन में सिर्फ क्रूड ऑयल और गैस ही नहीं हैं। बल्कि, यहां कोबाल्ट, निकेल, तांबा और मैंगनीज जैसे बहुमूल्य खनिज भी मौजूद हैं, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल से लेकर मिसाइल बनाने तक काम आते हैं। यानी भारत का 'समुद्र मंथन' सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में भी अहम साबित हो सकता है।
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