Viksit Bharat : 2047 तक 'विकसित भारत' एक बड़ा लक्ष्य है। बातों और वादों से अलग हटकर अगर इस लक्ष्य को व्यावहारिक तौर पर देखें, तो इस लक्ष्य का अर्थ यही है कि हर भारतीय एक विकसित देश के नागरिक जितना संपन्न हो जाए। विकसित देश होना कोई हवा-हवाई कल्पना नहीं है। बल्कि, किसी भी देश के नागरिकों की आय, उन्हें मिलने वाली सुख-सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे कई पहलुओं के आधार पर यह तय होता है।
क्या है विकसित देश होने का पैमाना?
विश्व बैंक (World Bank) के मुताबिक हाई इनकम श्रेणी की सीमा प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) US$14,000 है। इसे 1987 में $6,000 के बेस से शुरू किया, जो अब महंगाई के साथ बढ़कर ~$14,000 हो गया है। इस स्तर को पार करने पर देश को हाई इनकम नेशन की कैटेगरी में शामिल किया जाता है। हालांकि, सिर्फ औसत आय पर्याप्त नहीं है। आय का वितरण और समग्र कल्याण जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा भी अहम हैं। संक्षेप में, विकसित होने के लिए भारत को प्रति व्यक्ति आय बढ़ानी होगी और गरीबी-अमीर प्रवाह सुधारना होगा। वैश्विक महंगाई के हिसाब से इस सीमा को हर साल 2 फीसदी बढ़ाया भी जाता है।
अभी दुनिया में कितने देश विकसित?
साल 2024 तक दुनिया के लगभग 85 देश (कुल रैंक वाले देशों का लगभग 40%) इस हाई इनकम कैटेगरी में शामिल हैं। हालांकि, प्रति व्यक्ति जीडीपी देश के भीतर आय की असमानता को नहीं दर्शाती, फिर भी व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को मापने के लिए वैश्विक स्तर पर इसे सबसे उपयुक्त पैमाना माना जाता है।
वैश्विक रैंकिंग में हम अभी कहां खड़े हैं?
प्रति व्यक्ति नॉमिनल जीडीपी के मामले में भारत अभी दुनिया के 196 देशों में 140वें स्थान पर आता है, जबकि साल 2005 में यह 162वें स्थान पर था। आर्थिक अनुमानों के मुताबिक, साल 2030 तक भारत इस सूची में 134वें स्थान पर पहुंच सकता है। वहीं, क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर, समायोजित रैंकिंग में भारत 124वें स्थान पर है और 2030 तक इसके 117वें स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी नॉमिनल मामले में भारत से 29 गुना अधिक है, लेकिन पीपीपी आधार पर यह अंतर केवल 7 गुना रह जाता है। हालांकि, चीन और वियतनाम जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में हमारी रफ्तार धीमी रही है।
2047 तक विकसित बनने का पूरा गणित
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने एक आम भारतीय के नजरिये से विकसित भारत के लक्ष्य का विश्लेषण करते हुए बताया है कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को किस रफ्तार से आगे बढ़ना होगा। इसके अलावा हमारे सामने क्या मुख्य चुनौतियां हैं। उनके आंकलन के मुताबिक यदि भारत को साल 2047 तक विकसित देश बनना है, तो अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी को हर साल कम से कम 9% की दर से बढ़ाना होगा, जबकि कुल जीडीपी वृद्धि दर को 9.5% पर रखना होगा। 4% औसत महंगाई और 2% सालाना रुपये के अवमूल्यन (Depreciation) के साथ, भारत को अगले 25 वर्षों तक लगातार 7.5% की वास्तविक (Real) जीडीपी विकास दर बनाए रखनी होगी। यदि हमारी सालाना प्रति व्यक्ति विकास दर इस आंकड़े से कम रहती है, तो विकसित होने का सफर लंबा खिंचता जाएगा।
Vikasit Bharat Timeline
अब नहीं तो कभी नहीं
इस यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत के पास समय बहुत कम है। देश में जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Changes) आर्थिक विकास की तुलना में बहुत तेजी से हो रहे हैं। विकसित देशों के आर्थिक सफर की तुलना में भारत इसे महज एक-तिहाई समय में पूरा करने की कोशिश में है, लेकिन हमारी डेमोग्राफी उनसे 5 से 8 गुना तेजी से बदल रही है।
प्रजनन दर तेजी से गिर रही
देश में प्रजनन दर (Fertility Rate) तेजी से गिर रही है, जिससे अनुमान है कि साल 2053 के पहले ही भारत की औसत आयु (Median Age) 40 वर्ष को पार कर जाएगी। वैश्विक इतिहास दिखाता है कि जब किसी देश की औसत आयु 40 वर्ष से अधिक होती है, तो कार्यबल सिकुड़ने और निर्भर आबादी बढ़ने के कारण आर्थिक विकास दर गंभीर रूप से धीमी हो जाती है। इसलिए भारत के लिए यह पूरी तरह से 'अब नहीं तो कभी नहीं' वाली स्थिति है।
विकसित बनने के लिए भारत को क्या करना होगा?
यदि भारत को 'मिडिल-इनकम ट्रैप' (Middle-Income Trap) से बचना है और अपनी विकास दर को तेज करना है, तो उसे मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर ठोस काम करना होगा।
महिला कार्यबल की भागीदारी: भारत में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है। कानून-व्यवस्था में सुधार, लचीले कार्य नियम और महिला-प्रधान क्षेत्रों में रोजगार पैदा करके ही इस जनसांख्यिकीय लाभांश का सही उपयोग किया जा सकता है।
तेजी से पूंजी निर्माण: वर्तमान में घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा (जीडीपी का लगभग 2%) म्यूचुअल फंड और इक्विटी में आ रहा है। इस वित्तीय क्षमता का उपयोग ओसीईएन (OCEN) जैसे ढांचे के माध्यम से एमएसएमई (MSMEs) तक ऋण पहुंचाने के लिए करना होगा। इसके अलावा रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे की आपूर्ति को सुगम करना होगा।
स्वदेशी तकनीक में निवेश: भारत का उदय किसी बाहरी सहायता से नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच खुद के दम पर होगा। इसके लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, एआई (AI) और रोबोटिक्स में भारी निवेश की आवश्यकता है ताकि उत्पादन लागत को घटाया जा सके और उत्पादकता में निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सके।
अगर भारत ये तीनों काम कर पाता है, तो भारत के लिए साल 2040 के दशक के अंत तक एक हाई इनकम नेशन बनने की पूरी संभावना है। लेकिन, इसके लिए हमें एक हाई-ट्रस्ट सोसाइटी का निर्माण करना होगा और नीति निर्माताओं से लेकर उद्यमियों तक, सभी में जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना होगा।
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