भारत दुनिया के सबसे बड़े Gold उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर साल देश में करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। शादी-ब्याह, त्योहार, निवेश और ग्रामीण बचत की मजबूत परंपरा की वजह से भारत में गोल्ड की मांग लगातार बनी रहती है। लेकिन बड़ी समस्या यह है कि देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा सोना विदेशों से आयात करता है।
अब इसी बढ़ते इंपोर्ट बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीद एक साल तक टालने की अपील की है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और डॉलर पर दबाव के बीच सरकार विदेशी मुद्रा भंडार और करंट अकाउंट डेफिसिट को लेकर सतर्क दिख रही है।
कम की खपत तो क्या होगा?
बहरहाल, बड़ा सवाल यह है कि अगर भारतीय PM Modi की अपील मानते हुए एक साल तक गोल्ड खरीदना बंद कर दें या कम कर दें, तो क्या होगा? भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) 10 अप्रैल, 2026 तक करीब 700.9 अरब डॉलर रहा, जबकि देश का सालाना गोल्ड इंपोर्ट बिल लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यानी सिर्फ सोने का आयात ही भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व का करीब 8-9% के बराबर दबाव पैदा करता है।
| Gold खरीद में कमी | अनुमानित विदेशी मुद्रा बचत | Forex Reserve पर संभावित राहत |
|---|---|---|
| 10% कमी | करीब $5.9 अरब | ~0.8% राहत |
| 25% कमी | करीब $14.7 अरब | ~2.1% राहत |
| 50% कमी | करीब $29.4 अरब | ~4.2% राहत |
| 75% कमी | करीब $44.1 अरब | ~6.3% राहत |
| 100% कमी | करीब $58.9 अरब | ~8.4% राहत |
दूसरा पहलू भी देखना होगा
पूरी तरह से गोल्ड की खरीदारी बंद कर देना या कम कर देना भले ही एक बार विदेशी मुद्रा भंडार, चालू खाता घाटे और रुपये की गिरावट को थामने में कारगर साबित हो। लेकिन, इसका दूसरा पहलू भी है। लाखों लोग इस सेक्टर में काम करते हैं। शेयर बाजार में लिस्टेड ज्वैलरी कंपनियों से लेकर देश के गांव-गांव तक खुली ज्वैलरी की दुकानें और वहां काम करने वालों के रोजगार पर इसका असर होगा।
अगर गोल्ड खरीद लगभग बंद हो जाए, तो इसका असर भारत के जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर में जुड़े करीब 50 लाख से 61 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। IBEF के मुताबिक इस सेक्टर में 5 मिलियन से अधिक लोग काम करते हैं, जबकि NILERD की रिपोर्ट इसे लगभग 6.1 मिलियन workers वाला सेक्टर बताती है।
PM मोदी ने क्या अपील की?
हैदराबाद की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कहा कि अगले एक साल तक गैर-जरूरी गोल्ड खरीद टालें। साथ ही उन्होंने ईंधन की बचत, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने, इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और गैर-जरूरी विदेशी यात्रा से बचने की भी अपील की। सरकार का संकेत साफ है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश को डॉलर आउटफ्लो कम करने की जरूरत है।
| महीना | अनुमानित गोल्ड इंपोर्ट |
|---|---|
| जनवरी | करीब 100 टन |
| फरवरी | 65-66 टन |
| मार्च | 20-22 टन |
| अप्रैल | सिर्फ 15 टन |
शेयर बाजार पर क्या असर?
PM मोदी की अपील के बाद सोमवार को ज्वैलरी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। Titan, Kalyan Jewellers, Senco Gold और Sky Gold जैसे शेयरों में 5% से 11% तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि अगर गोल्ड खरीद धीमी हुई तो ज्वैलरी कंपनियों की बिक्री और मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
धीमा पड़ रहा इंपोर्ट
गोल्ड इंपोर्ट में हाल के महीनों में तेज गिरावट देखी गई है। जनवरी में जहां आयात करीब 100 टन के आसपास था, वहीं फरवरी में यह घटकर 65 से 66 टन पर आ गया। मार्च में यह और फिसलकर 20 से 22 टन तक पहुंचा। अप्रैल में तो इंपोर्ट केवल 15 टन के आसपास रहा, जो बेहद कम स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें, बैंक मंजूरी में देरी, कस्टम क्लियरेंस और टैक्स अनिश्चितताओं ने भी आयात को प्रभावित किया है।
Gold Facts
त्योहार और शादी सीजन से पहले चिंता
आने वाले महीनों में शादी और त्योहारों का सीजन है, जब सोने की मांग आमतौर पर तेज होती है। ऐसे में नीति-निर्माताओं की कोशिश है कि मांग बनी रहे, लेकिन अनावश्यक आयात पर अंकुश भी लगे। यही वजह है कि सोने को लेकर प्रधानमंत्री की अपील सिर्फ एक आर्थिक सुझाव नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बचाने की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।
Gold Rate Today (आज सोने का भाव)
Gold Rate Today: दिल्ली में आज 24 कैरेट (99.9%) सोने का भाव 10 ग्राम के लिए ₹1,54,765 पर बना हुआ है। वहीं MCX पर जून 2026 गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 0.28% की गिरावट के साथ ₹1,52,100 पर ट्रेड कर रहा है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर इंडेक्स की चाल और सुरक्षित निवेश की मांग के बीच सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्ट एशिया तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते गोल्ड में आगे भी तेज हलचल देखने को मिल सकती है।
