Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Explained : सर्विस चार्ज पर क्या कहता है कानून? रेस्टोरेंट की मनमानी पर कहां करें शिकायत?

रेस्टोरेंट खाने की बिलिंग में अक्सर सर्विस चार्ज वसूलते हैं। ज्यादातर ग्राहक बिना कोई सवाल पूछे बिल का पूरा भुगतान भी कर देते हैं। जबकि, रेस्टोरेंट को सर्विस चार्ज का भगुतान किया जाए यह जरूरी नहीं।

Image
सर्विस चार्ज देने से कर सकते हैं इनकार
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Jul 20, 2026, 13:02 IST
Follow on Google News

Restaurant Service Charge का मुद्दा फिर सुर्खियों में है। उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने खुद इस मुद्दे को उठाते हुए उन रेस्टोरेंट को चेतावनी दी है, जो ग्राहकों से उनकी मर्जी के बिना सर्विस चार्ज वसूलते हैं। जोशी ने यह कदम तब उठाया है, जब खुद उनको एक रेस्टोरेंट ने सर्विस चार्ज वाला बिल थमा दिया। केंद्रीय मंत्री के साथ हुई इस घटना के बाद केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने स्वत: संज्ञान लेकर 41 बड़े रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई की है।

बहरहाल, यहां जानते हैं कि कानूनी तौर पर सर्विस चार्ज की क्या स्थिति है? किन परिस्थितियों में रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज मांग सकते हैं और कब ग्राहक सर्विस चार्ज देने से मना कर सकते हैं। इसके अलावा अगर रेस्टोरेंट जबरन सर्विस चार्ज वसूलते हैं, तो ग्राहकों के क्या अधिकार हैं और वे कहां इस तरह के मामले की शिकायत कर सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का कहना है कि सर्विस चार्ज पूरी तरह से ग्राहक की मर्जी पर आधारित होता है। कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहक की मर्जी के बिना सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता है। अगर कोई रेस्टोरेंट जबरन ऐसा शुल्क वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

क्या होता है सर्विस चार्ज?

Service Charge किसी बिजनेस की तरफ से वसूला जाने वाला वह शुल्क है, जो उसके मुख्य उत्पाद या सेवा से अलग वसूल किया जाता है। मसलन, आपने किसी रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाया, जहां टैक्स के साथ खाने की कुल कीमत 1000 रुपये हुई। लेकिन, रेस्टोरेंट आपसे 1100 रुपये मांगता है। आप जब बिल में देखते हैं, तो 100 रुपये सेवा शुल्क दिखाया जाता है। रेस्टोरेंट यह शुल्क आपको दी जाने वाली सेवा के एवज में वसूलता है। प्रॉपर्टी, बैंकिंग और आतिथ्य जैसे सेक्टर में अक्सर में इस तरह का शुल्क वसूला जाता है।

क्या यह सरकार को जाता है?

यहां यह बात समझना जरूरी है कि सर्विस चार्ज किसी तरह का टैक्स नहीं है। बल्कि, यह रेस्टोरेंट की तरफ से लगाया जाने वाला शुल्क है, जो असल में आपको खाना परोसने, बैठने का बंदोबस्त करने जैसी चीजों के लिए लिया जाता है। यानी यह पूरा पैसा असल में रेस्टोरेंट को मिलता है। कई बार लोग इसे टिप समझने की भी भूल करते हैं, जो कि अक्सर वेटर को दी जाती है। सर्विस चार्ज में से वेटर को कुछ नहीं मिलता है। बल्कि, पूरा पैसा बिजनेस ऑनर के पास जाता है।

क्या है इसकी कानूनी स्थिति?

रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना कानूनन अनिवार्य नहीं है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने जुलाई 2022 में जारी अपने दिशानिर्देशों में साफ कहा था कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट बिल में अपने-आप सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता और न ही ग्राहक पर इसका भुगतान करने का दबाव बना सकता। यदि ग्राहक सर्विस चार्ज देने से मना करता है तो उसे सेवा देने या रेस्टोरेंट में प्रवेश से भी नहीं रोका जा सकता। इस मुद्दे पर कानूनी विवाद के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 मार्च, 2025 को सीसीपीए के इन दिशानिर्देशों को बरकरार रखा।

क्यों सर्विस चार्ज वसूलने पर जोर?

सवाल यह भी उठता है कि अगर रेस्टोरेंट को ऑपरेशनल कॉस्ट निकालनी है, तो सर्विस चार्ज की जगह सीधे खाने की कीमत बढ़ाकर इसे क्यों नहीं वसूल कर लिया जाता है। तमाम रेस्टोरेंट ऑनर्स का इस मामले में कहना है कि सर्विस चार्ज की रकम कर्मचारियों के कल्याण पर खर्च की जाती है। अगर इस रकम को खाने की कॉस्ट में जोड़ा जाएगा, तो एक तरफ जहां खाना 10 फीसदी तक महंगा हो जाएगा, जो प्रतिस्पर्धा के लिए ठीक नही हैं। दूसरी तरफ टैक्स कंप्लायंस का बोझ भी बढ़ेगा।

सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं

सर्विस चार्ज देना अनिवार्य नहीं

पूरी तरह बैन या अवैध क्यों नहीं?

यदि सरकार सर्विस चार्ज पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दे, तो रेस्टोरेंट यह लागत सीधे खाने की कीमत में जोड़ देंगे। ऐसे में ग्राहक कुल मिलाकर उतना ही या उससे अधिक भुगतान कर सकता है। इसलिए वर्तमान व्यवस्था का मकसद कीमत तय करना नहीं, बल्कि ग्राहक की सहमति और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्विस चार्ज पर विवाद का मुख्य मुद्दा टैक्स चोरी नहीं, बल्कि ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना अतिरिक्त राशि वसूलना है। हालांकि, यदि कोई प्रतिष्ठान ग्राहक को दिए गए बिल और जीएसटी रिकॉर्ड में जानबूझकर अंतर रखता है, तो वह अलग से जीएसटी कानून और आयकर कानून के तहत जांच और कार्रवाई का विषय बन सकता है।

मनमानी पर कहां करें शिकायत?

अगर कोई रेस्टोरेंट आपकी इच्छा के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ता है, उसे हटाने से इनकार करता है या भुगतान के लिए दबाव बनाता है, तो आपके पास शिकायत करने के कई विकल्प हैं।

1. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) : सबसे पहले 1915 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए भी शिकायत की जा सकती है। कई मामलों में यहीं मध्यस्थता के जरिए समाधान हो जाता है।

2. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) : यदि मामला गंभीर हो या रेस्टोरेंट लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहा हो, तो सीसीपीए को शिकायत भेजी जा सकती है। सीसीपीए के पास जांच कराने और उपयुक्त कार्रवाई करने की शक्तियां हैं।

3. ई-जागृति पोर्टल : यदि आप कानूनी राहत चाहते हैं, तो ई-जागृति (e-Jagriti) पोर्टल के माध्यम से संबंधित उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म घर बैठे शिकायत दाखिल करने और मामले की प्रगति देखने की सुविधा देता है।

शिकायत दर्ज करने से पहले क्या करें?

सबसे पहले यह तो आपको उस बिल की कॉपी संभालकर रखनी चाहिए, जिसमें आपकी मर्जी के बिना सर्विस चार्ज जोड़ा गया है। इसके अलावा अगर मेन्यू में सर्विस चार्ज का उल्लेख है, तो उसकी फोटो ले लें। कोशिश करें कि ऐसे बिल का भुगतान डिजिटल तरीके से करें और उसकी रसीद सुरक्षित रखें। यदि रेस्टोरेंट ने सर्विस चार्ज हटाने से मना किया है, तो बातचीत का कोई उपलब्ध साक्ष्य (जैसे लिखित जवाब या रिकॉर्ड) भी सुरक्षित रखें।

End of Article