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अब घर नहीं, सेहत और सुकून भी खरीद रहे लोग! रियल एस्टेट में तेजी से बढ़ रहा वेलनेस होम का ट्रेंड

अब लोग घर खरीदते समय सिर्फ कीमत, लोकेशन और लग्जरी सुविधाओं पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि सेहत, मानसिक सुकून और बेहतर जीवनशैली को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

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वेलनेस होम

बदलते दौर के साथ रियल एस्टेट सेक्टर में भी बड़ा बदलाव आया है।अब लोग घर खरीदते समय सिर्फ कीमत, लोकेशन और सुविधाओं पर ही नहीं, बल्कि सेहत और सुकून को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी वजह से वेलनेस होम का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। वेलनेस होम ऐसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट होते हैं, जहां घरों के साथ हरियाली, खुले स्थान, हेल्थकेयर, मनोरंजन और सेहत को बेहतर बनाने वाली अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाता है।

ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट (GWI) के अनुमान के मुताबिक, 2025 में वेलनेस रियल एस्टेट का वैश्विक बाजार 876 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें सालाना आधार पर 23% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। संस्था का अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार बढ़कर 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में अगर आप भी नया घर खरीदने की योजना बना रहे हैं और चाहते हैं कि आपके घर में रहने के साथ सेहत और सुकून का भी ख्याल रखा जाए, तो वेलनेस होम एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसे खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं कि वेलनेस होम चुनते समय किन पहलुओं की जांच करना जरूरी है।

क्यों बढ़ रहा है वेलनेस होम का ट्रेंड?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, प्रदूषण, सीमित खुली जगह और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय की कमी बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में लोग ऐसी जगह रहना चाहते हैं, जहां रोजमर्रा की जिंदगी में फिटनेस, आराम और प्रकृति के करीब रहने के अवसर मिल सकें।

वेलनेस होम का आकर्षण इसी जरूरत से जुड़ा है। पार्क और वॉकिंग ट्रैक जैसी सुविधाएं लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। वहीं, प्राकृतिक रोशनी, हवा की बेहतर आवाजाही और हरियाली घर के वातावरण को अधिक आरामदायक बना सकती है।

घर की असली लग्जरी अब सेहत

दिग्गज रियल एस्टेट एक्सपर्ट और अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने बताया कि आज के होम बायर्स के लिए घर सिर्फ लग्जरी और स्टेटस सिंबल नहीं, बल्कि बेहतर जीवनशैली का माध्यम बनता जा रहा है। लोग अब ऐसे घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां खुली जगह, हरियाली, प्राकृतिक रोशनी, फिटनेस सुविधाएं और मानसिक सुकून मिल सके। यही वजह है कि रियल एस्टेट में वेलनेस होम्स की मांग बढ़ रही है। मेरा शुरू से ही ऐसे घर बनाने पर फोकस रहा है, जो सिर्फ रहने की जगह न हों, बल्कि लोगों को बेहतर और स्वस्थ जीवनशैली भी दें। इसके लिए बड़ी बालकनी, हवादार कमरे, पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और सीधी धूप जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ बड़े हरे-भरे पार्क, जॉगिंग ट्रैक, प्लेग्राउंड, योगा सेंटर और जिम जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जाता है

फ्लैट बुक करने से पहले किन बातों का रखें ख्याल

वेलनेस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम मार्केटिंग: अगर कोई डेवलपर्स वेलनेस होम के नाम पर फ्लैट बेच रहा है तो यह जरूर चेक करें कि क्या वह ऐसा सिर्फ मार्केटिंग के लिए कर रहा है या असल में वह उसे उस अनुरूप बना भी रहा है। असली वेलनेस घरों में साउंड-प्रूफिंग, ट्रैफिक का शोर कम करने के लिए डबल-ग्लेज्ड खिड़कियां, एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम और नॉन-टॉक्सिक या कम VOC वाले बिल्डिंग मटीरियल जैसी चीजें होती हैं।

कीमत पर असर: फ्लैट बुक करने से पहले चेक करें कि आप सिर्फ वेलनेस टैग के लिए बहुत ज्यादा कीमत तो नहीं चुकाने जा रहे हैं। आप जो कीमत देने की तैयारी कर रहे हैं, उस हिसाब से आपको सुविधाएं भी मिलेंगी या नहीं?

ऑपरेशनल हेल्थकेयर: पता करें कि बताई गई हेल्थ या वेलनेस सुविधाओं को असल में मैनेज किया जा रहा है या नहीं। देखें कि ऑन-कॉल मेडिकल सुविधा, विजिटिंग न्यूट्रिशनिस्ट, फिटनेस ट्रेनर या वेलनेस कोच असल में काम कर रहे हैं या उनके लिए अलग से सर्विस फीस देनी होगी।

बायोफिलिक डिजाइन: देखें कि आप जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक करने जा रहे हैं, उसका डिजाइन वेलनेस होम के अनुसार है भी या नहीं? कई बार बिल्डर सिर्फ दिखावे के लिए छोटे-मोटे सजावटी कोने बनकार पैसे लेना चाहते हैं।

कंस्ट्रक्शन क्वालिटी: वेलनेस टैग वाले प्रोजेक्ट में खिड़कियों की जगह और शोर रोकने की क्षमता की जांच करें। खराब साउंड-प्रूफिंग या शहर के भारी ट्रैफिक के शोर से आरामदेह माहौल बनाने का मकसद बेकार हो सकता है।

रीसेल की संभावना: वेलनेस सुविधाओं से प्रॉपर्टी का आकर्षण बढ़ सकता है, लेकिन खरीदारों को रीसेल वैल्यू की जरूर जांच करनी चाहिए। इसके अलावा लोकेशन और कनेक्टिविटी का भी ख्याल करना चाहिए।

क्या वेलनेस होम खरीदना फायदे का सौदा?

वेलनेस होम उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो घर खरीदते समय सिर्फ निवेश या रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवनशैली को भी महत्व देते हैं। परिवार, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों के हिसाब से हरियाली, सुरक्षित खुली जगह और फिटनेस सुविधाएं रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना सकती हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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