Death Care Industry India: भारत में अंतिम संस्कार 30,000 करोड़ रुपये का कारोबार बन गया है। 2030 तक यह कारोबार हर साल 15-20% से ज्यादा की ग्रोथ करते हुए यह 40 से 70 हजार करोड़ का बाजार बन सकता है। जबकि, दुनिया में यह बाजार 6 फीसदी सालाना के हिसाब से ग्रोथ कर रहा है। भारत में सामाजिक ताने बाने में तेजी से बदलाव आ रहा है। परिवार छोटे हो रहे हैं, सामाजिक इंटरएक्शन कम हो रहा है। भारत जैसे देश में अंतिम संस्कार का व्यापार बन जाना कभी कल्पना से भी परे रहा होगा। लेकिन, अब यह हमारी जीडीपी का हिस्सा है, जिसमें व्यक्ति मौत के बाद भी योगदान दे रहा है। अगर भारत में यह बाजार दुनिया के हिसाब से भी ग्रोथ करता है, तो 2030 तक यह बाजार 38 से 40 हजार करोड़ का हो जाएगा।
क्यों व्यापार बन गया अंतिम संस्कार?
तीव्र शहरीकरण और छोटे होते परिवारों की वजह से अब अंतिम संस्कार का प्रबंध परिवार के लिए चुनौती बन गया है। अपनों को खोने के बीच बिरीवमेंट और कैजुअल लीव के बीच तालमेल बिठाते हुए परिवारों के लिए अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था करना मुश्किल लगता है। ऐसे में एम्बुलेंस, शव वाहन, फ्रीजर बॉक्स, श्मशान की बुकिंग, पंडित, पूजा सामग्री और कई दूसरी व्यवस्थाएं कुछ घंटों के भीतर करनी पड़ती हैं। यही वह समस्या है, जिसे अब भारत के स्टार्टअप और बड़ी कंपनियां बिजनेस अवसर के रूप में देख रही हैं।
इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है यह कारोबार?
भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल है। देश में हर घंटे सैकड़ों लोगों की मौत दर्ज होती है और बड़े शहरों में प्रतिदिन हजारों अंतिम संस्कार होते हैं। लेकिन केवल मृत्यु दर इस उद्योग की वजह नहीं है। असली बदलाव समाज में आया है। आज संयुक्त परिवार तेजी से खत्म हो रहे हैं। लाखों युवा नौकरी के लिए दूसरे शहरों या विदेशों में रहते हैं। ऐसे में किसी परिजन की अचानक मौत होने पर पूरा अंतिम संस्कार संभालना मुश्किल हो जाता है। यहीं से पेशेवर कंपनियों की जरूरत पैदा हुई, जो एक फोन कॉल पर पूरी व्यवस्था संभाल लेती हैं।
85-90% बाजार अभी भी असंगठित
सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत का लगभग 85 से 90 फीसदी अंतिम यात्रा बाजार अभी भी असंगठित है। यानी अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर नकद भुगतान और पारंपरिक व्यवस्था के जरिए संचालित होती हैं। संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी अभी केवल 10 से 15 फीसदी के आसपास है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस उद्योग में आगे बड़ी संभावनाएं देखते हैं।
कौन-कौन सी कंपनियां उतर चुकी हैं?
अब यह कारोबार केवल छोटे स्थानीय ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रहा। इस क्षेत्र में कई संगठित कंपनियां और स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जिनमें लास्ट जर्नी, अंत्येष्टि, मोक्षशिल्प, श्रद्धांजलि डॉट कॉम और सुखांत फ्यूनरल प्रमुख हैं। इनमें से कुछ कंपनियां प्रतिदिन कई अंतिम संस्कार कराती हैं, जबकि कुछ डिजिटल मेमोरियल, ऑनलाइन श्रद्धांजलि और अंतरराष्ट्रीय शव परिवहन जैसी सेवाएं भी देती हैं।
जीवन की अंतिम यात्रा का बिजनेस
बड़ी कंपनियों को इसमें क्या दिख रहा है?
फूल और गिफ्ट कारोबार से जुड़े बड़े ब्रांड इस उद्योग में उतर रहे हैं। क्योंकि, जिन कंपनियों के पास पहले से लॉजिस्टिक्स, कोल्ड स्टोरेज, वाहन और शहरों में नेटवर्क मौजूद है, वह इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल अंतिम संस्कार सेवाओं में भी कर सकती है। इससे नई सेवाएं शुरू करने की लागत कम हो जाती है और पहले से मौजूद नेटवर्क का बेहतर उपयोग होता है।
कैसे काम करता है पूरा बिजनेस मॉडल?
इन कंपनियों का मॉडल काफी अलग है। इनके पास हर शहर में खुद का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता। ये स्थानीय एम्बुलेंस ऑपरेटर, शव वाहन, फ्रीजर बॉक्स, फूल विक्रेता, पंडित और दूसरे सेवा प्रदाताओं को अपने नेटवर्क से जोड़ती हैं। ग्राहक एक नंबर या वेबसाइट पर संपर्क करता है और कंपनी पूरी व्यवस्था संभाल लेती है।
कितने रुपये में मिलती हैं सेवाएं?
अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक सेवाओं को अलग-अलग पैकेज में बांटा गया है। मसलन, बेसिक पैकेज ₹15,000 से ₹30,000 का होता है। इसमें शव की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार का प्रबंध किया जाता है। इसके बाद ₹50,000 से ₹2 लाख तक या इससे भी ज्यादा तक के पैकेज होते हैं, जिनमें अंतिम यात्रा से लेकर बाद में होने वाले तमाम संस्कार और रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है।
विदेश से पार्थिव शरीर लाने की सेवा
₹2.5 लाख से ₹10 लाख या उससे अधिक के पैकेजों में शव वाहन, फ्रीजर बॉक्स, श्मशान बुकिंग, पूजा व्यवस्था, लाइव स्ट्रीमिंग और विदेश से शव लाने तक की सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।इस उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनियां पारंपरिक विज्ञापन पर कम खर्च करती हैं। ज्यादातर ग्राहक गूगल पर "फ्यूनरल सर्विस", "शव वाहन", "फ्रीजर बॉक्स" जैसी खोज करते हैं। इसी वजह से कंपनियां डिजिटल सर्च और ऑनलाइन हेल्पलाइन पर ज्यादा निवेश कर रही हैं।
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